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Wednesday, October 31, 2012

शायरी

तेरी उम्मीद में ये  दिल , कहाँ -कहाँ न छला ,
                    मैं चली साथ मेरे , मेरा साया न चला ।

तेरी यादों का जोर लेके हवा ऐसी चली ,
              दिल के विरानें में  फिर , कोई दिया न जला ।

शायरी

इश्क की राहों में  ,  अजीब दास्ताँ देखा ,
                    दिल के पहलू में , जन्नत भरा जहाँ देखा ।

गये जब देखने खुदा को तो ,महबूब दिखा ,
                     गये महबूब को जब देखने ,  खुदा देखा ।


Sunday, October 28, 2012

शायरी

हंस  रहा  है  आसमां  ,  मुस्कुराती  है  जमीं  ,
                         दर्द  में  है  दिल  मगर  , चुभ  रही  तेरी कमी ।

क्या पता तुझको की , क्या है तू मेरा, मेरे लिए ,
                        तू ही दिल का चैन भी है ,तू ही आँखों की नमी ।

मुहब्बत में झूठ बोलना अच्छा नही होता

मुहब्बत में झूठ बोलना , अच्छा नही होता ,
सबसे राजे-दिल खोलना , अच्छा नही होता ।

नादान  हैं  वो ,  अबतलक समझे ही नही है ,
दिलबर के दिल से खेलना,अच्छा नही होता ।

उनको नही पता अभी ,  होता है दिल अनमोल ,
भड़े बाजार दिल को मोलना ,अच्छा नही होता ।

माना की उनके संग अब ,चलना नही मुमकिन ,
पर गैरों  के  संग  डोलना , अच्छा नही होता ।

हर  रोज  प्यार  द्वार  पे  ,  दस्तक नही देता ,
जब  आये  तो  मुंह फेरना ,  अच्छा नही होता ।

माँगा खुदा से दिल ने , अब  राहत  नसीब  हो ,
इतना  भी  तो  गम झेलना , अच्छा नही होता ।


Saturday, October 27, 2012

शायरी

इरादों में इतनी ताकत भरी है ,
                      मुसीबत है कितनी कहाँ देखते हैं ।

निगाहें भले ही जमीं पर लगी हैं ,
                        मगर हौसले आसमां देखते है ।

शायरी


ऐसी ख़ुशी उम्र भर चाहिए ,
                    यही जिन्दगी उम्र भर चाहिए ।

खुदा से यही मांग बैठे है हम ,
                 की तेरी दोस्ती उम्र भर चाहिए ।

शायरी

वो डोर कच्ची थी जो टूट गई  है ,
                                वो साथ अधूरी थी जो छुट गई है ।
कोई रूठा हो तो मना लेते मगर  ,
                       कैसे मनाएं जो जिन्दगी ही रूठ गई  है ।

Friday, October 26, 2012

शायरी

वही उलझनें हैं , वही  रंजिसे  हैं ,
                    जहाँ पे खड़े थे , वहीं पे खड़े हैं ।

हमने नही  हार मानी है  अपनी,
           और वो भी अपनी ही जिद पे अड़े हैं । 

Thursday, October 25, 2012

माँ

रात की  चांदनी ,सुबह की रौशनी हैं माँ ,
                   गम की मूर्छा में तो , जैसे संजीवनी हैं माँ ।

हम दें दर्द भी , तो भी , तू  प्यार देती है  ,
                   न जाने कौन सी मिटटी से, तू बनी है माँ ।


शायरी

झूठी वफा रास आती न दिल को ,
                  अच्छा हुआ जो कसम तोड़ डाला ।

खुदा मान लेते उसे इससे पहले ,
               मुहब्बत का उसने भरम तोड़ डाला ।


उनके लिए क्या मुहब्बत यही है

जब भी मिलें हैं , शिकायत ही की है ,
उनके लिए क्या , मुहब्बत यही है ।

कोशिश बहुत  की ,की हमदर्द बनते ,
उन्हें  साथ  से  मेरी , राहत नही है ।

कैसे पता हो  ,  है  क्या दर्द उनको ,
बेखबरी की उनकी , आदत रही है ।

मुहब्बत उसी से , गिला भी उसी से ,
ऐसी  ही  उनकी , इबादत रही है ।

है मंजूर उनको , अगर फ़ासला ही ,
रजा है दिल कोई , बगावत नही है ।

नाराजगी में भी ,  इतना करम है ,
वो भूले न हमको , इनायत रही है ।

Tuesday, October 23, 2012

शायरी

मैं  बसती इस देश में , पिया बसे उस देश ,
                       मैं जलती इस देश में , पिया जले उस देश ।

