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Thursday, April 26, 2012

शायरी

                    1


लोग कहते है मुझे बड़ी मगरूर मै हूँ ,
अपनी बेपरवाह हुशन के गुरुर में हूँ |    

नादान हैं उनको जरा समझाए कोई ,
मै दीवानी तेरी , तेरे ही सुरूर में हूँ |


                     २


कहूँ मै किस तरह, मुझको तेरी परवाह नहीं |
दिल में तेरे सिवा अब , कुछ भी चाह नहीं |
अजीब दास्ताँ है , जिंदगी की ऐ हमदम |
हमारी एक है मंजिल , पर एक राह नहीं |

खता



रहे तू सामने मेरे , 
                       जो मै तुझको नही देखूं ,
                                                        तो ये मेरी खता होगी ।

और फिर प्यार में तेरे ,
                      जो मै दुनियां भुला बैठू ,
                                                       तो ये तेरी खता होगी ।

शायरी

                         1


सैयाद को मैं पूजता था मानकर अपना खुदा ,
शायद उसे आई तरस , आजाद कर डाला मुझे|                  


                         2


जबसे वादा किया है उसने , गम में साथ निभाने का ,
रोज दुआ करते हैं रब से , गम ही दो खुशियाँ न दो |


                         3


क्यूँ करू शिकवा मैं उससे , बेरुखाई के लिए ,
बेवफा होने से अच्छा , बेरुखा होना ही था |


                        4


है अदा उसकी , हर शाख पे खिल जाने की |
कभी परवाह न की , उसने दिल दीवाने की |
खुल के रो भी न सके , उसकी बेवफाई पे |
कम्बख़त दे गया , कसम है मुस्कुराने की |

शायरी

ख्वाहिश के समंदर में , तमन्ना थी जो मोती की ,
हम उलझे रहे , सच्चे खजाने, छुट गए हमसे |         

हमें तलाश थी उसकी , उसी के ख़ाब में गुम थे ,
हमारी  आस में जो थें , वो भी रूठ गए हमसे ।

शायरी

 जाने हुआ क्या , कहा पे चुकी मुहब्बत ,
 दूर उनके दिल से न कर पाए शिकायत ।
रूठा  रहे  गर मुझसे ,  मेरा  खुदा ऐसे ,
पूरी हो  भला कैसे , फिर मेरी इबादत ।

Wednesday, April 25, 2012

हाले दिल

हमने सोंचा उनसे मिलके , चैन दिल को आएगा ,
                     क्या  बताएं  और  ज्यादा , बेकरारी बढ़ गई ।

होश न बाकि  रहा , अब नींद भी जाती  रही ,
                    जितना भी परहेज रखा और बीमारी बढ़ गई ।

यूँ लगा ये दम मेरा , इस पल निकल ही जायेगा ,
                  मुस्कुराती  वो  नजर ,  ऐसी  करारी  पड़  गई ।

वो  जहाँ   या ये जहाँ , वो  खुदा   या ये खुदा ,
                   जब कसौटी पे कसा तो , प्यार भारी  पड़ गई ।        

वो



बहुत जताते थे प्यार जब हम ,उन्हें लगा हम दगा करेंगे ।
कुरेदेंगे उनके जख्मों को और , चिंगारियों को हवा करेंगे ।

न माने जब वो तो हमने सोचा , हम अपनी राहें जुदा करेंगे ।
जो रह सके पास हम न उनके ,  तो दूर से अब दुआ करेंगे ।

तोहमत

अगर है प्यार जो तोहमत , हमारे नाम कर देना ।
वफा करना खता है तो , हमे बदनाम कर देना ।

नही डरते हैं हम रुसवाई से , दुनिया जमाने की ,
चलो जाओ हमारे किस्से भी , सरेआम कर देना ।

लगा सकते दफा जितने , सभी मुझपे लगा लेना ,
मगर न बेवफाई का  , कभी इल्जाम कर देना ।

