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Tuesday, May 29, 2012

बेचैनियाँ

बेचैनियों  से दो पल  को  राहत तो कर सकूं ,
तुझसे अपने गम की, शिकायत तो कर सकूं |

चाहे  न  चाहे  तू   मुझे ,  मर्जी  तेरी   मगर  ,
तू  चाहे  मुझे  इतनी  मै चाहत तो कर सकू |

ए  मेरे  खुदा   तुझे  उलझन  है  क्या  बता ,
इतना तो करम हो , मै इबादत तो कर सकू |

ये  बता  मै  क्यूँ  नही तेरे प्यार के काबिल ,
कम से कम मैं कम, ये आफत तो कर सकू |

तू  ही  बता  मेरे  लिए , कोई  रास्ता हो तो ,
कुछ भी मै तेरे प्यार के, बाबत तो कर सकूं |

इक बार साथ चलने का भरोसा जो दे मुझे,
तेरे लिए किस्मत से ,बगावत तो कर सकू |

शायरी

बिगड़े - बिगड़े उनके मिजाज से क्यूँ है ,
                    तल्खिया  भरे  हुए  अंदाज  से  क्यूँ  है |

गुमसुम  रहेंगे  ऐसे  तो मालूम कैसे हो ,
                   किस बात पे खफा है, नाराज से क्यूँ हैं |

शायरी

जिन्दगी  के  दिन  बहुत ही  कम  है दोस्तों ,
खुशियों से कहीं ज्यादा यहाँ गम है  दोस्तों |

                     कभी प्यार का ये सिलसिला न टूटने देना ,
                     इसके ही दम से खुशनसीब हम है दोस्तों |

Monday, May 28, 2012

शायरी

मेरी सादगी तेरी सच्चाई , काफी है दोस्ती के लिए ,
                                      इतना प्यार  ही  बहुत है , एक जिन्दगी के लिए |

खुदा  जानता  है  की  जब  भी  मैंने  मांगी है दुआ ,                                        
                                      मांगी  है  ख़ुशी  तेरी   अपनी  ख़ुशी  के  लिए |

शायरी

वो कब मिलेंगे दिल ही दिल में सोंचते  रहे ,
                                      सारे  जहाँ  में  उनका  पता  पूछते  रहे ।

दिल  की  नादानी  का  आलम  तो  देखिये ,
                                    वो दिल में थे दुनियां में उन्हें खोजते रहे ।

Sunday, May 27, 2012

कामयाब

वो  हो  गये  जरा  सा  कामयाब  इसलिए ,

हँसके आजकल नही मिलते हैं किसी से ।
उनमे  और  हममे  बस  फर्क  है  इतना ,

वो कुफ्त से रहते हैं हम जीते है ख़ुशी से ।

पहले से नही थे वो ऐसे तुनक  मिजाज ,

ऐसा नही की उनको था परहेज ख़ुशी से । 

उनको  जरा  सी है  गलतफहमी दोस्तों ,

लगता  है  उन्हें  रुतबा बढ़ता है इसी से ।

Saturday, May 26, 2012

मेरा शहर ही कहता है मुसाफिर मुझको ,

मेरा शहर ही कहता है मुसाफिर मुझको ,
उसे  आता है  मजा इस  तरह बुलाने से |

मेरी गलियाँ देखती है अजनबी की तरह ,
जिनसे रिश्ता था  कितने  ही जमाने से |

जिन होठो  पर  दुआए  हुआ  करती  थी ,
अब मुकरती है दो पल को मुस्कुराने से |

 न  जाने  वक्त ने  उनके  क्या है कान भरे ,
वो समझते ही नही बात अब समझाने से |

कुछ अरसे में ही कितना कुछ बीत गया ,
अब  तो मुश्किल है बीते वो दिन आने से |

Friday, May 25, 2012

मुलाकात

जरा बैठो कहो कैसे हो और अब तक कहाँ थे तुम ,
तुम्हारी  खैर  सुनने  को  बड़ा  बेताब था ये दिल ।

न पूछो तुम को खोने का हमें मलाल था कितना ,
तुम्हारी चाह में था वक्त का कटना हुआ मुश्किल ।

 तुम्हारे बिन ये मेरी जिन्दगी कुछ इस तरह से थी,
भटकता नाव सागर में और मिलता न हो साहिल । 

न  तुमने  बेवफाई  की  न  था  मैंने  वफा  छोड़ा  ,
सोचो कौन है मुजरिम हमारी खुशियों का कातिल । 
                                                                                            