आवन - आवन कह  गये , आये ना  रे देश ,
                         तन मेरा इस देश में ,  मन मेरा उस देश ।

शायरी

मैं कौन हूँ , तू कौन है , इतना सा भरम था ,
                            मैं 'मैं' हूँ और तू 'तू' है , इतना सा ही गम था ।

जिस दिन से हम मुरीद हुए ,  हैं तेरे  मौला ,
                            मेरा 'मैं' ही  न रहा मेरा , तेरा ये करम  था ।

Sunday, October 21, 2012

इल्में मुहब्बत

आई  बहुत  ही बाद में , ये  इल्में मुहब्बत ,
करने से भी वफा कभी वफा नही मिलता ।

जलजला सिखा गया ,  जीने की ये अदा ,
खैरात में जीने का तजुर्बा नही मिलता ।

आजमां  के  तू  भी  मुहब्बत  को देख ले  ,
कहीं भी जा दिल को,आसरा नही मिलता ।

वो आके मस्जिद से भी ,खाली  चला गया ,
समझा नही झुके बिना, खुदा नही मिलता ।

शायरी

उस  में तो बस दर्द की , आदत बची रही ,
                       दुनिया के लिए दिल में बगावत बची रही ।

तूफान ने बर्बाद मुहब्बत को यूं किया  ,
                        खंडहर था महल , टूटी इमारत बची रही ।



Monday, October 15, 2012

पूछ कभी की हम कैसे हैं

पूछ कभी की हम ,कैसे हैं ।
                      दिल के अंदर गम कैसे हैं ।
प्यार में तेरे खुश हैं फिर भी ,
                      आँख हमारे नम कैसे हैं ।
पूछ कभी की हम ,कैसे हैं ।

कितनें सपनों के घर टूटें ,
                     कितनें अपनें राह में छूटें ,
टूटे  फूटें इन  किस्सों में ,
                   दिल ने सहें, सितम कैसे हैं ।
पूछ  कभी  की हम ,कैसे  हैं ।

कितनी बार मरा ये  दिल है ,
                बात ये बतलाना मुश्किल है ,
मरते-मरते भी इस दिल में   ,
               फिर मरने का दम  कैसे है ।
पूछ  कभी  की हम ,कैसे  हैं ।

पास मेरे जो दो दिल होतें ,
               दोनों  दिल तुमको ही  देते ,
तुम्ही अब बतलाओ तुमसे ,
             प्यार मुझे फिर कम कैसे है ।
 पूछ  कभी  की हम ,कैसे  हैं ।

मेरे गम मुझको सहने दे ,
                      तेरे  गम  तेरे  रहने  दे ,
तेरा- मेरा  बाकि  है जब ,
                 फिर हम कहो सनम कैसे हैं ।
पूछ  कभी  की हम , कैसे  हैं ।

शायरी

हो सकता है कल साथ तेरे  हम नही रहें ,
              पर चाहता है दिल तुझे कोई गम नही रहे ।

दो जहाँ की नेमतें तुझको नसीब हो ,
              खुशियाँ तुम्हारे वास्ते कभी कम नही रहे ।

शायरी

सलीका मुहब्बत का आया न उनको ,
                       वफाओं  के  बदले  गिला  देखते  हैं ।

उल्फत में चलती हैं देने की रस्में ,
                      वो नादान क्या-क्या मिला देखते हैं ।

Friday, October 12, 2012

रब को क्या मंजूर हो जाये

छुपाना जख्म यूं की ,   जख्म से नासूर हो जाये ।
दबा  न  दर्द  इतना  ,  दर्द  से  तू  चूर  हो  जाये ।

इम्तहां प्यार में अच्छा है पर इतना भी मत लेना ,
तू  जिसके  पास जाता हो , उसी  से  दूर हो जाये ।

मुहब्बत  ऐसे  कर  जैसे , इबादत  कर  रहा  कोई ,
तेरा इश्क दिल की दुनियां में  ,  मशहूर हो जाये ।

कभी न दांव पर अपनी ,कोई खुशियां लगा देना  ,
किसे मालूम है की ,  वक्त कब मगरूर हो जाये ।

कई जन्मों से इसी ताक  में , बैठे हैं  उस दर  पे ,
कभी हम उनके दिल में जा बसे और नूर हो जाये ।

