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Tuesday, December 23, 2014

शायर बना दिया मुझको

ये बेखुदी ,
बेख्याली ये बेबसी दिल की ,,

ले तेरी याद ने शायर बना दिया मुझको । ।




Thursday, December 4, 2014

मैं अब भी राहें तकती हूँ

उससे मिलने की चाहत में ,
मैं मरती  हूँ ना जीती  हूँ ,

ये खत देकर उसको कहना ,
मैं अब भी राहें तकती  हूँ ।




Sunday, November 23, 2014

kl ke progrm me main kaita path krte huye (22-11 -14)

उलझे लट हों आखें बोझिल
ऐसे कवि अब कम मिलते है ।

हांथों से हाथेँ मिलती हैं  ,
दिल से दिल पर कम मिलते हैं ।











मैं भी आधी रह जाती हूँ वो भी आधा रह जाता है

आँधी जब उठती है दिल में ,आँखों से गम बह जाता है,
मुझसे बाहर हो कर भी कुछ मेरे अंदर रह जाता है ।

खालीपन है सूनापन है ,है तबियत भी पहले जैसी,
जख्मों के भर जाने पर भी दागी दामन रह जाता है ।

उतना फल उसको मिलता है जो जितना झुककर रहता है ,
जो जितना खाली होता है उतना अकड़ा रह जाता है ।

दिल की बातें दिल के गम लिखने भर से कब कम होते हैं ,
जितना भी लिक्खा जाता है उतना बाँकी रह जाता है ।

सारी दुनियाँ पा लेने की चाहत तो सब की होती है ,
पर सब कुछ पा लेने पर भी बाँकी सपना रह जाता है ।

बिछड़े जो हम उनसे वो हम से तब से ऐसे आलम  है ,
मैं भी आधी रह जाती हूँ वो भी आधा रह जाता है ।।












Saturday, November 22, 2014

हमें तुम याद आओगे

हमें तुम याद आओगे तुझे हम याद आयेंगे ,
आ जीभर मिल ले ये दिन अब बड़े दिन बाद आएंगे । ।


Friday, November 21, 2014

मैंने चाहत इस तरह बदली

जमाना इस तरह बदला रिवायत इस तरह बदली ।
की पहचानी न जाती है मुहब्बत इस तरह बदली ।

मैं उस बिन जी न पाऊँगी मुझे कुछ ऐसा लगता था
न जाने कब कहाँ मैंने ये आदत किस तरह बदली ।

वो जिस को घर बचाना था वो ही घर का लुटेरा था
कहाँ किसको खबर थी है शराफत इस तरह बदली ।

बना था देवता मन का मगर तन का पुजारी था ,
जमाने ने मुहब्बत की रिवायत इस तरह बदली ।

मुझे जिसकी तमन्ना थी वो ही मुझ को न मिलना था
मिला जो उसको चाहा मैंने चाहत इस तरह बदली । ।











Wednesday, November 12, 2014

जिंदगी बिन तेरे मुकम्मल नही होगी

मैं तुमको भूल तो जाऊं मगर लगता है यूँ मुझको ,

ये मेरी जिंदगी बिन तेरे मुकम्मल नही होगी । 

मैं पा लूंगी जमाने भर की खुशियाँ भी मगर फिर भी ,
मुझे सच्ची मुहब्बत अब कभी हासिल नही होगी । 

ये रातें और काली और काली लग रहीं मुझको 
यूँ लगता है कभी रौशन मेरी महफ़िल नही होगी । 

अगर मैं टूट कर बिखरी वफ़ा पर आँच आएगी ,
मैं खुद को जोङ लूँ दुनियां मगर हासिल नही होगी । 

मैं कल जो रूठकर बोली नही उनसे तो वो समझे ,
मैं संगदिल हूँ वफ़ा मेरी कभी काबिल नही होगी । 