हमारी मुश्किलें थी ये की हम जितना चले ज्यादा ,
उतनी  दूर  हमसे  और  भी   होती  गई   मंजिल । 

बिना ही  जुर्म  के हम किसलिए पाते  रहे  सजा ,
झूठी जिद  से  बोलो  यार  मेरे क्या हुआ हासिल ।

Thursday, May 24, 2012

दिल की दास्ताँ

बड़ी  अजीब  है ये  दिल  की  दास्ताँ  यारों ,
मैं  कहती भी रही और  छुपाती  भी रही ।

एक ही बात जो दिल की कभी शुकून बनी ,
वही  बात फिर दिल को जलाती  भी रही ।

जिस तमन्ना  में  जिन्दगी  गुजरी  सारी ,
उसी से दामन  मैं  अपना छुड़ाती भी रही ।

अपने हाथों से जिन खाबों को तोडा किये ,
फिर वही  टूटे हुए तार  मिलाती भी रही ।

कभी  तो सह लिए  तूफान के  बवंडर भी ,
जरा सी बात पे कभी आंसू बहती भी रही ।

कभी  धिक्कारा  इस दिल  को नादानी पे ,
कभी टूटा दिल तो ढाढस बंधाती भी रही ।

 खताएं जो  भी की सब इस दिल ने ही की  ,
अपने दिल को कुसूरवार ठहराती  भी रही ।

ये  जताती   भी  रही  दिल है  बेईमान बड़ा ,
और इसकी बात में नादान मैं आती भी रही ।

Wednesday, May 23, 2012

मानवता

बड़ा मुश्किल समझ पाना की ये संसार कैसा है ।
बाहर है  उजाला  मन  में  ये  अंधकार  कैसा है ।

कडकती बिजलियाँ छाई घटा घनघोर हो नभ में ,
तो अँधा  भी  बता  देगा  की  ये  आसार  कैसा  है।

भरा  है  खोट दिल में होठ पे मुस्कान प्यारी  सी ,
लगते  हैं  गले  सबके  नया  व्यवहार  कैसा  है ।

संशय  से  सभी  इक  दूसरे  को  देखा  करते है ,
दिखाने को मगर दुनिया से झूठा प्यार कैसा है ।

बड़ी  जितनी  मिली  कुर्सी  ,वो उतने बड़े शातिर ,
किसी  और  के  हक  पे  मचा  ये  मार  कैसा  है ।

कोई  कह  दे  उन्हें  सच  बात  तो  नाराज होते है ,
सच  से  भागने  वाला  ,  ये  समझदार  कैसा  है ।

बिगाड़े जा रहे हैं हम ही  , अपना आने वाला कल ,
कहते   हैं  जहाँ   में  बढ़  रहा  व्यभिचार  कैसा है ।

जरा  सा  हम  बदल जाये ,जरा सी सोच जो बदले ,
तो  मानवता  की  खातिर  किसी  उपकार जैसा है ।

शायरी

हम जुदा हुए मगर  दिल , जुदा  न  कर  सके ,
                           दिल  से  तुम्हारी याद को , दफा न कर सके ।
तुमने  वफा  करना  कभी  चाहा  नही  सनम ,      
                           हम चाहकर भी खुद को , बेवफा न कर सके ।

Tuesday, May 22, 2012

शायरी

बीतेंगे  अब  यूँही  हर  पल  , रुत  आएगा  जायेगा ,
                           मेरे दिल में प्यार तुम्हारा ,जन्म जन्म मुस्काएगा |
नाम मेरा लेगी दुनिया  ,  पर नाम तुम्हारा आएगा ,
                            मै न रहूंगी तुम न रहोगे  , प्यार मगर रह जायेगा |                   

दिल के जख्म

मै किसको दिखलाऊँ दिल के जख्म , बताओ तो यारों,
दिन -दिन बढ़ता ही जाता है , दर्द भला ये क्यों यारों ।

झूठी लगती है दुनियां की , प्यार - वफा  वाली  बातें,
दुश्मन  को  भी  धोखे  से  ये , रोग  कभी  न हो  यारों।

सौ जन्मों की कसमें खाई , प्यार निभाने की लेकिन,
सात  पलों  के  बाद  ही  सारी , बातें  भूलें  वो  यारों ।

दीवानापन क्या होता है  ,  उनको इल्म ये हो जाता ,
मेरे  जैसे  वो  भी  अपना , दिल जो  जातें  खो  यारों।