घुमे वक्त का पहिया और किस्मत बदल डाले ,
किसे मालूम है कल,रब को क्या मंजूर हो जाये ।

तेरा गम नही जाता

मुहब्बत में कभी खाली कोई ,
                                      कसम नही जाता ।
रुत कोई हो लेकिन यादों का ,
                                    मौसम नही जाता ।
तेरे बीमार हैं बतला तुही ,
                                      हम कहाँ  जाते,
चले जाये कहीं पर दिल से ,
                               तेरा गम नही जाता ।

शायरी

कहो  कैसे बताएं हाले दिल , पागल जमाने को ।
                    लगा है ताक में हर शै , मेरे दिल को जलाने को ।

तरस  आता नही तुझको ऐ दुनिया मेरे दिल पे  ,
                    अभी मासूम दिल मेरा , चला तू आजमाने को ।

शायरी

बदले में जो दिल के वो  , दिल कहीं देते ,
                      मांग लेते जान  भी तो ,  हम वही देते ।

प्यार में निकले मगर शातिर खिलाडी वो ,
                  ले लिया जो दिल ,वापस  दिल नही देते ।

Wednesday, October 10, 2012

वो रात ऐसी थी

रात  भर  जलते  रहे ,  वो  रात  ऐसी  थी ,
खाब  में  चलते  रहे  कुछ  बात  ऐसी  थी ।

सो रही थी चांदनी जब चाँद के आगोश में ,
थम गया था वक्त , वो मुलाकात ऐसी थी।

शर्म से सिमटी  धरा  मुस्कुराई रात भर ,
चाँद  तारों  से  सजी  बारात  ऐसी  थी ।

कहने को एहसास लब थरथराते रह गये ,
हो  नही  पाए  बयाँ  जज्बात  ऐसी  थी ।

जिस तरफ नजरें उठी प्यार का दीदार था ,
हो  रही  वो  प्यार  की  बरसात  ऐसी  थी ।

लड़ने को तूफान से भी भर रहा था हौशला ,
थामी  थी  जो  हाथ  में  वो  हाथ ऐसी थी ।

घोर  सन्नाटे  में छुपके  ,थे नजारे सो गये ,
दो  नजर  जागी  रहीं   हालात  ऐसी  थी ।

मन्नतें मांगी थी कई जन्म तक इश्क ने ,
तब  कहीं  पाई  हो  , वो सौगात ऐसी थी ।
 

Tuesday, October 9, 2012

वो कहते हैं

तुझको अपने पास बिठाकर ,
तुझपर एक कहानी लिखते ।
मौसम कहते ,खुशबू  कहते ,
और फूलों की रानी लिखते ।

जीवन  के  कडवे   रूपों   में ,
तपती   हुई   कड़ी   धूपों  में ,
तुझको शाम सुहानी लिखते ।
तुझपर एक कहानी लिखते ।

उर्जा  भरी  तेरी  आँखों   से ,
स्फूर्ति   लेकर   सांसों   से ,
हर हिस्सा तूफानी लिखते ।
तुझपर एक कहानी लिखते ।

हरियाली  से  भरता  जीवन ,
खोल  पंखुरी  हँसता   यौवन ,
जोश से भरी जवानी लिखते ।
 तुझपर एक कहानी लिखते ।

आँखों   से  झरते  ये   मोती ,
इनकी चर्चा जब - जब होती ,
प्यार का मीठा पानी लिखते ।
तुझपर एक कहानी लिखते ।

इश्क  में  हम  ऐसे  गुम  होते ,
हर  किस्से  में  हम  तुम होते ,
तुम बिन जग बेमानी लिखते ।
तुझपर एक कहानी लिखते ।|


Sunday, October 7, 2012

शायरी

जुल्मों सितम सनम के, हम भी नही सहते ,
                                दिल  नही  लगाते  तो , बेदिल  नही  रहते ।

मिल जाता कही खोया हुआ दिल जो हमारा ,
                           खुदा की कसम फिर किसी को दिल नही देते ।

Saturday, October 6, 2012

शायरी

मेरी दोस्ती का दोस्तों इतना शिला देना,
                    मेरी नादानियों में प्यार तुम अपना मिला देना ।

याद बस  रखना ख़ुशी जो साथ में पाई ,
                    गम मिले हो जो ,  सभी दिल से भुला देना ।

Friday, October 5, 2012

ये तेरी मुहब्बत है या दीवानगी मेरी

ये  तेरी   मुहब्बत   है   या  दीवानगी   मेरी ,
जन्नत तेरे आगे सनम बेनूर लगता है ।

