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Sunday, March 31, 2013

शायरी

ना तुम बुरे सनम , ना हम बुरे सनम ,

कुछ किस्मत बुरी है और कुछ वक्त बुरा है । 

Saturday, March 30, 2013

शायरी

उसे इस कदर मुझसे शिकायत क्यूँ हुई है ,

डर ये है , कहीं उसको मुहब्बत तो नही है ।

चाहतें

इन्सान की चाहत है की ,उड़ने को पर मिले ।
और पंक्षी सोंचते हैं की , रहने को घर मिले ।

रस्ते में पड़े हैं जो , हैं मंजिल की चाह में ,
मुकम्मल हुए तो सोंचें , फिर से सफर मिले ।

बचपन में चाहत थी की , जल्दी से जवां हों ,
जवानी में फिर चाहत हुई , कच्ची उमर मिले । 

मिले न थे तो चाह थी , बस दूर से दिखें ,
दिखते ही फिर हसरत हुई , उनसे नजर मिले ।

हो जायेंगे इक दिन वो , हमारे खिलाफ भी ,
हमसे कोई अच्छा उन्हें , जो हमसफर मिले । 

हाले - इश्किया

घूरती नजरें   ,   कहाँ - कहाँ नही गईं ।
मासूमियत जहाँ थी, बस वहां नही गईं ।

महक उठे खिजाब से ,बालों के पोर - पोर ,
पर आँखों के निचे से  ,  झुरियां नही गईं ।

जाने को तो चले गयें , मौसम जवानी के ,
पर खाबों से   ,  हसीन सर्दियाँ नही गईं ।

होठों से टपकाते रहें , लालच की चासनी ,
हया चली गईं  ,   बेशर्मीयाँ नही गईं ।

उम्र का लिहाज या रब , जाने कहाँ गया ,
बुढापे में भी , हाले - इश्किया नही गई । 

हम उनसे मिलके रो पड़ें

इतनी बढ़ी मुश्किल की हम , मुश्किल पे रो पड़ें ।
हालत जो देखी दिल की , अपने दिल पे रो पड़ें ।

थक गये चलते , जब कोई मुकाम न मिला ,
दूर से दिखती हुई   ,   मंजिल पे रो पड़े ।

समंदर को छान कर भी , जब मोती नही मिला ,
लिपट के समन्दर से हम , साहिल पे रो पड़ें ।

ना जाने किस लिए , वो गुनहगार बन गया ,
मजबूरी उसकी सोंच हम , कातिल पे रो पड़े ।

तन्हाइयों से उब कर , भागे थे महफिल में ,
तन्हाईयाँ मिटी न हम ,महफिल पे रो पड़े ।

हमको भी गम हुआ बहुत, उनको भी गम हुआ ,
वो हमसे मिलके रो पड़े , हम उनसे मिलके रो पड़ें । 

Friday, March 29, 2013

शायरी

वो दे गयें हैं बेवजह इतनी दलील क्यूँ ,

मुजरिम हो गये हैं क्या वो अपनी निगाह में । 

शायरी

इनायतें हैं हो रही , जियादा गरीब पर ,

लगता है की साहिब हैं फिर, नये फितूर में ।

शायरी

हम जिसके जख्म सीने से लगा के रहें रोते ,
                    वो ही शख्स रौंदकर , हमको चला गया ।

इश्क के इतिहास में ये लिख दिया गया ,
                   फिर बेवफा के हाथों से ,वफा छला गया । 

शायरी

वो हैरत में हैं ,  क्यूँ कोशिशें नाकाम हो गईं ,

जिद भी हैं क्या , तोड़ेंगे पत्थर से पानी को ।

ऐ बेपरवाह दिल ,

ऐ दिल ऐ बेपरवाह दिल ,
                                   क्या ना  सहें ,तेरे वास्ते  ।
अच्छा है अब, हो जाए जुदा ,
                                        तेरे रास्ते , मेरे रास्ते ।

क्या - क्या कहें , क्या - क्या सहें ,
                          किस - किस का हम शिकवा करें,
छोड़ा नही  किसी काम का ,
                              तू  ही  बता  , हम  क्या  करें ।

अच्छा सिला ये तूने दिया ,
                               जो भी था सब कुछ ले लिया ।
कभी हम भी दिल के नवाब थे ,
                               अब दरबदर मुझे कर  दिया । 

