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Monday, December 31, 2012

नव वर्ष की शुभकामनायें

इन्तजार नये साल का होता नही कल तक ,
आज ही ले लीजिये शुभकामना सभी ।

खुशियाँ तलाश आपकी करती फिरे सदा  ,
मेरे दोस्तों से गम का न हो वास्ता कभी ।

नये साल में हर रंग आपको नसीब हो ,
हर खाब आपके हों हर जीत  आपकी ।

दामिनी

बोली जीने में क्या रखा ,
मैंने दिन इतना बुरा देखा ,
और जग से  रिश्ता तोड़ गई ।
आखिर में वो जग छोड़ गई ।

बोली करना तो यूं करना ,
मेरे नाम पे आखिरतक लड़ना  ,
लो मैं अपना गम छोड़ गई  ।
आखिर में वो  जग छोड़ गई ।

मेरे हाल पे कोई मत रोना ,
देखो  बेबस अब मत होना ,
संघर्ष को दिल से जोड़ गई ।
आखिर में वो जग छोड़ गई ।

कुछ ऐसे अब विकराल बनो ,
किसी दामिनी का ये हाल न हो ,
जन - जन में मचा के शोर गई ।
आखिर में वो जग छोड़ गई ।|

प्यार न गया

इतनी जद्दोजहद के बाद भी , प्यार न गया ,
वो आके चले गये  , इन्तजार न गया ।

उनकी चाह ने  , यादों का मौसम जवां रखा ,
उजड़े बहुत अरमां मगर  , बहार न गया ।

हर कदम पे  ,  टूटते चले गये कसम ,
पर दिल का वफाओं से , इख़्तियार न गया ।

वो तब तलक , प्यार जताते रहे दिल को ,
जब तलक दिल , अपनी वफा हार न गया ।

वो ऐसे गये ,  लौट के वापस नही आये ,
पर दिल से उनका प्यार ,एक बार न गया ।

Saturday, December 29, 2012

दोस्ती

जब भी उठे है हाँथ मेरे  ,करने को दुआ ,
माँगा यही हर बार, बस इतना ही दे खुदा ।

मेरी जिन्दगी के साथ मेरी दोस्ती रहे ,
मरने के बाद भी न हो दिल से मेरे जुदा ।

वो नादानियाँ करे तू जो माफ़ी न दे सके ,
मेरे हिस्से में लिख देना उसकी सभी सज़ा ।

वो भूल भी जाये मुझे  उसे मैं नही भूलूं ,
चुपचाप दोस्ती का हक करती रहूँ अदा ।

मन्दिर में मस्जिद में क्या बन्दगी करूं ,
अब दोस्त इबादत है और दोस्ती  खुदा ।


शायरी

दिल में  कभी मलाल  न रहने दिया करो ,
                   पर सवाल कुछ सवाल ही रहने दिया करो ।

हर बात सुलझ जाये तो जीने का मज़ा क्या ,
                     कुछ बातों  का बवाल भी रहने दिया करो ।

शायरी

दिल तेरा बीमार है कह दे ,
                   झूठ सही इक बार ही कह दे ।

नही निभा पायेगा  तो क्या ,
                  प्यार से बस प्यार ही कह दो ।

शायरी

दिल की आग लगाई है ये ,
                   दिल  ने  नांव   डूबाई   है ।

तुझे दोष हम क्या दे जालिम ,
               जब अपना दिल हरजाई है ।

Thursday, December 27, 2012

इंसान ही हो भगवान नही

जो बिक जाये ईमान नही ,
ईमान नही,  इंसान नही ।
मेरी दौलत , मेरी रहने दो ,
ईमान मेरा  ,सामान नही ।

इक बार गिरे ,दो बार गिरे ,
तुमको  गिरने की आदत है  ,
पर हमे गिरा न पाओगे ,
भोले  हैं हम , नादान नही ।

कभी धोखा देकर जित गये  ,
अब खेल खेलते नये- नये ,
आईने में देखो तो जरा ,
इंसान हो , क्या शैतान नही ।

अब इम्तहान इतना मत लो ,
ईमान बेचकर मत खेलो ,
 ऊँचे पद पे बैठे हो मगर ,
इंसान ही हो भगवान नही । 

Wednesday, December 26, 2012

मुहब्बत का जरा सा दर्द ये

मुहब्बत का जरा सा दर्द ये , रहने दे सीने में ,
लगाया दांव पे खुद को ,तो ये एहसास पाया है ।

किसी ने दौलतें  जोड़ी , किसी ने शोहरतें  जोड़ी  ,
हमने तो जिन्दगी देकर , ये दर्दे दिल कमाया है ।

भरम में थे जो हम अपना, समझ बैठे बेगाने को ,
वो जो कल पराया था  , वो अब भी पराया है ।

