Friday, June 8, 2012

आभार

पांडित्य दिखने की खातिर , हमने न शब्द को क्लिष्ट किया ,
बस सीधा - सीधा प्यार लिखा , वो ना समझे तो क्या कीजे |

ना  दुनिया के उलझन लिखे  , न नफरत भरे  जलन लिखे ,
बस प्यार भरा तकरार लिखा ,  वो ना समझे तो क्या कीजे |

सपने लिखे ,मुस्कान लिखा , दिल का सब अरमान लिखा ,
चाहत  से  भरा  संसार लिखा , वो ना समझे तो क्या कीजे |

कभी  राधा का घुंघट लिखा , कान्हा लिखा पनघट लिखा ,
जीवन का सच्चा सार लिखा , वो ना समझे तो क्या कीजे |

कभी साजन कभी संदेश लिखा , गाँव लिखा परदेश लिखा ,
यौवन का साज सृंगार लिखा , वो ना समझे तो क्या कीजे |

अपनी  बातें  बतला कर के ,  हारे  उनको  समझा  कर  के  ,
फिर भी उनको आभार लिखा , वो ना समझे तो क्या कीजे |

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