Friday, October 10, 2014

जिंदगी इक कसौटी है

जिंदगी आजमाईश की इक ऐसी कसौटी है ,
न जिसमे हार होती है न जिसमें जीत होती है ।

हो कितना बड़ा कोई या हो कितना कोई छोटा ,
जिंदगी एक दिन सब से ही रिश्ता तोड़ लेती है ।

कभी बे- बात भी सर पे बिठा लेती है लोगों को ,
जरा सी बात पे लोगों से मुँह भी मोड़ लेती है ।

तजुर्बे की जगह है ये , उमरभर सीख देती है ,
संभल जाओ तो अच्छा है नही तो तोड़ देती है ।

जिंदगी इक पहेली है की जो सुलझी नही अब तक ,
सवालों के सुलझते ही सवाल इक छोड़ देती है ।।









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