अगर मिल जाये वो कहना उन्हें हम याद करते हैं ,
यही है कम उनकी याद में , सुबहो शाम कर देना ।

प्यार के नाम पे जीना , प्यार के नाम पे मरना ,
यूँ करना प्यार , इसके नाम उम्र तमाम कर देना ।

ख़ुशी


खेवैया खड़ा रो रहा तट पे आके ,
 की तूफान नैया लिए जा रहा है ।
भटका हुआ पंक्षी डाली पे सोंचे ,
 हाय क्यूँ अँधेरा घना छा रहा है ।

जितना पतंगा है पर फरफराता ,
 और जाल में ही फंसा जा रहा है ।
छोटा सा दीपक खड़ा है अकेला ,
 हवाओं के डर से बुझा जा रहा है ।

हर एक की बस यही  है कहानी ,
 हर सार हमको ये समझा रहा है ।
सौ दिन में बस चार दिन हैं ख़ुशी के ,
 क्यूँ रोके उसको भी ठुकरा रहा है ।

Friday, April 20, 2012

नादान दिल

उसके प्यार में दिल इस तरह बीमार रहा ,
दर्द पा कर भी उसी का ये तलबगार रहा ।
बेवफा प्यार के  सितम  हैं गंवारा  इसको ,
जहाँ के रुतवे भी दिल के लिए बेकार रहा ।

कितना समझाया की नादान मेरी मान ले तू ,
मगर हर  सीख से  मेरी  इसे  इनकार रहा ।
अब न ये मिला,  न वो मिला, गया सबकुछ ,
दरबदर  यार - यार करके  अब पुकार रहा ।

खुदा को कोस  रहा  उसकी  खुदाई  के लिए ,
जहाँ  की  बातों पे  दिल को  न ऐतवार रहा ।
जो मिला उसको तो दिल ये अपना  न सका ,
जो मिला न,उसकी खातिर खुद को मार रहा ।

Tuesday, April 17, 2012

नाराजगी

कई रोज से न बोले , कहो क्या है शिकायत ,
गुस्सा न गया दिल से ऐसी भी क्या आफत ।

कुछ  तो  मुझे  बताओ ,  क्या बात हो गई ,
नाराजगी   है  कैसी  ,  कैसी  ये  बगावत ।

रूठे  रहोगे  ऐसे  तो  ,  होगा   न   गुजारा ,
बेचैनियाँ  ये  दिल की  , पायेगी न राहत ।

क्या तुमको ना यकीन रहा ,  प्यार पे मेरे ,
या  तुम्हारी   कम  हुई ,  मेरे लिए चाहत । 

मै  सामने  रहूँ , और  तुम  बात  ना  करो ,
ऐसी   तो  नही  थी  ,  यारा  तेरी  आदत  ।

गुस्सा ही  करो लेकिन , गुमसुम न रहो यूँ ,
तकरार करो  मुझसे , तुमको  है इजाजत ।

मुझको  है  ऐतवार  की  तुम मान जाओगे ,
ठुकराओगे कबतलक , मेरी पाक मुहब्बत । 

चलो देखते  हैं हम भी , कि  जीतता है  कौन ,
नफरत तुम्हारी या कि मेरे प्यार की ताकत ।

अक्स

लम्हा  लम्हा  बढ़ती  बेकरारी  मेरी,
तेरे  सुरूर  में  ये  रूह  डूबा जाता है।
लगे  हसरतों  को  पंख  उम्मीदों  के,
नए अरमानो का जाम छलछलाता है।

कतरे  कतरे पे  हो गयी है हुकूमत तेरी,
तू  मुझे  मुझसे  ही  चुराता  है ।
हुआ आईना भी देखना मेरा मुश्किल,
मेरे अक्स में भी तू ही नज़र आता है।


Monday, April 16, 2012

किस्मत का फैसला

हार गए करके किस्मत से हम गिला,
दिल ने जो भी चाहा वो ही नहीं मिला ।
माँगा भी क्या ऐसा जो वो दे नही सका,
हर मोड़ पे बस तोड़ता रहा है हौसला।