Monday, May 21, 2012

शायरी

शिकवा गिला तुमसे कभी , हम न करेंगे ,
                           तुम दर्द दो या दो ख़ुशी , गम न करेंगे । 
 तुम कर न सको चाहे , हमसे वफा सनम ,
                          कभी साथ तेरे बेवफाई  , हम न करेंगे ।       

यादें

तेरी यादें हसीन है जहाँ की बातों  से  ,
यकीं न हो जो पूछ लो तन्हा रातों से ।

तेरे तोहफे तो लौटा दिए थे मैंने मगर ,
चुराके रखें हैं कई पल मुलाकातों से । 

कभी मुस्कान बन जाते हैं ये होठों की ,
तो बरसते हैं कभी दर्द बनके आँखों से ।

छुपाये रखे हैं जो याद हमने सीने में ,
महकते है वो अब भी मेरी सांसों से ।

चले जाये कहीं भी दूर यारा हम तुमसे,
की  दूर जा नही पाए इन जज्बातों से । 

जीत के आ गये दुनिया की हर मुश्किल,
लेकिन  हार गये हम तुम्हारी यादों से ।


Sunday, May 20, 2012

दीवाना



मुझे मालूम है की मै तेरे लायक नही लेकिन ,
दिल का मै करू क्या  , ये बस में नही रहता |

फट जाता मेरे दर्द से ही , आज मेरा दिल ,
जो सामने तेरे मै  ,  हाले दिल नही कहता |          

तेरे सपने,तेरी दुनिया तेरी राहे जुदा मुझसे ,
तू थामे हाथ मेरे साथ आगे चल नही सकता |

मगर एक बार जो तुम मुझे आवाज दे देते ,
जहाँ  कहते तुम्हारे वास्ते उस राह पे रुकता |

तुमने कही जो बात वो  , सच्ची रही लेकिन ,
समझता हूँ पर दिल को मै समझा नही पाता |

ना जाने क्यूँ तेरी आरजू  दिल  से  नही जाती ,
इक पल के लिए  भी चैन, दिल को नही आता |

तुम्हारे  पास  रहके  भी  अधूरापन सताता है  ,
दूर  जा  के  भी  दिल  से  मेरे ,  तू  नही जाता |

अपने हालत की तुझसे भला शिकवा करूं कैसे  ,
किस्मत में जो लिखा है , वही लिखा तो मै पाता |

मुझे कोई गम नही जो मुझपे तुम्हे प्यार न आया ,
बस इतना ही है काफी ,  तुझे नफरत नही आता ।


Friday, May 18, 2012

शायरी

तुम्हारे इस जहाँ में लाखो दीवाने है सनम ,
मेरे लिए मगर तेरे सिवा कोई दूजा नही ।
बसाया जिस दिन से मैंने इस दिल में तुझे ,
कसम खुदा की , खुदा को मैंने पूजा नही ।

Thursday, May 17, 2012

हम दोस्तों की बातों का गिला नही करते

उजड़ा है चमन गुल अभी खिला नही करते ,
वो मुस्कुरा के आजकल मिला नही करते | 
             
है हक उन्हें वो चाहे हमे रुसवा किया करे  
हम दोस्तों की बातों का गिला नही करते ||


Wednesday, May 16, 2012

इरादा

बदलते रुत का नही डर है हमको ,
बदलते लोगो से  ,  डर है ज्यादा |
 न जाने कब कर दे दिल के टुकड़े ,
न जाने कब तोड़ के चल दे वादा |

मैंने कहा दिल से  मान ले अब ,
यहाँ हैं चेहरे पे  ,  सबके  चेहरे |
असली हकीकत ,  छुपी हुई है  ,
धोखा भरा रूप है सीधा - साधा |

आदत पड़ी दिल से खेलने की   ,
वफाओं की क्या कदर करेंगे  |
जब चाहे तब तोड़ के चल पड़ेंगे ,
इनके लिए , इश्क एक  धागा |

मगर ये नादान दिल न माना ,
इसे भला कोई समझाये कैसे  |
है इसे अब भी भरोसा खुद पे ,
ना छोड़ेगा  , प्यार का इरादा  |