Monday, November 10, 2014

PLEASE SAVE GANGA

गंगा भी बोली रोती
जमुना भी बोली रोती ।

हारी मैं मानव तेरे
पापों को धोती -धोती ।।


Sunday, November 9, 2014

अजन्मा भूत

एक पीपल पर एक भूत रहता था । वो अक्सर आस - पास खेलने वाले बच्चों को पकड़ लेता था ।
पूरा मुहल्ला परेशान । ओझा बुलाये गए और ओझा द्वारा भूत बुलाया गया । पर ओझा के
लाख कोशिशों के बाद भी भूत न भागा न कुछ बोला ।

आखिर में हार कर ओझा ने उसी पीपल के
दूसरे भूत को बुलाया ।पता चला ये किसी अजन्मे बच्चे का भूत है जो किसी भूत से भी बात नही करता ।

अब ओझा ने सोंचा 'बच्चा जरूर इसी मुहल्ले का है ,और अपनी माँ को ढूंढ रहा है । ओझा ने पूरे मुहल्ले
की औरतों को जमा किया और भूत को एक बच्चे में बुलाया । अब भूत को अपनी माँ को पहचानने को कहा गया पर उसने पहचानने से इनकार  दिया ।ओझा फिर नाकाम रहा ।

बड़ी समस्या हो गई । अब ओझा ने मुहल्ले की सभी औरतों से बात की पर सभी भूत को अपना बच्चा मानने से इनकार कर दिया ।

एकाएक बच्चा बोल पड़ा ; मैं जानती हूँ इन्हीं ओरतों में मेरी माँ है । वो मुझे पहचानती हैं पर मुकर रही हैं । अब मैं गाँव छोड़कर जा रही हूँ । बस मैं अपनी माँ से ये कहने आई थी माँ अगर मैं होती ,
भैया को तुम्हे घर से निकालने नही देती ,भाभी को तुम्हे गालियाँ देने नही देती  । माँ मैं तुम्हे तन्हा होने नही देती । काश ! मैं आज जिन्दा होती।


"किस ऑफ़ लव " और महिलायें

"किस ऑफ़ लव " जैसे कार्यक्रमों में महिलाओं की हिस्सेदारी हास्यास्पद है ।
महिलाओं , युवतियों और बच्चियों पर होनेवाले अत्याचारों में दिनों - दिन
बढ़ोतरी हो रही है और महिलायें "किस ऑफ़ लव " डे मना रही हैं । एक
जागरूक और सकारात्मक सोंच के साथ महिलाओं को किसी उद्देश्यपूर्ण
कार्यक्रम का हिस्सा बनना चाहिए ।' किस ' और 'लव ' का मुद्दा तब उठना
चाहिए जब हम आश्वस्त हो जाये की देश में सारी महिलाएं सुरक्षित हैं । 

Friday, October 24, 2014

उसे अपना कहूँ कैसे

शिकायत मान लो मेरी या ये मेरी खता कहलो ,
मुझे भी राज ऐसे खोलना अच्छा नहीं लगता ।

मगर मैं कसमकस में हूँ उसे अपना कहूँ कैसे ,
जिसे मेरा ही हँसना बोलना अच्छा नहीं लगता । । 






Monday, October 20, 2014

दिल से छुटकारा

जो मेरे बस में ये होता ,
मैं हर उलझन सुलझा लेती ,

डूबो के दिल को सागर में ,
दिल से छुटकारा पा लेती । ।


लो दिल के करलो दो टुकड़े

दिल पर्वत से भी ऊँचा है ,                                
दिल सागर से भी गहरा है ,
                             
दिल काबा भी है काशी भी ,
दिल में ही रब का डेरा  है ।

मैं भी कहती हूँ मेरा है ,
वो भी कहता है मेरा है ,

ले दिल के कर ले दो टुकड़े  ,
अब ले जा जो भी तेरा है ।।


















Friday, October 17, 2014

मुस्कुराना भूल जाती हूँ

मैं गम में देख उस को मुस्कुराना भूल जाती  हूँ ।
उसे जब याद रखती हूँ जमाना भूल जाती  हूँ ।