जब भी  कोई ख़ाब  लगा आखों  में बसने,
छीन लिया आँखों से सपनों का सिलसिला ।
खुशियों में  शरीक थे  साथी  कई  मगर ,
जब मुश्किलें आई तो  तन्हा ही मै चला ।

इल्तजा  थी  दिल की ये करीब वो  रहें ,
लिख दिया नसीब ने उन्ही से फ़ासला ।  
रोते रहे , हँसते रहें  बस सोच के यही ,
कोई क्या करे ये है किस्मत का फैसला ।

शायरी

                               १

छलके जाम आँखों को ही , पैमाना बना डाला ,
जहाँ ठहरे जरा सी देर ,  मैख़ाना बना डाला ।
उसके नाम का ,  ऐसा कहर छाया ज़माने पर 
लिखा कागज पे, कागज को भी दीवाना बना डाला ।

                         
                              २
वो दिल का हौसला है , और तू है बेबसी मेरी ,
वो देते जान मुझपे छिनती है तू ख़ुशी मेरी ।
चाहे मान जाये तू  बुरा तो भी यही सच है ,
 कि झूठे प्यार से तेरे , है  सच्ची दोस्ती मेरी। 


                                3

मै जीने को तो जी लूँगा , तुम्हारे बिन भी ऐ साथी ,
मगर तब क्या करूंगा , जब तुम्हारी याद आएगी |
मै तेरे प्यार को ऐ यार ,  मरते दम न भूलूंगा ,      
तू शायद एकपल में ,  प्यार मेरा भूल जाएगी |


                          4
हम हुए जुदा , हमारी राहें जुदा हुई ,
जिन्दगी रफ्तार से चलती मगर रही ।
बदली कई ऋतुएं , बदले कई मौसम ।
पर प्यार का मौसम , दिल से गया नही ।  






Friday, April 13, 2012

शक

रोज मै कहता हूँ , तुझपे शक न करूंगा ,
              पर यही गलती मै बार - बार करता हूँ ।

तुम भी तो हर- बार मुझको माफ करते हो ,
        जब मैं अपनी गलतियाँ स्वीकार करता हूँ ।

खुद पे भी यकीन मुझे अब नही जितना ,
                 उतना तुझपे यार , ऐतवार करता हूँ ।

चाँद में है दाग पर , बेदाग तू सनम ,
                जानकर भी मै खता बेकार करता हूँ ।

दुनिया कहती है मै तेरे प्यार में पागल ,
            मै समझता हूँ , इबादते - यार करता हूँ ।

कोई न समझे मगर तुमको तो है पता ,
         किस- कदर मै यार तुझसे प्यार करता हूँ ।

Thursday, April 12, 2012

शायरी

                       1
जो दूर था तो दर्द था की , तू पास नही है ,
अब पास है तो भी , तुझे खोने का गम है |
इसे प्यार कहले या मेरी दीवानगी अब तो ,       
मुझे साँसों से तेरी साँस , जुदा होने का गम है |
                   
                   


                          2
 इक तुझे ही गम नही , डसी मुझको भी जुदाई तेरी|

लगा के दिल से रही   , यादों की परछाई तेरी |

बड़ा मगरूर तू ,बस अपना गम ही रोया किये |

  कह दिया प्यार को मेरे थी  , बेवफाई मेरी |

अजनबी

 ऐ अजनबी  , तुझसे कोई रिश्ता तो है ।
तू गैर है,पर मेरा तुझसे वास्ता क्यों है ।

चला आता है , बरबस मेरे तसव्वुर में ,
तू  मुझको अपनी ओर , खिचता क्यों है ।

क्यूँ हो रहा शामिल , मेरे वजूद में तू  ,
तू बार - बार मेरे दिल में , कौंधता क्यों है ।

क्या जबाब दूँ मैं, दिल के इन सवालों का,
दिले नादाँ , बातें उलझी  पूछता क्यों है  ।

