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Wednesday, October 30, 2013

मैं तेरा हूँ तू मेरा है

मैं तेरा हूँ तू मेरा है , क्या ये सही तो नही ।
मुझे तलाश थी जिसकी क्या तू वही तो नही ।

क्यूँ लगता है तुझसे जन्मों का रिस्ता है मेरा ,
क्या कहीं  जन्मों जन्मों से ही तू मेरी तो नही ।

यूँ लगता है अधूरी सी दुआ पूरी हुई ,,
कहीं तू मेरी इबादत या बंदगी तो नही ।

चल कहीं बैठके करते हैं हम बातें दिल कि ,,
ऐसे गुमसुम है कहीं मुझसे तू रूठी तो नही ।

तू कहे तो मैं तुझे पास से आकर देखूं ,,
मुझे भरम है कि तू मोम कि बनी तो नही ।

मुझे अब हो रहा यकीन कि मैं तेरा हुआ ,,
तू बता मेरे जैसी हालत कहीं तेरी तो नही ।

Saturday, October 26, 2013

शायरी

तू मेरा है मैं तेरी हूँ क्या ये सहीं तो नही ।



मुझे तलाश थी जिसकी क्या तू वही तो नही ।


Thursday, October 24, 2013

शायरी

यूँ मेरी गलियों से गुजरना और देखना मुझको ,
दिल कहता है की हम अब भी उनके ख़ास में हैं । 


उनकी आँखों में मैंने खाब अपने देखें हैं ,,
शायद जिन्दगी फिर से मेरी तलाश में है ।


Wednesday, October 23, 2013

दिल कोई टूटा न मिले

चल कहीं दूर जहाँ कोई भी झूठा न मिले ।
प्यार से लोग मिले कोई भी रूठा न मिले ।

जहाँ वफाओं के बदले वफा चलन में रहे ,
दिल में छुरी लिए कोई सामने मीठा न मिले ।

जहाँ दौलत की नही दिल की हो कीमत ज्यादा ,
इस जहाँ जैसे दिल बदहाल सरीखा न मिले ।

जहाँ गंगा के साथ आंसूं भी पूजी जाये ,
किसी के दिल से खेलने का तरीका न मिले ।

यूँ मिले आके गले जैसे यार बचपन के ,,
प्यार का मौसम किसी मौसम में भी फीका न मिले ।

नफरतें तरसा करें गलियों में बसने के लिए ,
पर किसी घर में कहीं दिल कोई टूटा न मिले । 

Tuesday, October 22, 2013

भारत माँ की दुविधा

झूठे बैठे डिंग हांकते हवा में लेते बाजी मार ।
सच्चाई पे चले जो उनपे तोहमत लगते रोज हजार ।

गोरा धन है काल होकर पड़ा हुआ विदेशों में  ,
भारत का रथ चला रहे हैं चोर उचक्के और गद्दार ।

आतंकवादी घुसे जा रहे रातों को अँधेरे में ,
बड़े मौज से ऊँघ रही है कुर्सी के उपर सरकार ।

भारत माँ की नैया हमने दे दी किसके हाथों में ,
मांझी ही बेइमान निकल गया हुआ देश का बन्टाधार ।

हमने भी कोई कसर न छोड़ी वो भी लूटे हम भी लूटे ,
राष्ट्रप्रेम का हलवा बन गया देशभक्ति का बना आचार ।

इतने अंधे हुए स्वार्थ में भारत माँ को भूल गये ,
याद रहा बस इतना हमको लाभ मुनाफा और व्यापार ।

रही भारती आस लगाये जाने कब दिन लौटेंगे ,,
भगत , बोस , गाँधी आयेंगे कब करने सपने साकार । 

Monday, October 21, 2013

न मुझको यूँ सताओ

न मुझको यूँ सताओ मचल जाऊंगा मैं भी ,
दीये सा मत जलाओ पिघल जाऊंगा मैं भी ।

अभी से कह रहा हूँ मुझे मत आजमाओ ,,
तुम्हारी ही तरह तो बदल जाऊंगा मैं भी ।

मुझे गम हो रहा है तुम्हे भी गम मिलेगा ,,
तेरी महफिल से जब ही निकल जाऊंगा मैं भी ।