जाने तेरे  , हैं इरादे क्या ,
                               किस की गली में तू खो गया ।
मेरा होके  भी , न मेरा हुआ ,
                              उस  बेवफा  का  तू  हो  गया । 

शायरी

मेरे सवाल का जवाब दे न सका वो ।
                   अब रूठा है , ऐसा सवाल पूछते हो क्यों ।

मैंने कहा की भूल हो गई सुनो मुझसे ,
                     आगे से बता देना ,तुमसे पूछना है जो ।

शायरी

वो मार भी डालें , तो अपनी अदा कहें ।
                      हम जान भी दे दें , तो भी बेवफा रहें ।

जैसे इश्क ना हुआ कोई गुनाह हो गया ,
                   इक इश्के खता की कहो कितनी सजा सहें  । 

Thursday, March 28, 2013

शायरी

उसको नही पसंद , मेरी अंदाजे दोस्ती ,
 
और मुझको तो उसकी यही आदत पसंद है । 

शायरी

वो हाल कैसे पूछ ले अपने बीमार का ,

रूतबा नही घट जाएगा मेरे हुजुर  का । 

शायरी

 हालात के मारे हैं , फकीरी में रात - दिन ,

और लोग समझते हैं ,  मुहब्बत में पड़े हैं । 


शायरी

लो इस बार भी, फीकी - फीकी होरी रह गई ।
                     कान्हा के बिना तन्हा , ब्रज की गोरी रह गई ।

होली की मची धूम , उड़े रंग और गुलाल ,
                           रंगों के दिन भी , मेरी चुनर कोरी रह गई ।

Wednesday, March 27, 2013

लाऊं कहाँ से ढूंढ़कर

लाऊं कहाँ से ढूंढ़कर , मैं तेरे लिए ख़ुशी ,
जब तू ही खुद अपना जहाँ ,जला के चला है ।

मैं साथ - साथ तेरे चलूं , बोल किस तरह ,
तू झूठ  को ही हमनवा , बना के चला है । 

अफ़सोस ये की रखता है , फूलों से बेरुखी ,
तू रौंद के कलियों को , मुस्कुरा के चला है ।

जितनी भी बार तूने , मारा  है दर्द को  ,
उतनी ही बार मात उससे , खा के चला है ।

मैं लेके दवा दर्द की , दर पे खड़ी रही ,
हर बार जख्म मुझसे तू , छुपा के चला है ।

मैं छोड़ के भी साथ तेरा  ,  छोड़ न पाई ,
और बार - बार हाथ तू  , छुड़ा के चला है । 

लाऊं कहाँ से ढूंढ़कर , मैं तेरे लिए ख़ुशी ,
जब तू ही खुद अपना जहाँ ,जला के चला है ।


शायरी

दो ही कदम चले थे , थक के चूर हो गये ।
                   वो बेरुखी से , पल में , हम से दूर हो गये । 

हम अब तलक ये राज समझ ही नही सके ,
                    वो मजबूर हुए थे या की मगरूर हो गये । 



शायरी

झूठी ख़ुशी से अच्छा है , उदास ही रहें ।
               क्यूँ बेवजह ही हम किसी की आस में रहें ।

तुम आके चले जाओ , इससे भला है ये ,
                ना ही मिलो , ना दिल तेरी तलाश में रहे ।  

मैं गैर हूँ तुम गैर हो

मैं गैर हूँ , तुम गैर हो , ये शोर मत करो ।
                 मुंह मोडकर यूँ ,  पीठ मेरी ओर मत करो ।

दुनियां की तो आदत है , अच्छा बुरा कहना ,
                 सच बात सुनो , झूठ पर यूँ गौर मत करो ।

शोहबत खराब है , शराब की शबाब की ,
                  उनकी गली में जाके अपना ठौर मत करो ।

जाना कहाँ हैं सोंचलो , फिर रास्ता चुनो ,
                  नफरत की आग में ,ये अंधी दौड़ मत करो । 

बे - सबब जलने से , कुछ भी नही हासिल ,
                    खुशियों को ठुकराके गम से होड़ मत करो । 

Tuesday, March 26, 2013

HAPPY HOLI MITRON

वक्त है , दस्तूर है , मौका है , सुनो मत चूकना ।
                           रंग देना प्यार के  ,   रंग में हर एक को ।

नील - पीले , लाल - गुलाबी , रंग हो कोई मगर ,
                 रंगने वाले के दिल में , भावना बस नेक हो । 