कहीं मैं खो न दूँ उस को मुझे इस बात का डर है ,
यही सब सोंचकर चाहत जताना भूल जाती  हूँ ।

ये यादें दर्द अब मुझको जियादा दे नही पातें  ,
नया कुछ देखती हूँ तो पुराना भूल जाती  हूँ ।

हवाएँ रूठकर मुझसे शिकायत कर के यूँ बोली ,
मैं अब सावन में भी झूला लगाना भूल जाती हूँ ।

यूँ रोटी- दाल में ही अपनी अब मसरूफ रहती हूँ ,
की मैं चिड़ियों को भी दाना खिलाना भूल जाती  हूँ ।

ये आँगन में जो तुलसी है हरी थी जब तलक थी माँ ,
मैं अब पौधों को भी पानी पिलाना भूल जाती  हूँ ।

न जाने कब से अँधेरा है मेरे दिल के कोने में ,
दिया दिल में जलाना है जलाना भूल जाती  हूँ ।

वो रिश्तेदार हैं इतनी सी अब पहचान है उनसे ,
मैं भी उनकी तरह रिश्ता निभाना भूल जाती  हूँ । ।


Tuesday, October 14, 2014

अदा

कभी नजरें मिलाते हैं कभी नजरें चुराते हैं ,
किसी की जान जाती है अदा अपनी समझ बैठे ।।







पागल है दिवाना है दिल

पागल है दिवाना है दिल तेरी बातें करता है ,
कैसे मैं समझाऊं इस को ये तेरी जिद करता  है ।

उसका जाकर हो जाऊँगा मुझ से आकर कहता है ये ,
कैसी बातें करता है ये ,सोंच के मन अब डरता है ।

इतनी मुहब्बत पाल रहा है ना जाने क्या होगा आगे ,
खींच रही मैं डोर इधर को और उधर ये बढ़ता है ।

तुझपर प्यार बहुत आता है तेरा होकर रहता है ये ,
कुछ बोलूं तो मैं दुश्मन हूँ मुझसे आकर लड़ता है ।

सुबहो - शाम तेरी बातों में खोया रहता है पागल ये ,
नाम तुम्हारा ले - ले कर ये हर पल आहें भरता है ।

लाग लगाके ओ हरजाई सुनता ना है दिल की दुहाई ,
देख मेरी क्या हालत हो गई ऐसा भी कोई करता है ।।








Monday, October 13, 2014

my poem published in today's news paper....वक्त बेवफा भी है

वक्त के बदलाव का  ,ये सिलसिला भी है ,
जिससे हुआ है प्यार ,उससे गिला भी है ।

मंजिल पे खड़ा  हैं  ,  जमात हैं हजारों की ,
वही रास्ते में था तो  , तन्हां चला भी है ।

चिंगारी ने जब चाहा है ,जला डाला आशियाँ ,
पर और जले उससे पहले , खुद जला भी है ।

हैं  निम - करेले में  , कडवाहटें  जितनी ,
नजरें बदल के देखलो ,  उतना भला भी है ।

है राज अँधेरे औ ,   उजाले का बस इतना ,
जिसका उदय हुआ है , इकदिन ढला भी है ।

इंसान ने इंसान को  ,धोखा दिया तो क्या ,
इंसान ने कई बार तो ,खुद को छला भी है ।

इतना न कर गुमान , वक्त किसका हुआ है  ,
है ये  जितना वफादार उतना बेवफा भी है । |


Saturday, October 11, 2014

आज रात जब चंदा आये

आज रात जब चंदा आये मेरी बातें मत करना ,
वरना सारी रात कटेगी फिर दिल को समझाने में ।

तुम पूछोगे मैं कैसी हूँ और वो ताने मारेगा ,
फिर तुम आहत दिल कर लोगे उसको सच बतलाने में ।