कई बार कहा मन को ,  उसे जान तो ले,
बिना जाने ही तुझे , इतना सोचता क्यों है ।

कई कोशिश की, दफा दिल से तुझे करने की ,
पर मेरा अक्स ही आखिर में, रोकता क्यों है ।

Wednesday, April 11, 2012

'बे' ईमान

सजी थी मंडी इक , ईमान  बेचने के लिए ।
हम जरा बैठे  , खरीददार देखने के लिए ।

वो आये अपना रुतबा , कुछ यूँ दिखाते हुए ।
अपनी मक्कारियां , मुस्कान से छुपाते हुए ।

ऐसी अकड की  हर बात पे  , एहसान हुआ ।
इनके आगे तो  इन्सान , इक सामान हुआ ।

वो तौलने लगे आँखों से  , शख्सियत सबकी ।
हमने तो बोल दिया , ईमान चीज है रब की ।

वो झुंझला उठे , और हुँकार सरे आम भरा ।
चीख के बोले वो , तेरे जैसा ही बेनाम मरा ।

लगे तारीफ में अपनी वो , कसीदा पढ़ने ।
झूठ की मिटटी से , सच  की कृतियाँ गढ़ने ।

सर से ऊपर हुआ पानी और हमने ये कहा ।
ऐ खरीददार , मेरे ईमान का भी दाम लगा ।

उसने दौलत सोहरत का फिर बखान किया ।
 वो' बे ' ईमान है , मैंने भी उसे जान लिया ।

मैंने इक शर्त रखा , सुन तुझे स्वीकार है तो ।
ले मै बेमोल तेरा ,  गर तू ईमानदार है तो ।

वो सकपका के भागा, और अपनी राह लिया ।
हँसी आई मुझे , मैंने फिर इक सलाह दिया ।

बिना  ईमान के इन्सान ,  एक लाश है बस ।
तू कब का मर चुका , बांकी तेरी साँस है बस ।




जाने तुम कब समझोगे।

तनहा जीना मुश्किल है, जाने तुम कब समझोगे ।
खोया - खोया सा दिल है , जाने तुम कब समझोगे।

दुनियां भर की बातों में ,  क्यूँ तुम खोये रहते हो ,
इन सबसे क्या हासिल है ,जाने तुम कब समझोगे ।

देख लो मेरी आँखों में , आज   भी तेरे  सपने हैं  ,
तू  ही दिल की मंजिल है , जाने तुम कब समझोगे ।

दूर हुए फिर भी तुझसे , जुदा न दिल को कर पाए ,
तू तो मुझमें शामिल है , जाने तुम कब समझोगे ।

इस दिल के भोलेपन पे , क्यूँ  तुम  चोट लगते  हो ,
पत्थर नही, मेरा दिल है , जाने तुम कब समझोगे।




Tuesday, April 10, 2012

सवालों की उलझन

बस एक बार यार फिर तू आके चला जा ,
चाहे तू फिर से दिल मेरा दूखा के चला जा |

मैं कब तलक उलझा रहूँ अपने सवालों में ,              
इस बार मेरी उलझने सुलझा के चला जा |

सब पूछते हैं मुझसे ,क्या रिश्तातेरा मेरा ,
मै क्या कहूँ सबसे मुझे बता के चला जा |

आखिर तुझे ये हक किसने दिया जालिम ,
 जो दिल दे तुझे उसका दिल जला के चला जा ।


Monday, April 9, 2012

अनबन

कुछ न कहना, चुप ही रहना ,
पर सुन तो लो , मेरी बातें |
मेरी ना पूछो कोई बात नहीं ,
बस अपनी खैर तो बतलाते | 
चलो, न बोलो पर पढ़ तो लो ,
क्या कहती है, मेरी आँखें |
इन आँखों में सब लिखा है ,
ये जागी हैं , कितनी रातें |
अच्छा जी अब ना रुकना ,
पर हँस तो दो जाते - जाते |
रूठे हो क्या? तो मना लेते ,
बस एक इशारा कर जाते |
क्यूँ ना सोचा, क्यूँ ना समझा ,
बस तोड़ के चल दिए तुम नातें |
कुछ कहा नहीं, कुछ सुना नही ,
मेरी खता तो मुझको कह जाते |