मुझसे दूर होके भी मेरी धडकन  में बसते हो,
जहाँ ये पास रहता है  फिर भी दूर लगता है ।

तेरे एहसास की खुशियाँ कभी भी कम नही होती ,
मेरी चाहत के आगे गम बहुत  मजबूर लगता है ।

समझती है मुझे दुनियां मैं तेरे प्यार में पागल ,
मुझे तो ये  तुम्हारे  प्यार  का सुरूर लगता है ।

माना  दर्द तुझको भी  है माना  दर्द मुझको भी ,
मगर सहलो  इसी से तो वफा में नूर लगता है ।

सितम इतने किये फिर भी उनको चैन न आया ,
इम्तहां  और  शायद  वक्त  को  मंजूर  लगता  है ।

शायरी

उस शख्स ने प्यार को बदनाम कर दिया ,
                               सर पे मुहब्बत के इल्जाम कर  दिया ।

जिस नाम से छुपके मुझे पुकारता था वो ,
                      उस नाम को जालिम ने सरेआम कर दिया ।

Thursday, October 4, 2012

शायरी

कसम खाते नही क्यूंकि कसम टूट जाते हैं ,
                          हाथ थामते है तो राहों में  छुट जाते हैं ।

क्या समझे इसे नफरत या बेरुखी उनकी ,
                         जरा सी बात पे जो ऐसे हमसे रूठ जाते हैं ।

Tuesday, October 2, 2012

कितना अच्छा होता

कब  से  रूठे  हैं , मना लेते तो अच्छा होता ,
गम को हाथों से सहला देते तो अच्छा होता ।

इससे पहले की मार डाले ये कसक मुझको ,
अपने सीने  में छुपा लेते तो अच्छा होता ।

कबसे प्यासे  हैं  , दो बूंद मुहब्बत के लिए ,
प्यार आँखों से पिला देते तो अच्छा होता ।

लोग  कहतें  हैं  सीने  में  मेरे  शोलें  है ,
तुम जो ये आग बुझा देते तो अच्छा होता ।

जिन्दगी  गीत  तराना  मैकशी  लगती ,
तुम भी साथ में गा लेते तो अच्छा होता ।

बैठ  कर  पहरों  तन्हाई  में  बातें करते ,
तुझमे हर दर्द भुला  देते तो अच्छा होता ।

कई रातों से तेरी यादों ने सोने न दिया ,
अपनी बाँहों में सुला देते तो अच्छा होता ।

बिन  तेरे  भी ये जिन्दगी बुरी  तो नही ,
पर जिन्दगी में आ जाते तो अच्छा होता ।

शायरी

ख़ुशी मिले तो गीत गाओ ,
                  गम हो तो आंसू बहाओ ।

प्यार है तो पास में रहना ,
               वरना हमसे दूर ही जाओ ।

शायरी

खता की नही फिर भी वो खतावार कहते हैं ,
                            बिना ही जुर्म के मुझको गुनहगार कहते हैं ।

मेरी मजबूरी पे गुस्सा बहुत करते हैं आजकल ,
                    और आफत है ये गुस्से को अपने प्यार कहते हैं ।

शायरी

प्यार का रंग है ये ,  रंग नही जायेगा ,
                           कोई तदबीर करलो काम नही आएगा ।

जितना ही मिटाएगा घिस घिस के तू इसे ,
                         प्यार और भी गहरा  ही हुआ जायेगा  ।

Monday, October 1, 2012

शायरी

कहते हैं सब है यही जिन्दगी ,
                              कभी हैं बहारें तो पतझर कभी ।

जीले  जो पल हैं मिलें साथ में ,
                       कल हम कहीं होंगे और तुम कहीं ।

वो प्यार ही क्या जो रुलाया नही

वो प्यार ही क्या जो रुलाया नही ,
वो दर्द ही क्या जो तडपाया नही ।

वो धडकन ही क्या जिसको कभी ,
सांसों  ने  धुन  पे  नचाया  नहीं ।

वो आँख ही क्या जिसमें कभी ,
खाब  किसी का ,  आया नही ।

वो इन्सान ही क्या जिसने  कभी  ,
है दिल किसी से लगाया  नही ।

वो तुम ही क्या जिसने हंसके ,
वफाओं को ठोकर लगाया नही ।

वो हम ही क्या जिसने तेरे लिए  ,
हर  गम ख़ुशी से उठाया  नही ।