वो पूछेगा तुम कैसे हो मेरे बिन कैसे जीते हो ,
फिर तुम को परेशानी होगी अपने जख्म दिखाने में ।

तुम रोओगे उसके आगे और वो मुझ से बोलेगा ,
मुश्किल होगी फिर मुझको भी अपना जी बहलाने में ।

ऐसा हो तुम आज रात को चाँद से मिलने ना जाओ ,
या ऐसा हो देरी कर दे चाँद रात में आने में ।



Friday, October 10, 2014

ये दिल बिमार कौन करे

वफ़ा की उनसे शिकायत ही यार कौन करे ।
सनम है बेवफा जो उनसे प्यार कौन करे ।

वो मुझ से कहता है की मुझपे ऐतवार करो ,
तू ही बता ये खता बार - बार कौन करे ।

चला गया जो वो सरे - राह हमसे कतरा कर  ,
वो आज आ भी गया दिल निसार कौन करे ।

वो आजमा के मुझे बार - बार हार गया ,
वो सोंचता था यही अपनी हार कौन करे ।

ये इश्क आग है जलना नही मुझे हमदम ,
जला - जला के भला दिल पे वार कौन करे ।

हमें न आ रही है रास चाहतों की अदा ,
अजीब रोग है ये दिल बिमार कौन करे । ।







जिंदगी इक कसौटी है

जिंदगी आजमाईश की इक ऐसी कसौटी है ,
न जिसमे हार होती है न जिसमें जीत होती है ।

हो कितना बड़ा कोई या हो कितना कोई छोटा ,
जिंदगी एक दिन सब से ही रिश्ता तोड़ लेती है ।

कभी बे- बात भी सर पे बिठा लेती है लोगों को ,
जरा सी बात पे लोगों से मुँह भी मोड़ लेती है ।

तजुर्बे की जगह है ये , उमरभर सीख देती है ,
संभल जाओ तो अच्छा है नही तो तोड़ देती है ।

जिंदगी इक पहेली है की जो सुलझी नही अब तक ,
सवालों के सुलझते ही सवाल इक छोड़ देती है ।।









Thursday, October 9, 2014

नन्हें बच्चे

वो घर जन्नत से अच्छे हैं ,
जिस घर में नन्हें बच्चें हैं ।







दिल ना लो ना दो

मैं ऐसे कैसे दिल दे दूँ
तुम पहले अपना दिल तो दो ।

ऐसा ना हो मैं दिल दे दूं ,
फिर तुम बदले में दिल ना दो।

दिल देने में जो हो मुश्किल ,
तो सुन लो मेरा दिल ना लो ।

दिल लेने में जो हो मुश्किल ,
तो तुम भी अपना दिल ना दो ।

जो दिल दारी आती ना हो ,
अच्छा है दिल ना लो ना दो।







Tuesday, October 7, 2014

मुझे डर अब भी लगता है

मुझ को डर तब भी लगता था मुझ को डर अब भी लगता है ,
कल तुझको खोने का डर था अब खुद के खोने का डर है ।। 





दिल उसका होकर रहता है

मेरा दिल अब मेरी बातें सुनकर भी ना सुनता है ,

कहने को बस मेरा है पर उसका होकर रहता है । । 





Monday, October 6, 2014

kavitri preeti suman ( kavita path 4 0ctuber 2014 )

पाओं मन्जिल को पहुंचती ही नही

कोई बतला तो दे जाना है कहाँ ,
राह मेरे दिल को मिलती ही नही   ,

रोज चलती हूँ सफर करती हूँ मैं ,
पाओं मन्जिल को पहुंचती ही नही ।  


my new published poem




दिल है या दिया कोई

वफाओं का सिला है ये ,
जलाता है जिया कोई ,

समझ आता नही मुझको ,
ये दिल है या दिया कोई । ।


Thursday, October 2, 2014

my poem published in today's news paper................ दामिनी

बोली जीने में क्या रखा ,
मैंने दिन इतना बुरा देखा ,
और जग से रिश्ता तोड़ गई ।
आखिर में वो जग छोड़ गई ।

