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Sunday, July 16, 2017

ये तितलियाँ

इठलाती तितलियाँ , कुछ बलखाती तितलियाँ
छोटी-छोटी बातों पे भी , खिलखिलाती तितलियाँ 

इस डाल से उस डाल पे , हर डाल पे बैठे
आती नहीं है हाथ में , उड़ जाती तितलियाँ 

जो आ गया करीब , फिर न दूर जा सका
जो दूर हो उसे पास , बुलाती तितलियाँ     

दंग है जमाना इनके , जलवों के आगे 
नखरों से सबके होश , उड़ाती तितलियाँ   

अब कौन करे मंदिरों में , पूजा अर्चना
आजकल तो है दिलों में , पूजाती तितलियाँ    

वो भूल गया अपने , सारे सपने इरादे 
है आजकल तो सपनों में , आती तितलियाँ  

उड़ गए सब संस्कार , धूल की तरह
नए-नए तजुर्बे अब , सिखलाती तितलियाँ   

टूट जातें हैं पलों में , बांध सब्र के    
सोये हुए अरमान है , जगाती तितलियाँ 

आँखों से मिलती आँखें , बातों से मिलती बातें 
पर दिल से दिल कभी ना , मिलाती तितलियाँ 

वो दूर हुए जा रहें हैं , अपनें अपनों से
क्योंकि ज्यादा प्यार है , जताती तितलियाँ    

माँ-बाप सफलता की , चाहत में मर रहें 
बेटे को असफलता की , लत लगाती तितलियाँ       

उसको नहीं पसंद , जमानें की उलझनें
लगती है बुरी दुनियां , बस भाती तितलियाँ

बढ़ती गई नजदीकियां , मिटता गया भरम              
आँखों से शरम लाज , है हटाती तितलियाँ 

जब तक हो भरा जेब , बनी दोस्ती रहें          
फक्करों से अपना साथ , है छुड़ाती तितलियाँ 

ये मौज मस्ती के लिए , करती हैं यारियां 
और नाम दोस्ती का , है बताती तितलियाँ 

जीता है इनसे वो ही , इच्छा दृढ रही जिनकी 
बचना की हर मोड़ पे , बहकाती तितलियाँ

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