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Sunday, July 16, 2017

,,आँखें,,

कुछ काली सी कुछ भूरी सी , कुछ होती हैं नीली आँखें,
कुछ आघातों से सुनी सी , कुछ हर्षित चमकीली आँखें ,

कई उभरी सी और बड़ी-बड़ी , कई धंसी हुई डूबी आँखें,
कई राग-रंग में फँसी हुई , कुछ तंगहाल उबी  आँखें ,

पलकों के नीचे छुपी हुई , दुनिया को दिखलाती आँखें ,
कुछ डरी-डरी सी सहमी सी , बचपन की घबराती आँखें ,

कुछ पाने पे कुछ खोने पे , हो जाती है गीली आँखें ,
यौवन का आना और होना , सपनों से रंगीली आँखें ,

बिछुडों से मिलने का वो सुख , खुशियों से भरी खिली आँखें ,
गिरती उठती मिलती छुपती , दुल्हन की शर्मीली आँखें ,

कभी हार जीत में फँसी हुई , बेसब्री  में  उलझी  आँखे ,
कई आशा और निराशा में , बोझिल सी बुझी-बुझी आँखे ,

वो इंतजार में अपनों की , इकटक राहें तकती आँखें ,
हो सूनापन और तन्हाई , और रातों को जगती आँखे ,

यादों में अपने सजना की , सजनी की है खोई आँखें ,
है राज ये लाली खोल रही , की रातों को रोई आँखें ,          

वो लाचारी और झुरियों में , अंतिम घड़ियाँ गिनती आँखें ,
बीते  लम्हों  के  साये  से , कुछ प्यारे पल बिनती आँखें ,

है नूर भी ये मगरूर भी ये , है नाज भरी कातिल आँखें ,
लाखों पहरों के आगे भी , लेती - देती  है  दिल  आँखें ,

जो बोल नहीं पाते ये लब , वो बातें भी कहती आँखें ,
सब भूल भी जाये कोई पर , है याद सदा रहती आँखें ,

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