होली की आप सबको बहुत बहुत बधाइयाँ

होली का दिन लाया है मौसम गुलाल के ।
            रखना ऐ मेरे दोस्तों , खुद को सम्भाल के ।


बच पाओगे न अबकी होली हमसे तुम ,
                डालेंगे ऐसे प्यार पिचकारी में डाल  के ।




शायरी

आजमां  के आये हैं , हर एक  रंग को   ,

चढ़ा न कोई रंग , मुहब्बत के रंग पे । 

Sunday, March 24, 2013

शायरी

खुशियों की तलाश में , कई गम भी मिले हैं ।
                 मुस्कान की चाहत की तो मातम भी मिले हैं ।

कभी जानवर इन्सां से वफादार भी मिलें ,
                     कभी आदम को ही लूटते आदम भी मिले हैं । 

ये कैसी दोस्ती है

ये कैसी दोस्ती है  ,  जिसमें दोनों व्यस्त हैं ।
वो भी मतलबपरस्त हैं ,हम भी मतलबपरस्त हैं ।

मिलते हैं तो कहते हैं की मिलते नही हो क्यूँ ,
बहाने बनाने में तो ,   दोनों अभ्यस्त हैं  ।

पूछने से पहले ही  ,  हो जाते हैं शुरू ,
उलझे हुए जीवन से  आज , कितने त्रस्त हैं ।

न वक्त है , न मौक़ा है , न दिल की आरजू ,
वो भी अपने में मस्त है , हम भी अपने में मस्त है ।

न उनको कोई दर्द है ,  न हमारे दिल में खार ,
न ये उनकी शिकस्त है , न हमारी शिकस्त है ।

ये कैसी दोस्ती है  ,  जिसमें दोनों व्यस्त हैं ।
वो भी मतलबपरस्त हैं ,हम भी मतलबपरस्त हैं ।

शायरी

उसे इसकदर पसंद आ गई मेरी हंसी ,

वो अपने साथ मेरी वो अदा भी ले गया । 

Thursday, March 21, 2013

शायरी

तू इस कदर मुझको आजमां रहा है क्यूँ ,

है डर मुझे, मैं तोड़ दूँ फिर से न दोस्ती । 

शायरी

मैं तेरे हुनर देखके हैरान नही हूँ ,

चुपचाप देखती हूँ तेरे रंग हैं कितने । 

इंसानियत ही उठ गई यारों

दुनियां से जब इंसानियत ही उठ गई यारों ,
हम अपने आप को भला इंसान कहे क्यों ।

इक दौर था जब खुद के हम भी नही हुए ,
फिर तुम न हुए मेरे तो बेइमान कहे क्यों ।

रास्तों के पत्थर भी तो रस्ता दिखाते हैं ,
मन्दिर के पत्थर को ही भगवान कहे क्यों ।

न रख सके ईमान मुसल्लम ऐ दोस्तों ,
वो झूठ - मुठ खुद को मुसलमान कहे क्यों ।

मैंने कहा की झूठ बोल के मिलेगा क्या ,
बोला ; नही जब सच का यहाँ मान कहे क्यों ।

रहने दो बाकी बात को बाकी मेरे दिल में ,
हो जाओगे तुम ज्यादा परेशान कहे क्यों । 

नफरत प्यार में बदलो

प्यार नफरत में बदलोगे तो मुश्किल होगी ,
नफरत प्यार में बदलो तो कोई बात बने ।

बिना चले ही सम्भलने का हुनर क्या कीजे ,
गिर जाओ फिर सम्भलो तो कोई बात बने ।

अपना ही दर्द बस रोया किया हर कोई यहाँ ,
दिल पे गम और का लेलो तो कोई बात बने ।

किसी के दिल के टूटने का दर्द  ना समझे ,
कभी अपने आप से खेलो तो कोई बात बने ।  

शायरी

चांदनी रात में जलना ही मुकद्दर है मेरी ।
                   न जाने कितनी बेकरारी अंदर है मेरी ।

मेरी कहानी इतनी सी है हमदम मेरे ,
                   प्यासे बैठे हैं, आँखों में समन्दर है मेरी । 

शायरी

खुशबू की तरह दिल में , उतर जाते हो तुम ।
                    दूर होके भी पास , नजर आते हो तुम ।

कई बात बिन कहे भी कह जाते हो तुम ,
                 जाते- जाते भी दिल में ,रह जाते हो तुम । 