Tuesday, May 15, 2012

रजामंद

इनकार  ही इनकार वो  करते रहें  हमसे ,
इकरार  पे  इकरार हम करते रहें उनसे |

मालूम था वो फिर भी  ,  रजामंद न होंगे ,
इल्तजा भी बार बार हम करते रहें उनसे |

वो बेवफा हो जाये या  की खफा हो जाये  ,
जो भी मिले स्वीकार हम करते रहे उनसे |

हाँ - ना की कसमकस में वक्त बीतते गये ,
वो ना मिले पर प्यार हम करते रहे उनसे ।

हसरत

धरा प्यारी गगन प्यारा , मगर उससे भी ए यारा ,
मुझे तेरा प्यार प्यारा है ।
जो चाहे तो बना दे तू , जो चाहे तो मिटा दे तू  ,
मेरा  जो है तुम्हारा है ।

इबादत हो मेरी पूरी , कभी सुन बन्दगी मेरी ,
बड़ा संगदिल खुदाया है ।
तेरा होना मेरा मुश्किल , नही माने ये मेरा दिल ,
की तू मुझसे पराया है ।

कभी ऐसा भी दिन आये , तुमको दिल की समझाये  ,
यही सपना सुहाना है ।
चले तन्हा अकेले में , रहे यादों के मेले में ,
दिल कैसा दीवाना है ।

ये है चाहा मेरे दिलने , कभी आओ हमे मिलने ,
इसी हसरत ने मारा है ।
तेरे हमपे करम होते , गले लग के तेरे रोते ,
इतना तो हक हमारा है ।

 

शायरी

 हम ले किसी का नाम  तुम्हारा  नाम आ जाये ,
तुम्हे बस देखले दिल को मेरे आराम आ जाये ।
यही हर पल खुदा से इल्तजा करती है ये सांसे ,           
तुम्हारे नाम पे मरके  तुम्हारे काम आ जाये ।

Monday, May 14, 2012

शायरी

हर  सुबह  लेके  आता  , जैसे  नई  दुपहरी ,
तेरी याद ने बनाई ,  हर दिन मेरी सुनहरी ।
जितना ही सोचती हूँ  मैं  तुझको नही सोंचू ,
मेरे दिल पे छाप तेरी , उतनी ही हुई गहरी।              

शायरी

हम जो गुस्सा हुए उसने , मनाया बहुत ,
हम जो रोये , प्यार करके हंसाया बहुत ।
इसलिए जब जरा सा  ,  गये दूर उससे  ,              
वो मेरा दोस्त मुझे  ,  याद आया बहुत ।

Saturday, May 12, 2012

दुनियादारी

उसे आदत पड़ी कुछ इस तरह नुमाइश की ,
अपनी बदनीयती को ही शान बना रखा है |

बचा के रखना मुश्किल हुआ ईमान धरम ,
इसी ने इन्सान को  इन्सान बना रखा है |

किसी का दर्द देखते हैं  , तमाशे की तरह ,
मतलबीपन  ने  ,  बेजुबान  बना रखा है |

पाक सीरत पे   , पड़  गई मैलों की परत ,
झूठी  तारीफ से  , पहचान  बना  रखा है |

सिक्कों  से तौलते हैं ,  रोज ही जमीरों को ,
दौलती - रुतबे  ने  ,  गुमान  बना रखा  है |

पता होके  भी जिन्दगी  की ,  हर सच्चाई ,
जाने  कैसे  ये  ,  इत्मिनान  बना रखा है |

भूखे सोतें  हैं कई लोग  , रोज  सडकों  पर ,
किसीने  झुग्गी  पर  , मकान बना रखा है |

अब तो राहों में तन्हा हुआ चलना मुश्किल ,
भुखमरी  ने  , कई  शैतान  बना  रखा   है |

वो  खुश  हैं मार के हक  , कई  गरीबों  का ,
उन्हें  ऐय्याशी  ने  ,  बेईमान  बना रखा  है |

झूठी  तारीफ  क्या  कर दी  ,  चापलूसों  ने ,
उसने  जमीं  को , आसमान  बना  रखा  है |

छुपाके  रखते  हैं  सच्चाई को ,  तिजोरी  में ,
दिखाने  को  कई ,  अभियान  बना  रखा  है |

बातें  करते  है  सभाओं   में  संस्कारों  की ,
खुद   अश्लीलता  पे  , ध्यान  बना  रखा  है |

जहाँ बस खो गया है  , झूठी  दुनियादारी  में ,
सच्चे दिल को तो अब , पासान बना रखा है |

भूल बैठा  है  अब  इंसानियत ,  इंसा अपनी  ,
मन  के  शैतान  को  ,  भगवान बना रखा  है |

हमने तो दिल की इक दुनियां अलग बसाई है ,
इसी ने  जीना  बस  ,  आसान  बना रखा  है |

करें क्या बात जमाने से हम ,  मुहब्बत  की ,
इसने ही दोजख भी ,  गुलिस्तान बना रखा है |

