Thursday, April 26, 2012

शायरी

                    1


लोग कहते है मुझे बड़ी मगरूर मै हूँ ,
अपनी बेपरवाह हुशन के गुरुर में हूँ |    

नादान हैं उनको जरा समझाए कोई ,
मै दीवानी तेरी , तेरे ही सुरूर में हूँ |


                     २


कहूँ मै किस तरह, मुझको तेरी परवाह नहीं |
दिल में तेरे सिवा अब , कुछ भी चाह नहीं |
अजीब दास्ताँ है , जिंदगी की ऐ हमदम |
हमारी एक है मंजिल , पर एक राह नहीं |

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