Wednesday, March 13, 2013

शायरी

गम पूछने वाले हजार लोग मिलते हैं ,
                        मिलता नही कहीं कोई गम बांटने वाला ।

इश्के - जहर बना के खुदा भूल ही गया ,
                        इक काट न बनाया , जहर काटने वाला । 


जीवन बीमा

शनिवार - रविवार  , 
सोमवार - मंगलवार ।
आज बीमार ,कल बीमार ,
परसों बीमार ,नरसो बीमार ।
हद हो गई अब तो यार ,
रोज- रोज ही रहें बीमार ।
जीवन के तोहफे ये चार ,
सर्दी - खांसी ,नजला - बुखार ।
पड़ी बिमारी की वो मार ,
दवा - दुआ अब सब बेकार ।

बोले हम जीवन से हार ,
हे यमराज लगाओ पार ।
हंसके बोले यम सरकार ,
मरना है तो दूँ मैं मार ।
पर इतना कर जा उपकार ,
देगा दुआ तेरा परिवार ।
छोड़ने से पहले संसार ,
जीवन बीमा करलो यार ।  

शायरी

खाबों के गुलशन में , पलने तो दो ।
                     कोंपल से बाहर, निकलने तो दो ।

अभी से मेरी खुशबू क्यूँ मापते हो ,
                       कली हूँ  ,मुझे फूल बनने तो दो ।

शायरी

मिलती हुई झुकती  हुई ,  नजरों का सितम है ।
                   तुमको भी कसम है सनम , हमको भी कसम है ।

मिल जाए तब समझना , हकीकत है मुहब्बत ,
                       खो जाए तो कह देना की ये दिल का भरम है । 

Sunday, March 10, 2013

शायरी

किस ओर वो चल देगा कब,उसको नही पता ,
              हवा की तरह उसका , आशियाँ नही कहीं ।

मैंने उसे ढूंढा बहुत ,  मिला नही मुझे ,
             मिले जाये तो कह देना , उसका भी है कोई । 

इधर भी प्यार है अभी उधर भी प्यार है

शिकायतों का सिलसिला चलेगा बहुत दिन ,
लगता है दिल में भर गया बहुत गुबार है ।

मुफलिसी के दिन गुजर गये हैं दोस्तों ,
जेब में पैसा है अब अपने हजार हैं ।

चाहते तो सब हैं की इंसानियत रहे ,
खुद पे बात आई तो फिर सब बेकार है ।

कल तलक जो चैन था सुकून था दिल का ,
दर्द बनके अब वही सर पे सवार है ।

सालों बाद उनका संदेशा मिला हमें ,
लिखा था की अब भी हम तेरे बीमार हैं ।

जमाने बाद भी वफा का रंग न उतरा  ,
इधर भी प्यार है अभी उधर भी प्यार है । 

Saturday, March 9, 2013

दोस्ती निभाती रही बेपनाह मैं

घुटती हुई सांसें तेरी , मेरी पनाह में ।
टूटा हुआ दिल , दर्द सुनाता है राह में ।

मत पूछ की मैंने निभाई कैसे दोस्ती ,
बेचैन जब हुआ है तू , डूबी मैं आह में ।

मैंने तो है हर हाल में , निभाई दोस्ती ,
दुश्मन बना लिया भले , तूने निगाह में ।

अच्छा बुरा जो भी कहा , नफरत न थी मेरी ,
बरबादियों से कर रही थी  , बस आगाह मैं ।

तू बैर निभाता रहा है  ,  मुझसे बेवजह ,
और दोस्ती निभाती रही   , बेपनाह मैं ।  

मत पूछो किस हाल में हम हैं

मत पूछो किस हाल में हम हैं ।
जितना बोले समझो कम हैं ।
बेचैनी का आलम ये है ,
बिन पाए खोने का गम है ।

आगे कुआँ पीछे खाई ,
कोई युक्ति काम  न आई ,
चलने को बेताब कदम हैं ।
मत पूछो किस हाल में हम हैं ।

सामने हैं आँखों के सपना ,
कुछ पल में हो जाता अपना ,
पर पैसे कुछ जेब में कम है ।
मत पूछो किस हाल में हम हैं ।

उनको  दिल की बात बताई ,
सोचा होगी पास दवाई ,
वो बोले , उनको भी गम है ।
मत पूछो किस हाल में हम हैं ।

चाय में चीनी कम पडती है ,
झिक -झिक रोज हुआ करती है ,
महंगाई का ये मातम है ।
मत पूछो किस हाल में हम हैं ।