छलावा

न था वो प्यार , तो कल जो था, वो क्या था |
इक छलावा था तेरी बातों का , हंसी धोखा था |
तू आया था मेरी जिंदगी में , तबाही बनके ,
ये अंदाज - दुश्मनी का , बड़ा अनोखा था |

है दर्द, जान के भी , जान न पाए क्यूँ तुझको ,
ये चालबाजियां शातिर , कहाँ से सीखा था |
दिल के जिस कोने में , तस्वीर लगी थी तेरी ,
मेरे जालिम ने वहीँ , खूने तीर फेंका था |

शिकायत

सुन ये यार , मेरा खाब तोड़ने वाले ,
कभी तूने खाब , संजोया तो होगा |
तोड़ केदिल को , सितम ढाने वाले,
कभी नाम पे मेरे , रोया तो होगा ||     

कभी सखियों से बात करते हुए ही ,
मेरा नाम होठो पे , आया तो होगा |
माना की पल दो पल के लिए ही ,
तू याद में मेरे , खोया तो होगा ||

ये कातिल मेरे खुशियों का तू बता दे ,
मेरे दर्द के छीटे , आये तो होंगे ||
कहीं मान ले न जहाँ तुझको मुजरिम,
दामन से वो दाग , धोया तो होगा ||

दुखाया जो होगा तेरा दिल किसीने ,
मुहब्बत है क्या तुने जाना ये होगा |
पाया न होगा सुकूं , जब कहीं तू ,
मेरे दिल के मोती पिरोया तो होगा ||

प्यार की गहराई

डूब तो जाऊ तेरी आँखों में लेकिन ,
माफ करना , मै नशा करता नहीं ।

सुलझा तो दूँ ,  मै तेरी जुल्फें मगर ,         
मै भंवर के , जाल में पड़ता नहीं ।

जाने पर क्या बात है तुझमे सनम ,
देखकर तुझको , ये जी भरता नहीं ।

मान बैठा , तू मेरे जज्बात को मेरी खता ,
क्या करूँ, सच कहने से मै कभी डरता नहीं ।

लाख कोशिश की , की सच को फसाना मान लूँ
कह न पाया , देख तुझको आह मै भरता नहीं ।

इनकार पे इनकार  , मेरे यार तू करता रहे ,
फर्क क्या , मै प्यार तेरे दम पे तो करता नहीं ।

दीवाना


बोलो तो कैसे समझाउं , उस पगली नादान को
दिल के बदले मै दीवाना , दे आया हूँ जान को

वो कहती है पागलपन है , मेरी प्यार भरी बातें
समझा के मै हार गया , मेरे दिल के अरमान को

जब भी मैंने उससे पूछा , तेरा मेरा क्या रिश्ता
जाने क्यूँ झुठला देती है , मेरी हर पहचान को

शायद प्यार की गहराई वो , माप नहीं अबतक पाई
सोच रहा हूँ सिखला ही दूँ ,प्यार मै उस अन्जान को

इंतजार

न थे तुम की बस तुम्हारा इंतजार था ,
बेचैनियाँ थी , दर्द था दिल बेक़रार था |
मौसम कई आये मगर , तू नहीं आया ,
पर आएगा तू मुझको ऐसा इख़्तियार था |

हम ही निभाते रहे बस रस्मे उल्फत को ,
फिर भी ये समझा किये , तुम्हे भी प्यार था |
मर गए हम फिर भी ये , आँखें खुली रही
आओगे जनाजे में तुम , हमें ऐतवार था |

साहित्य सागर


करो देवी कृपा इतनी , जब भी जन्मूँ धरा पर मैं ।
लूँ आनद का गोता , यूँ  ही साहित्य सागर में ।