बोली करना तो यूं करना ,
मेरे नाम पे आखिरतक लड़ना ,
लो मैं अपना गम छोड़ गई ।
आखिर में वो जग छोड़ गई ।

मेरे हाल पे कोई मत रोना ,
देखो बेबस अब मत होना ,
संघर्ष को दिल से जोड़ गई ।
आखिर में वो जग छोड़ गई ।

कुछ ऐसे अब विकराल बनो ,
किसी दामिनी का ये हाल न हो ,
जन - जन में मचा के शोर गई ।
आखिर में वो जग छोड़ गई ।|

HAPPY NAVRATRI MITRO'N

Wednesday, October 1, 2014

खुशियों का मुझसे हमेशा फासला रक्खा गया

खुशियों का मुझसे हमेशा फासला रक्खा गया ।
दूर मुझसे हसरतों का काफिला रक्खा गया ।

उनसे सच कह दें मगर है फायदा कुछ भी नही ,
अन्धे को क्या, सामने हो आईना रक्खा गया ।

रात सूनी शाम काली जिंदगी अँधेरी हो गई  ,
जब बुझाकर ताक पर दिल का दिया रक्खा गया ।

इक तरफ मेरी मुहब्बत इक तरफ सारा जहाँ ,
हाशिये पर इस तरह वादे - वफ़ा रक्खा गया ।

सब समझते हो मगर चाहत समझते ही नही ,
फिर समझने को भला दुनियाँ में क्या रक्खा गया ।।



Sunday, September 28, 2014

प्यार का सदमा

 न हँसता है न रोता है,तड़पता है मचलता है,
बिछड़ के तुझ से मेरा दिल बड़े सदमे में रहता है ।।






Thursday, September 25, 2014

दिल का क्या किया जाये

बड़ा मुँहजोर है ये दिल कभी सुनता नही मेरी, 
किसी का हो गया जाके ये इसका क्या किया जाये ।


Saturday, September 20, 2014

यादों को पन्नों पे बिखेड़ा जाये


दिल की आवाज से तन्हाई को तोड़ा जाये,
आज फिर दर्दे- दिले-साज को छेड़ा जाये,  


खोल दिल बंद पड़े अपने पिटारे सारे ,  
आज फिर यादों को पन्नों पे बिखेरा जाये ।|




Monday, September 15, 2014

मुहब्बत किस को कहते हैं

बताने की , दिखाने की , जताने की जरूरत क्या ,
मुहब्बत कर के खुद समझो मुहब्बत किस को कहते हैं ।






बागी

उसी को भूलना था मैं उसी को याद करती हूँ ,
अभी मैं अपने ही दिल में किसी बागी के जैसी हूँ ।



Saturday, September 13, 2014

क्या हो गर सच बेपरदा हो

क्या हो गर सच बेपरदा हो,
सारा जग सूली चढ़ता हो,

मैं भी मुजरिम तू भी मुजरिम, 
जब सब का सब ही झूठा हो ,  

फिर कोई भी ना अपना हो,  
हर रिश्ता नाता कडवा हो,  
 
हम झूठों की इस दुनियाँ में ,  
सच को ही हम से खतरा हो, 
 
अच्छा है जो ये परदा है,  
ना हो तो क्या जाने क्या हो, 
 
सच तो सच होता है यारो,  
परदा हो या बेपरदा हो ।


Wednesday, September 10, 2014

बच्ची थी तब अच्छी थी माँ

जब जी करता रो लेती थी  ,
गम भी हँसके ढो लेती थी ,
बच्ची थी तब अच्छी थी माँ ,
गोदी में ही सो लेती थी ।

अब ना मैं जिद कर पाती  हूँ ,
ना अपने पे अड़ पाती  हूँ ,
इक वो दिन था जब मैं तुझसे ,
जो मरजी हो वो लेती थी  ।

