Sunday, July 16, 2017

आलसनामा

दिन रात करूँ सुबह शाम करूँ , जब जी चाहे आराम करूँ ,
बीते ऐसे  ही  अब  जीवन  ,  जी करता ना कोई काम करूँ ,

ये भाग दौड़ है क्यूँ करना , इस उलझन में है क्यूँ पड़ना ,
इन जोड़-तोड़ से क्या होगा , आखिर तो इक दिन है मरना ,

जाने  सब  क्यूँ  बेचैन  रहे , सपनों  में  खोये  नैन  रहे ,
ये जीना भी कोई जीना है , ना नींद रहे ना चैन रहे ,

जो  होना  है  वो  होता  है , कोई पाता है कोई खोता है ,
कोई पत्थर से सर फोड़ रहा , कोई तान के चादर सोता है ,

दुनिया  मारे  हमको  ताने , आये हमे अपनी समझाने ,
पर पक्के हम अपनी धुन के , हम तो अपनी मन की माने  ,               

जो  होता  है  वो  हो  बेकल  , हमको न गंवाने है ये पल ,
हम आज में जीने वाले हैं , देखेंगे  जो  होना  हो  कल  ,           

है अपने लिए हरपल हरक्षण , है ऐसो आराम भरा जीवन ,
परवाह नहीं करनी हमको , चाहे कहे कोई इसे आलसपन | 

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