Thursday, May 10, 2012

मरहम

कोई जख्मो पे जब मरहम लगा देता है ,
कई दर्द उठ के ,  दिल को रुला देता है |

दुश्मन यादें है जो , जीने भी नही देते ,
और रो भी नही पाते , की हंसा देता है |

कुछ अपने हैं जो अपने से नही लगते ,
कहीं तो गैर को खुदा अपना बना देता है |

पास सागर के भी प्यासे ही रह जाते हैं,
कहीं दो बूंद भी मरते को जिला देता है |   

          

तलाश


कितनी उलझन हैं इन दिल के सवालातों में ,
न जाने कौन सी तलाश है  इन आँखों में ।

सब कुछ पास है फिर भी कुछ कमी सी है ,
दिल में दर्द है और आँखों में नमी सी है ।

वजह पता हो तो दर्दे-गम  की दवा करते  ,
बिना जाने ही गम किस तरह दफा करते ।

जिस मरहम की चाहत किया करता है दिल ,
वही जब पास में आता है तो डरता है दिल ।

गम भरे दिल को तो खुशियों का यकीन नही ,
पाने से पहले ही डरता है इसे खो दे न कहीं ।

करे अब क्या की दिल खुशियों पे ऐतवार करे , 
तलाश ख़त्म करे और जिन्दगी से प्यार करे  ।

Wednesday, May 9, 2012

माँ


जब कुछ जानते न थे , तुम्हे जाना ओ प्यारी  माँ |
जब कुछ सोचते न थे , तुम्हे सोचा ओ प्यारी माँ |

कई थे पास पर एहसास था , तुम्ही हो प्यारी माँ |
सबसे प्यारा सबसे खास था , यही ओ प्यारी माँ |

तेरा मुझे देखनाकर हँसना , वो आमोद प्यारी  माँ |
जन्नत से भी प्यारी थी , मुझे तेरी गोद प्यारी माँ |

कहीं हम जा न पाते थे , तुम्हारे बिन ओ प्यारी माँ |
न जाने खो गये कहाँ , वो प्यारे दिन ओ प्यारी माँ |

वो परियों की कहानी और वो  ,  लोरी   प्यारी माँ |
अगर जो याद हो फिर से सुनादे , थोरी प्यारी माँ |

कभी गुस्सा कभी फटकार , वो पुचकार प्यारी माँ |
जहाँ झूठा है बस सच्चा है ,  तेरा प्यार प्यारी माँ |

करते हैं दुआ बस हम ,  यही  दिन - रात प्यारी माँ ।
रहे सदा तू सलामत और तुम्हारा , साथ प्यारी माँ ।



Tuesday, May 8, 2012

सुरूर

बहुत आदत पड़ी तुमको  ,  उल्फत में मुकरने की  ,
तू  अपनी तरह , हमको भी मुकरना ही  सिखलादे  |

बड़ा मुश्किल हुआ जीना ,  इक तरफा मुहब्बत में ,
न जी पायेगे तेरे बिन  ,  हमे मरना ही   सिखलादे |

धडकता  है  बड़ा ये दिल , तेरा  नाम  ले - ले कर ,
संभालें  हम  इसे  कैसे , सम्भलना ही  सिखलादे |

नही चल सकता गर तू साथ में अपने ,  मुझे लेकर ,
बिना तेरे चलू कैसे  ,  मुझे चलना ही   सिखलादे |

मुझे  मालूम  है  अब  तू कभी , मेरा  नही  होगा  ,
 किसी के अक्स में ,अब मुझे  ढलना ही  सिखलादे |

निकल के जा , चला जा दूर , तू मेरे जेहन से अब ,
या तेरे सुरूर से मुझको , निकलना ही  सिखलादे |


Monday, May 7, 2012

इश्के - जादूगरी

करें हम कब तलक शिकवा की अब तक कुछ नही बदला ,
चलो  कुछ तुम बदल जाओ   , चलो कुछ हम बदल जाए ।

भला  अब  सोचना कैसा   ,  की  जब  इक  दुसरे  के  हम ,
 जरा  तुम मुझमे ढल जाओ , जरा हम तुममे ढल जाये ।

जिन्दगी  की  कठिन  राहें   ,  कितनी  आसन  बन  जाये  ,
कभी जो तुम सम्भल जाओ , कभी जो हम सम्भल जाये ।

चलो   मांगे   दुआ  रब  से  , ये   इश्क -   जादूगरी  जो  है ,
कुछ   तुमपे  भी  चल  जाये  ,  कुछ  हमपे  भी चल  जाये ।


