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Thursday, September 27, 2012

शायरी

जहाँ से चले थे वहीं पे खड़े हैं ,
                  रस्ता न जाने कहाँ खो गया है ।

कैसे मिले हमको मंजिल हमारी ,
               माझी ही जब बेवफा हो गया है ।

मुझे दुनियां वाले दीवानी कहेंगे

मुझे दुनियां वाले दीवानी कहेंगे ,
मेरे प्यार को कल कहानी कहेंगे ।
चलेंगी जब भी मुहब्बत की बातें ,
मुझको वफाओं की रानी कहेंगे ।

रिवाजों  के  झूठे   झमेले  रहेंगे ,
अपने  परायों   के  मेले  रहेंगे ।
नही दिल से तेरी कमी पर मिटेगी ,
अकेले  थे और हम  अकेले  रहेंगे ।

हर  बार  मंजर  बदलते  रहेंगे ,
सुबह शाम उगते और ढलते रहेंगे ।
नही घर नही आशियाना हमारा ,
मुसाफिर हैं हम यूँही चलते रहेंगे ।

कोने में अपने दिल के , मेरे भी दिल को रख दे

कोने में अपने दिल के ,  मेरे भी दिल को रख दे,
चाहत  पे अपने यारा ,  मेरा  भी  नाम लिख दे ।

माना नही कर  सकते ,  हम प्यार की गुजारिश ,
शिकवा गिला ही करलें, इतना तो मुझको हक दे ।

तुझे  सामने  बिठाकर ,  गर प्यार कर न पाए ,
तो  दूर  से  गुजर  जा ,  तेरा  दीदार कर लें  ।

तेरे  प्यार  में  दीवानी  ,  धडकन  हुई  जियादा ,
आ धडकनों में बस जा , सांसों में तुझको भर लें ।

Tuesday, September 25, 2012

वही रोज की बात

वही रस्ते वही मंजिल , वहीं हर रोज चला करते हैं ,
वही कसक वही तड़पन ,यूँहीं हर रोज जला करते हैं ।

टूट  जाते  हैं  ,  हकीकत   के  सामने  सपने ,
फिर  भी  आँखों  में  वही , खाब पला करते हैं ।

दिल्लगी  आदत  में  उनके  सुमार  जब से  हुई ,
छुडियाँ  रोज  ही  ,  दिलों  पे  चला  करते   हैं ।

पूछते  ही   नही , कभी  हाल  भी  बीमारों  का ,
दर्द  भी   दें   तो ,  कहतें  हैं  भला  करते  हैं ।

Sunday, September 23, 2012

शायरी

तुम्हारे बिना हम कहाँ दिल लगायें ,
             कहो तुम जहाँ हम वहाँ दिल लगायें |

महब्बत में जब टूटना ही है दिल को ,
              बताओ की क्यूँ बेवजा दिल लगायें |

शायरी

जहाँ में लोग कहतें हैं मुहब्बत एक धोखा है,
                   किया जिसने, कहाँ उसने कभी अंजाम सोंचा है ।

सदियों बाद भी , दुनियां ये समझ नही पाई ,
                     प्यार किया नही जाता , अपने आप होता है ।

Thursday, September 20, 2012

शायरी

इस तरह हम जिन्दगी का लुत्फ़ उठाते रहे ,
                                     प्यार ही दिया किये प्यार ही पाते रहें ।

जब हुए नाराज वो हमने मनाया उन्हें  ,
                                  हम कभी रूठा किये और वो मनाते रहें ।


शायरी

प्यार का हक हमे , अदा नही करने देते ,
                   दुआ करते हैं तो , दुआ नही  करने देते ।

मेरे महबूब की अदा अलग है दुनिया से ,
                      दर्द  देते हैं पर ,  दवा नही  करने देते ।

Tuesday, September 18, 2012

शायरी

रोज वही समझती हूँ तुम , रोज वही जिद करते हो ,
                             प्यार मुहब्बत की बातों  में , ना  जाने क्यूँ पड़ते हो ।

हम तुमको कैसे समझाये अपना हाले दिल यारा ,
                              हूक मेरे दिल में उठती है , जब जब आंहे भरते हो ।

कौन

कह तो देते अपने दिल की ,
लेकिन मेरी सुनेगा कौन ।

दिल से दिल के तार मिलाकर ,
सांसें  मेरी  गुनेगा कौन ।

फूल  भरे  राहें होंगी तो ,
साथ  कोई  भी  दे  देगा ।

लेकिन राहों से बढ़ बढ़ के ,
कांटे कहो  चुनेगा कौन ।

Thursday, September 13, 2012

नदी और चट्टान

अरमानें मुहब्बत में ,पिघलती चली नदी ,
महबूब से मिलने को ,मचलती चली नदी ।
                आँखों में सजा रखे थे , तस्वीर सनम के ,
                बेचैनी में चाहत के ,  उफनती चली नदी ।