Friday, March 8, 2013

शायरी

वफा के बदले आया इतना ही मेरे हिस्से में ,

रह गया जिक्र बनके तू  मेरे हर किस्से में । 

तूफान और मैं

हर बार जब तूफ़ान घर उजाड़ कर  गया ।
मैंने जहाँ बसा लिया पहले से भी नया ।

टूटी मेरी कस्ती मगर ,  टूटा  न हौसला ,
मैं हार जब न मानी तूफां  , हार कर गया ।

जाते हुए कहने लगा , कुछ बात है तुझमे ,
हर बार मेरा वार तू  ,  बेकार कर गया ।

ठोकर लगाई इतनी   ,  तुझे तोड़ न पायें ,
ले जाते - जाते हार मैं  , स्वीकार कर गया ।

मैं बोली , कहा किसने , की दुश्मन हो तुम मेरे ,
ऐ दोस्त तू तो मुझपे कई ,  उपकार कर गया ।

पता बता गया तू मुझको  , मेरे हुनर का ,
उजाड़ने आया था पर , संवार कर  गया । 

कहने लगा तेरी यही ,  'अदा ' पसंद है ,
ले दर पे तेरे दिल भी अपना , हार कर गया ।

तूफ़ान ने  भले ही   ,  बिगाड़ा था बहुत कुछ  ,
लेकिन वो जाते -जाते फिर , बहार कर गया ।  

जीने का मजा

कितना बुरा लगता है जब ,
                   जिद करते हो और लड़ते हो ।
फिर कितना अच्छा लगता है ,
                  जब प्यार से गुडिया कहते हो ।

इक चिढ़ता एक चिढाता है ,
                           इक रूठे दूजा मनाता है ।
है गुड्डा गुडिया खेल सही ,
                     पर दिल को कितना भाता है ।

हर रोज लड़ाई होती है ,
                          तकरार प्यार में चलता है ।
तभी कहते है , जीने का मजा ,
                       दोस्तों के संग ही मिलता है । 

Thursday, March 7, 2013

तुम मुझको अच्छे लगते हो

कभी मैं देखूं कभी तुम देखो ,
मैं मुस्काऊ तुम मुस्काओ ।
मैं कुछ बोलू फिर तुम बोलो ,
फिर मिलना आते जाते हो ।
फिर रोज - रोज मुलाकातें हो ।
मैं तोहफे दूँ तुम तोहफे दो ।
कुछ पल लम्हें यूँ ही बीतें ,
संग -संग हँसते गाते जीते ।
तब जाके राजे दिल खोले ,
एहसास कहें हौले - हौले ।
फिर प्यार भरा आलिंगन हो ,
तब जाके प्रेममय जीवन हो ।
पर इन बातों का वक्त कहाँ ,
तुम भी ये बात समझते हो ।
लो सीधा - सीधा कहती हूँ ,
तुम मुझको अच्छे लगते हो । 

शायरी

ढपोरशंख की डफली लेकर , वादों का दम भरते नेता ।
                      जनता की झोली के धन से , अपनी झोली भरते नेता ।

भ्रष्टाचार की कालिख लेकर , खेला करते रोज ही होली  ,
                        भारत माँ की मैली चादर ,और भी मैली करते नेता ।

Monday, March 4, 2013

शायरी

बिखरे हुए अरमानों के एहसास में जलूं ।
                       या  वक्त  बदलने  के  विश्वास  में  चलूं ।

रुक के ठहर के बिन लूँ टूटे हुए सपने ,
                     या फिर से नये खाब की तलाश में चलूं ।


Sunday, March 3, 2013

यूँ ही नही कोई हालात से डरता होगा

यूँ  ही  नही कोई  हालात से डरता होगा ।
झूठ कहता है तो सच बात से डरता होगा ।

तन्हा छोड़ गया होगा जब कोई राहों में ,
 इसीलिए वो किसी साथ से डरता होगा ।

नींद जब लाख मनाने से न मानी होगी ,
तभी वो जागती हर रात से डरता होगा ।

नही देता है किसी को भी अपने दिल का पता ,
पुराने जख्म के आघात से डरता होगा ।

कभी फुर्सत में भी खुद से हंसके मिलता नही ,
दिल जलाते हुए जज्बात से डरता होगा ।
 
यूँ  ही  नही कोई  हालात से डरता होगा ।
झूठ कहता है तो सच बात से डरता होगा ।