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Sunday, July 16, 2017

मेरे सच हसीन थे

ये गम नहीं की गैरों ने कस्ती है डुबोई
हैं गम मुझे अपने खड़े तमाशबीन  थे ,

रह-रह के उसको दर्द ये बेचैन करता हैं ,                                                           
उसके ख़ाब से ज्यादा मेरे सच हसीन थे|| 

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