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Monday, September 30, 2013

हुनर सीखते हैं

हवा से लड के सम्भलने का हुनर सीखते हैं ।
दीये ' से पूछिये जो जलने का हुनर सीखते हैं ।

एक ही बार में दौड़ेंगे तो गिर जायेंगे ,
बड़े आहिस्ते हम चलने का हुनर सीखते हैं ।

कैसे चुपचाप भला करके चले जाते हैं ,
ढलते सूरज से यूँ ढलने का हुनर सीखते हैं ।

अभी - अभी वो उतर के गयें हैं दिल से मेरे  ,
अब उनके सपनों से निकलने का हुनर सीखते हैं । 

Saturday, September 28, 2013

मेरे दोस्त

मेरे दोस्तों की यही तो अदा है ,,,

जरूरत जभी हो तभी लापता हैं ।

अगर वक्त पर काम ही आ न पाए ,

तो फिर दोस्तों की जरूरत ही क्या है । 

Friday, September 27, 2013

दोस्ती सी इबादत

तू नफरतों के लायक है मुहब्बत के नही ,
मगर नफरत मेरे जमीर की आदत में नही ,

सब तुझे छोड़ दे तन्हा तेरी हालत में मगर ,
मुझे तो बेवफा होने की इजाजत ही नही ।

मैंने ये सोंच हर कुसूर तेरा माफ़ किया ,
अभी तू दोस्ती निभाने की हालत में नही ।

कहीं ऐसा न हो तू लौट कर वापस आये ,
तुझे सुनना पड़े की तेरी जरूरत ही नही ।

तूने सुनके भी अनसुनी की मेरी बात मगर ,
तेरी गलती का मुझे तुझसे शिकायत ही नही ।

तेरा नसीब है गम तेरे ,चुभन मुझको मिलें  ,
वरना लोगों को तो गम सुनने की फुर्सत भी नही ।

तुझे तो शौख  है ,,धोखा फरेब करले तू ,
मेरे लिए तो दोस्ती सी इबादत ही नही ।

सच भी रोता है

जो कुछ ना सोचा हो वो ही क्यूँ होता है ।
देख के ऐसी हालत कितना दुःख होता है ।

दिल के बदले दिल देने में डरते हैं सब ,
प्यार कोई करता है कोई धोखा देता है ।

हम भी सिख गये हैं दुनियादारी यारों ,
याद नही पर हमने ये गुण कब सिखा है ।

हम भी झूठे तुम भी झूठे ,झूठी दुनियां ,
देखें मक्कारी में आगे क्या होता है ।

बदल - बदल की आड़ में कितना बदल गये हम ,
शरम गई जब आँख की आगे क्या रखा है ।

हम भी मुजरिम तुम भी मुजरिम सच के आगे ,
देख हमारी हालत को सच भी रोता है । 

Thursday, September 26, 2013

शायरी

अब उजालों में भी खुद को नजर नही आते ,
इस तरह गुम हुए तलाशे भी नही जाते ।

इक सहारा है मेरे दिल को ,तेरे आने का ,
वरना पत्तों की तरह अबतलक बिखर जाते ।   

शायरी

खुदा करे जो तेरा है वो तेरा हो जाये ,
मेरे सीने में तेरा गम ही भला क्यूँ आये ।

मुझे भरम ही भला क्यूँ हो वफा की तुझसे ,
तेरी तरह मेरा भी दिल बेवफा हो जाये ।



शायरी

तेरे बिना मुझे जन्नत नसीब हो भी तो क्या ,
मेरे लिए तो हर शै में उदासी होगी ।

खुदा मिल जाये भी फिर भी मुहब्बत की कसम ,
तेरे दीदार को तब भी नजर प्यासी होगी । 

Sunday, September 22, 2013

हाल हिन्दुस्तान का ,

मत पूछिये क्या हाल है हिन्दुस्तान का ,

आसूं तो है आँखों में पर रोया नही जाता ।

इतने जख्म हुए हैं दवा काम न आये ,

इतने लहू बहे हैं की धोया नही जाता ।

रो - रो के भारती पुकारती है बार - बार ,

कपूत भी हो पूत पर खोया नही जाता ।

Sunday, September 15, 2013

शायरी

तेरी मुस्कान ने दिल को मेरे गुमराह कर डाला ,
सूरत अच्छी लगी सीरत को भी अच्छी समझ बैठे।


अदाएं तेरी,, इक खेल थी,,,, वादें सभी फरेब ,  
बड़े नादाँ थे झूठी उल्फत को ही सच्ची समझ बैठे।

Friday, September 13, 2013

शायरी

जिस दिल में थे वो उसके कई टुकड़े कर आये ।
पर एक - एक टुकड़े में वो ही नजर आये ।

वो एक थे तो मुश्किलें दिल की हजार थी ,
अब हो गये हजारों बोलो दिल किधर जाए । 

शायरी

सारी रात तेरी याद में यूँही निकल गया । 
फिर याद तेरी आई फिर दिल मचल गया ।। 


मत पूछ की अरमानों से कैसा उठा धुँआ,
यादें जली सपने जलें दिल फिर से जल गया । 

Thursday, September 12, 2013

शायरी

जितनी सुलझाते हैं उलझन और भी होती है क्यूँ ।
जब भी तन्हा होती है तो बेबसी रोती है क्यूँ ।

रौशनी और चांदनी में बैर है किस बात का ,
जागती है एक जब भी दूसरी सोती है क्यूँ ।