राहों में जब देखा तो इक चट्टान खड़ा था ,
 अपनी ही धुन में वो , बेसुध सा पड़ा था।    
                     कहने लगा नदी से वो ,  जाने नही दूंगा ,
                    समझाती थी नदी मगर जिद पे अड़ा था ।

बोली  नदी खा ले तरस , रास्ता दे छोड़ ,
सुन जरा आके मेरी , धडकनों का शोर ।
                     देता है आवाज, मेरा प्यार देखो बार- बार ,
                     आज बस जाने दे, मुझपे आजमां न जोर ।

नादान था मगरूर और नदी दीवानी हो गई  ,
दौड़ती चट्टान से, टकराने को फिर वो गई ।
                     चीरती चट्टान , गरजती हुई निकली नदी ,
                   और फिर सागर के, बाँहों में जा कर खो गई ।

प्यार जरा सा कर लेना ।

नफरत से जब जी भर जाये ,
प्यार  जरा  सा कर  लेना ।

मुझे सनम सांसों में अपनी ,
खुशबू  जैसे  भर  लेना ।

कुछ  पल  को  ऐ  यार ,
भुला देना तू दुनियां की बातें ,

मेरे प्यार का सदका करना ,
इश्क  में  मेरे  सँवर  लेना ।



Tuesday, September 11, 2012

शायरी

तन्हाइयों में रात-भर, डसती रही आँखें ।
                  सो गई दुनिया मगर ,जगती रही आँखें ।

दीवानगी ने हाल , आँखों का वो किया ,
                 हंसती रही आँखें , कभी रोती रही आँखें ।

रूठा खुदा है

हकीकत को रखना साथ , खुदाई समझके ,
यादें  मिटा  देना मेरी , सौदाई  समझके ।
दिल से जला देना मेरी यादों का गुलिस्तां ,
मुझको भुला देना सनम,परछाई समझके ।

इतना कहो मेरा कहा ,कब मानते हो तुम ,
मजबूरियां जो हैं मेरी , सब जानते हो तुम ।
कितना कहा इन्सान सब मिट्टी  के बने हैं ,
फिर क्यूँ  मुझे अपना, रब मानते हो तुम ।

सुनो कभी आके जो मेरे दिल की सदा है ,
मुझसे ही करता भला ,  क्यूँ मेरी दुआ है ।
आती नही समझ तुम्हें रस्मों -रिवाज की ,
कहता है तू  मुझसे की मेरा, रूठा खुदा है ।

शायरी

देखी अजीब हमने , दस्तूर मुहब्बत की ,
                    बेचैन हुआ दिल , जब  दर्द ने आफत की ।

हमदर्द बना वो ही , जो दर्द है चाहत की ,
                       उसने ही  दिया दर्द ,उसने ही राहत दी ।

Thursday, September 6, 2012

मैंने कहा चल रुत बनाते हैं कहानी

मैंने  कहा  चल  रुत , बनाते  हैं  कहानी ,
छोड़  अपना  रुतबा  ,  करते  हैं  नादानी ।

कब तक करें हम ,वक्त बदलने का इंतजार ,
हम ही बदल के , वक्त क्यूँ न करदे सुहानी ।

कोयल की तरह गाएं , बागों में जाके हम ,
बादल को जाके छेड़े तो, बरसाए वो पानी ।

हमको जो हो पसंद , वो रिवाज हम गढें,
कब तक फिरें कंधों पे लिए, बोझ पुरानी ।

वक्त  की  कमान ,  हमें  सौंपे  वो  आके ,
उनको कोई खबर तो दे, आई है जवानी ।

मुमकिन नही हमारे ,  हौसलों को मापना ,
दिन ही नहीं हम रातें भी, रखते हैं तूफानी ।

कल को कोई समझाये की वो बीत गया है ।
अब राज करेगी जहाँ पे, " आज " दीवानी ।

Tuesday, September 4, 2012

शायरी

दिल हर बात लफ्जों से , कह नहीं पाता ,
                          सच तो  है की ये दूरियां  , सह नहीं पाता ।

मेरी  आँखों  में  पढ़ ले तू  बेबसी मेरी ,
                        छलकता तो है पर दर्द इनसे बह नहीं पाता ।