अभी सदमें में है दिल बेवफाई से तेरी ,,
यकीं हैं खुद पे मुझको सम्भल जाऊंगा मैं भी ।

अभी तुम हंस लो जीभर मेरे हालत पे पर ,,
तुमसे हंस - हंस के मिलने कल आऊंगा मैं भी । 

Wednesday, October 16, 2013

प्रार्थना

सारा जग ही प्रेम है देखो जिधर अथाह ,
तू प्रेमी मैं प्रेमिका चले प्रेम की राह ।

नैन नीर से सींचती इक - इक दाने बिज,
हिर्दय में उपजा लिए प्रीतम तेरी चाह ।

काम-क्रोध, मद-लोभ में डूब न जाए नाव ,
स्वामी पार उतरिये गहि - गहि मोरी बांह । 

Thursday, October 10, 2013

ये दिल है मेरी जान

ये दिल है मेरी जान किराये का घर नही ,
कि जब चाहो रहो और जब चाहोगे चल दो ।

रातों को जाग - जाग के सजाये हैं सपने ,
मोती हैं ये अरमां के न कदमों से कुचल दो ।

खिलता बड़ी मुश्किल से है काँटों में इक गुलाब ,
आहिस्ते से थामों यूँ न हाथों से मसल दो ।

न आओ गली मेरी तो कोई बात नही है ,
पर रस्ते में मिल जाएँ तो नजरे न बदल लो ।

कितनी सफाई दोगे और बेगुनाही के  ,
अच्छा है की चुपचाप मेरे दिल से निकल लो । 

Sunday, October 6, 2013

ऐ इश्क चला जा

ऐ इश्क चला जा मुझे तेरा दर न चाहिए ।
तेरे दर्द में डूबा हुआ सफर न चाहिए ।

धरती पे भी सो लेंगे हो गर नींद आँख में ,
नींदें गंवाके फूलों का बिस्तर न चाहिए ।

मेरे होश मेरे खाब मेरा चैन देके जा ,
मुझको दिल बेवजह का बेसबर न चाहिए ।

इक बार तेरा होके मैंने देख लिया है ,
इल्जामें-इश्क फिर से मुझे सर न चाहिए ।

सब कुछ लुटा दिया मगर न तू हुआ हासिल ,
सुन बेवफा मुझे तुझसा हमसफर न चाहिए ।

Friday, October 4, 2013

तू कितनी भोली भोली है

बिना तेरे जिन्दगी की हर इक शाम काली है ।
अगर जो तू नही तो क्या है होली क्या दिवाली है ।

मेरे जीवन में जितने रंग हैं सब रंग हैं तुमसे ,
बिना तेरे मैं ऐसी हूँ जैसे पैमाना खाली है ।

अगर तुम पास होते देखते क्या हाल है मेरा ,
तुम नाराज हो जाते की क्यूँ नींदें उडाली है ।

थपेड़ों ने तूफानों के मुझे इतना बदल डाला ,
शिकायत कर न पाओगे तू कितनी भोली भोली है । 

Tuesday, October 1, 2013

शायरी

रोज बिकते हैं जाने कितनों के ईमान धरम ,,,



लोग सस्ते हैं आज भी इतनी महंगाई में । 

बुरा कुछ भी मुहब्बत में नही होता है

कभी - कभी ही दिल इतना उदास होता है ।
और जब भी होता है तब बेहिसाब रोता है ।

बड़ी नाराजगी से देखता है दुनियां को ,,
नाराज दिल न फिर सारी रात सोता है ।

गले से लगके जिसके रोने को जी करता है ,
वही इक शख्स दिल से दूर बहुत  होता है ।

अब चल मान जा पागल की क्यूँ दीवाना है  ,
बुरा कुछ भी तो मुहब्बत में नही होता है ।