Sunday, May 6, 2012

शायरी

मन्दिर सूना मस्जिद सूना ,                        
सुना था सारा ध्यान ज्ञान ।
प्यार किया तब पता चला ,
दिल में ही बसते  भगवान ।

शायरी

न कर ए वक्त तू मुझसे मेरे बदलने की इल्तजा ,

अगर बदलेगा मौसम  सोच  ले तूफान आएगा । 

        


Saturday, May 5, 2012

शायरी

समन्दर  सोचता  है  तू  , बहुत गहराई है तुझमे ,
                       की जब देखेगा मेरा दिल भरम तेरा टूट जायेगा |

 तेरी आदत जो  है दुनिया के आगे शोर करने की ,
                       तू मुझसे सीख ले सहना , ये आदत छुट जायेगा |         
 

शायरी

जिन्दगी हर कदम हौसलों की आजमाइश है ,
हर इक दिल में दबी कितनी ही फरमाइश है ।
मगर यकीं कर  मुझपे , की बिछ्ड  के तुझसे ,     
न अब तलाश किसी की न कोई ख्वाहिश है ।

शायरी

नही मिलती है हर एक से तबियत अपनी ,
यूँ  तो  हर रोज  कई लोग मिला करते है ।               
हम समझते हैं चाहत को जिन्दगी अपनी ,
लोग कपड़ो की तरह दिल यहाँ बदलते हैं ।

शायरी

जिन्दगी  बनी  कहानी   खोने  और  पाने  की ,            
वक्त  की रही  कोशिश हौसले तोड़ जाने कि ।
बिछरकर आपसे यारा न जी पाए न मर पाए ,
 रुलाये टीस जाने की , हंसाये आस आने की ।

Friday, May 4, 2012

दिल की बीमारी

गये  थे  दूर वो  बस  मापने  गहराई  चाहत  की ,
निकल आये अब इतनी दूर वापस जा नही पाए  ।


 बघाड़ा  करते  थे  बड़ी  शेखीयाँ अपने तजुर्बे  की ,
जब उलझे तो  खुद की उलझने सुलझा नही पाए ।


नही चल पाया दिल पे जोर चाहत में किसी का भी ,
दीवाने मिट गये दुनिया को ये समझा नही पाए ।


सच्चे  प्यार  में  चालाकियां अच्छी  नही  लगती ,
अब कहते है जब  मक्कारी  से कुछ पा नही पाए ।


वो  हंसते  हैं  मगर  आँखों  में  कई  दर्द  है  उनके ,
उसकी  याद  बरसों  बाद  भी  वो भुला नही पाए ।


जिस दिन से जहाँ के वास्ते तोडा  वफा  का  दिल ,
वो अपनी शाने - सूरत  पे कभी इतरा  नही पाए ।



जमाने  भर से  कहते है  मुहब्बत  झूठ है  लेकिन ,
जो है सच्चाई दिल की वो कभी झुठला नही पाए ।



वो  कहते  नही  पर जानता  है  हर कोई  ये सच ,
इस दिल के  बीमारी की दवा कोई पा नही पाए ।












Thursday, May 3, 2012

शायरी

वो पल न कभी आये की जब साथ न हो हम ,
जब साथ हो हम तो किसी बात का क्या गम |
मेरा प्यार कभी  दूर तू मुझसे  नही  जाना ,
क्यूंकि कभी न लौट के आता गया मौसम |

शायरी

हो जाये अगर गलतियाँ , बता दिया करो  ,
न मानू अगर बात , फिर सजा दिया करो |
चुपचाप रहके दिल को जलाना नही अच्छा ,
जरा सी बात यार दिल से न लगा लिया करो |

दीवानगी

इक तरफ दो पाक दिल , इक तरफ दुश्मन जहाँ ,
                   इक मेरी दीवानगी  , तो इक तेरी  शर्मो - हया |

मै निभाऊ एक तरफा , ये मुहब्बत किस तरह,
                   या मेरी दुनिया बसा दे ,या की मेरे दिल से जा |

दिल और आँख

आँखों ने पूछा दिल ये बता ,
          इतना बेकल क्यूँ रहता है |
तू करता है मुश्किल पैदा ,
         और आंसू मुझसे बहता है |

दिल बोला मुस्काकर यूँ ,
           सब तेरा किया कराया है |
पहले तू आँख लड़ा आया ,
        दिल बाद में मैंने लगाया है |