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Wednesday, September 13, 2017

हो गई है पीर पर्वत / दुष्यंत कुमार

आइये दुष्यंत कुमार की सबसे प्रचलित कविता को पढ़ें -


हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए 

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी
शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए

लगा तीर कोई सीने में

टिस ऐसी उठी गम्भीर कोई सीने में।
आह निकली हुआ पीड़ कोई सीने में।

तूने आंखों से करामात कोई की शायद
ऐसा लगता है लगा तीर कोई सीने में।।
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प्रीति सुमन
Preeti Suman

'इश्क' जान पर बन आई

'इश्क' जान पर बन आई है सुनते हो तुम ?
दिल धड़कता है तो सांसों में घुटन होती है।

Ishk Jaan Par Ban Aai Hai Sunte Ho Tum ?
Dil Dhadakta Hai To Sanso'n Me Ghutan Hoti Hai..

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Preeti Suman
प्रीति सुमन

डिलीट करदी

तोड़ देती ये मुझे मुझमें ही इससे पहले ,
डिलीट करदी तेरी फ़ोटो तेरा नंबर तेरी यादें।

Tod Deti Ye Mujhe Mujhme Hi Isse Pahle ,
Delete Kardi Teri Photo Tere Number Teri Yade'n .

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Preeti Suman
प्रीति सुमन

बात खत्म हो जाएगी

कुछ बातें तो कहनी थी ,पर छोड़ो अब वो रहने दो,

तुम बस मुझपर हँस दोगी , और बात खत्म हो जाएगी ।।


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प्रीति सुमन

वो डूब गए

आये थे जानने आँखों की गहराई का सबब,

वो गहरे डूब गए हैं तलाश जारी है।।

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प्रीति सुमन

मेरे सब शब्द

मेरे मरने के बाद ये बोझ गर लगे तुमको,

मेरे सब शब्द मेरे कानों के पास रख देना।।

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प्रीति सुमन

चाँद पैरवी को आता है

रात का आना मुक़र्रर है इक सदी से मगर,

फ़िर भी हर रात चाँद पैरवी को आता है।

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प्रीति सुमन

ग़ालिब

आइये ग़ालिब को पढ़े

1.
 जानदी , दी हुई उसी की थी 
हक़ तो ये है कि हक़ अदा न हुआ ।


2.
न था कुछ तो ख़ुदा था,कुछ न होता तो ख़ुदा होता ,
डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता।।

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Ghalib

ख़ाबों को मोड़ना होगा

अपने परों को उड़ने से रोकना होगा,
परिंदे फिर तुझे पिंजरे में लौटना होगा,

वक़्त के हाथ पतवार है तेरी - मेरी ,
हवाएं मुड़ गई ख़ाबों को मोड़ना होगा।।
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प्रीति सुमन

जी न लगया

ऐसो बीमारी जी को लगया सखी,
लाख़ लगाऊं जी न लगया कहीं ,

कैसे छुपाऊं अब ये हाले-जिया ,
किसको बताऊं मैं जी लगया न जी ।

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प्रीति सुमन

तेरा गम



कम -से-कम इश्क में ये भरम तो रहे ,

तू नही, ना सही , ये तेरा गम तो रहे ।।

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प्रीति सुमन

क्या करूँ

मैं जिस ओर चलती हूँ ये उस ओर नही चलता ,

क्या करूँ इस दिल पे मेरा जोर नही चलता ।।

By प्रीति सुमन

Sunday, July 16, 2017

'''' सुमन ''''

बड़ा सा दिल रखो अपना खुले गगन की तरह,
रहो बेख़ौफ़ बेपरवाह इस पवन की तरह,

चुभो तीर बनके दिल में किसी चुभन की तरह,
रहो बिखेरते खुशबू , सदा सुमन की तरह  || 

महंगाई

सूखी रोटी खाना मुश्किल सब्जी दाल है लाना मुश्किल,
सर पे शामत आयी है , बड़ी बुरी महंगाई है। 

महंगाई मुँह फाड़ खड़े , बनेंगे कैसे दही बड़े,
दूध की कीमत बढती जाए , महंगाई सर चढ़ती जाए,
सपना हुयी मलाई है , बड़ी बुरी महंगाई है। 

जेब है खाली कैश नहीं , चूल्हा है पर गैस नहीं,
पानी से भूख दबा , आखिर किसपर चढ़े तबा,
पेट में आग लगाई है , बड़ी बुरी महंगाई है। 

अधनंगे, अधपेटे हैं , पेट पकरकर लेते हैं,
महंगाई अब हंसती है, अपने बंधन कसती है,
आपने पर फैलाई है , बड़ी बुरी महंगाई है। 

ठगे - ठगे से लोग खड़े , नेता मिलकर पेट भरे,
आपने हिस्से बाँट रहे , सुख सुविधा सब चाट रहे,
दुनिया देती दुहाई है , बड़ी बुरी महंगाई है। 

दर्दें दिल की दवा रखना

जख्मों के पार अगर जाना हो ,  
अपने जख्मों को हरा रखना।
गर ख्वाहिश  हो आसमां की तो
उम्मींदो का बाग़ भरा रखना।.

ज़िन्दगी की उमस भरी दोपहरी में ,
कुछ खुशनुमा आवोहवा रखना।
दर्द और बढ़ाएंगे ये दुनियावालें  ,
पास में दर्दें दिल की दवा रखना।

जहर घोलतें हैं लोग मीठी बातों से
ऐसे लोगों से खुद को जुदा रखना।
हो जुदाई ही मयस्सर कहीं जो उल्फत में
यार को मान के दिल में खुदा रखना।

हौंसलो की भी आजमाइश हुआ करती हैं
अपने पाओं को धरती में जमा रखना।
पावों के नीचे से छीन ले जमीं दुनिया
इससे पहले बचा के कुछ आसमां रखना।

कहीं कुतर दें वो पंख फरफराए तो
अपने अरमानों को दिल में दबा रखना।
छिन लें कहीं वो खुश होने की वजह
अपने आखों में ही सपनों का पता रखना।

मिले प्यार जमाने का कोई बात नहीं
अपना प्यार अपने वास्ते बचा रखना।
होने पाए कभी विरान ये दिल की दुनिया
हर कोने में जला के शमां  रखना।।