एक तू ही दौलत थी मेरी  ,
तेरी हो कर थी मैं पूरी ,
गम भी मुझको कम लगते थे ,
जब मैं तेरी हो लेती थी  ।

तेरी ममता खो कर रोई ,
रहती हूँ मैं खोई - खोई  ,
तेरे चरणों में माँ  आ  के
पापों को भी धो लेती थी ।

तेरे दामन में छिप जाती ,
गर मैं फिर बच्ची बन पाती ,
माँ बनकर मैंने ये जाना ,
माँ तू कितने गम ढोती थी ।




Tuesday, September 9, 2014

प्यार का रंग

उसका प्यार था ऐसा बरसते पानी के जैसा ,


मौसम के उतरते प्यार का रंग भी उतर गया । ।


Monday, September 8, 2014

बेवफा

बेवफा तुझसे वफाओं का सिला क्या होगा ,
तू भला कर न सका तेरा भला क्या होगा ,

तेरी आँखों में मुहब्बत के सिवा सब कुछ है ,
तेरे खवाबों में तबाही के सिवा क्या होगा । ।


Saturday, September 6, 2014

गुनाह

वो बेवफा है बात भी ये जानते रहे ,
फिर भी गुनाह ये की उसे चाहते रहे । ।


Tuesday, September 2, 2014

अब बेचारा दिल बेघर है

कल तन्हाई से डरता था ,
दिल को अब महफ़िल से डर है ।

सब हेरा-फेरी है दिल की ,
ये सारे झगड़े की जड़ है ।

मेरे पाओं में बेड़ी है ,
आँखों में सपनों का घर है ।

बेगैरत की खातिर आँसूं ,
क्यूँ ये जिल्ल्त मेरे सर है ।

उनके दिल से बाहर आकर ,
अब बेचारा दिल बेघर है ।।



Monday, September 1, 2014

मुझे कुछ उसके सिवा याद नही

इक वो की हर बात मेरी भूल गया  ,

इक मैं , मुझे कुछ उसके सिवा याद नही  । 

मेरी मंजिल अभी तक बहुत दूर है

शायद किस्मत में मेरी बहुत धूप है ,
मेरी मंजिल अभी तक बहुत दूर है ।

है मुहब्बत नही तुझको मुझसे मगर ,
मेरा दिल तो मुहब्बत में मज़बूर है ।

न खुदाई मिली न रिहाई मिली ,
या खुदा तेरा कैसा ये दस्तूर है ।

आगे रस्ता नही पीछे जाना नही ,
जाने किस्मत को मेरी क्या मंजूर है ।।

Sunday, August 31, 2014

मुझको अपना हमदम कर ले

मैं तेरे सब गम बाँटूंगी
मुझको अपना हमदम कर ले ।

आ लग जा मेरे सीने से ,
गम अपना सारा कम कर ले ।

मैं तुझमें खो कर शोला अब ,
तू भी खुद को शबनम कर ले ।

तेरे सब आंसू अब मेरे ,
तू भी खुशियों का दम भर ले ।

अब से इस पल से मैं तेरी ,
तू खुद को तू से हम कर ले ।।




Saturday, August 30, 2014

जां धीरे - धीरे लेता था

जैसे की हो मरहम कोई वो गम यूँ मुझको देता था,
कातिल मेरा - मेरा होकर जां धीरे - धीरे लेता था ।


Friday, August 29, 2014

अँधा जग को होते देखा

उसको भी गम होते देखा ,
सच को मैंने रोते देखा ।

अपनी राहों में ही सबको ,
मैंने काँटे बोते देखा ।

माया हो कितनी भी भारी ,
गठरी सब को ढोते देखा ।

निगरानी की बारी थी जब  ,
तब ही सबको सोते देखा ।

आँखों में बिन बाँधे पट्टी ,
अँधा जग को होते देखा ।