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Sunday, July 16, 2017

आज से दिन बड़ा हो रहा है

सुनो दोस्तों इक नई सी खबर है, की आज से दिन बड़ा हो रहा है ,
खोया - खोया सा अब शामो सहर है, की आज से दिन बड़ा हो रहा है

मोटी परत ठंढ की आने वाली, कोहरें  फ़ज़ाओं में है छानेवाली ,
जो भी है ये सब शरद का असर है, की आज से दिन बड़ा हो रहा है

 सर्द हवाओं के झोंके चलेंगे , अब तेल से दादा तलबे मलेंगे ,
दादी हमारी कहेगी कहर है , की आज से दिन बड़ा हो रहा है | 

पहनने पड़ेंगे अब स्वेटर पर स्वेटर , बैठेगी मम्मी ऊन-कांटा लेकर ,
इसी काम में बितनी दो - पहर है , की आज से दिन बड़ा हो रहा है | 

अब हर जगह पर जलेंगी अलावें , किये जायेंगे कई तरह के उपाएँ ,
मानव तो मानव पशु को भी डर है, की आज से दिन बड़ा हो रहा है | 

कहने को तो कहते हैं ठण्ड सजा है , मगर इसका अपना अलग ही मज़ा है,
अब देर तक सोने का अवसर है , की आज से दिन बड़ा हो रहा है | 

चाय और कॉफ़ी की चुस्की लगाते, चद्दर लिहाफों  में छुपते छुपाते ,
सबकी नज़र होनी आराम पर है , की आज से दिन बड़ा हो रहा है || 

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