लुभाना छोड़ दो हमको , ख़ुशी का वास्ता देकर ,
जहाँ की झूठी खुशियों से, हमे ये गम ही भाया है ।

वफा की आस में तरसें मगर ,  आया न वो मुरके ,
इक ये दर्द है अपना  ,  न चाहा तब  भी आया है ।

कसम तुमको ऐ दर्दे - गम , दिल से दूर मत जाना ,
हमारी  बदनसीबी  है ,  सबने  दामन  छुड़ाया  है ।

खुशियों का प्याला छोड़ जायेंगे

हो सकता है चलकर भी ,
हम मंजिल नही पायें ,
मगर मुमकिन है हम ,
पाओं का छाला छोड़ जायेंगे ।
अँधेरे रास्तों में फिर ,
न भटकने का डर होगा ,
अपने अनुभवों का ,
वो उजाला छोड़ जायेंगे ।
जहर सब कुप्रथाओं के ,
पी जायेंगे हम इकदिन ,
कल के वास्ते
खुशियों का ,
प्याला छोड़ जायेंगे ।

शायरी

गम  का  कारण  भी  तू  ही  है ,
             और वजह भी तू खुश होने की ।

इतने  आंसूं  मत  दे  जा  की ,
                आदत  हो  जाये  रोने  की ।

Tuesday, December 25, 2012

क्या लडकी होना अभिशाप लिखूं

उस कलुषित मन के पाप लिखूं ।
या  दुनियां  के  संताप  लिखूं ।
क्या लडकी होना अभिशाप लिखूं ।।

अस्मिता के वो  चीथड़े लिखूं  ।
क्या बिखड़े हुए कपड़े लिखूं ।
या जख्मों  भरा  विलाप लिखूं ।
क्या लडकी होना अभिशाप लिखूं ।।

नेताओं की नई चाल  लिखूं ।
आन्दोलन या  हड़ताल लिखूं ।
आश्वासन भरा  आलाप लिखूं ।
क्या लडकी होना अभिशाप लिखूं ।।

Monday, December 24, 2012

जाने जां कुछ तो बोलो ना

कोई  प्रेम सा मन में घोलो ना ,
जाने - जां  कुछ तो बोलो ना ।

अच्छा हो , बुरा तुम बोलो ना ,
पर ये क्या की तुम बोलो ना ।

 दिल में जो लगकर चुभ जाये ,
कोई बात तीर सा बोलो ना ।

पर यूँ गुमसुम न रहा करो ,
दिल जलता है कुछ बोलो ना ।

रूठे हो  , अब कब मानोगे ,
जानेमन कुछ तो बोलो ना ।

सूना - सूना सा लगता है ,
जब भी तुम कुछ भी बोलो ना ।

कुछ गिला करो कुछ प्यार करो ,
अनबन छोडो मुंह खोलो ना ।

अब कसम मेरी जो ना बोले   ,
पत्थर हो क्या कुछ डोलो ना ।

कोई  प्रेम सा मन में घोलो ना ,
जाने जां कुछ तो बोलो ना ।

इंसानियत से अब तो भरोसा ही उठ गया

इतिहास के पन्ने पलट रहें हैं आजकल ,
देखें कहाँ - कहाँ पे क्यूँ सत्ता पलट गया ।

जिस देश में नारी की पूजा किये सभी ,
उस देश में नारी का रुतबा क्यूँ घट गया ।

कुदरत की बनाई हुई सबसे हंसीं मूरत ,
इंसान के हांथों में आया तो  लुट गया ।

ताकत मिली उन्हें ,नुमाइश में लग गयें ,
ऐसे कली को रौंदा ,सरबस ही मिट गया ।

जो  इस कदर बेदर्द है इन्सान न होगा ,
इंसानियत से अब तो भरोसा ही उठ गया ।

Saturday, December 22, 2012

कुछ कहा नही कुछ सुना नही

अबतक हमने मुंह  बंद रखा  ,
कुछ कहा नही कुछ सुना नही ।

अब जोड़ से भी चिल्लाएं तो ,
वो कहते हैं  ,,कुछ सुना नही ।

वो ऊँचे जाकर जो बैठे हैं ,
निचे से कहा , तो सुना नही ।

कोई तडप रहा था सडकों पे ,
वो घर में थे  , कुछ सुना नही ।

कोई कई दिनों से सोया नही ,
वो सोये थे  ,  कुछ सुना नही ।

कोई पीडा से न होश में है ,
वो मौज में हैं  , कुछ सुना नही ।

अब जनता कहती है बाहर आ ,
फिर कहता हूँ  , जो सुना नही ।

वो  कहते  हैं  रहने  भी  दो ,
वो क्या कहना , जो सुना नही ।

सब  फिर  वैसा हो जायेगा ,
जैसे कहा नही, कुछ सुना नही । 

दुनियां को बचाने की शुरुआत यही है

दुनियां को बचाने की शुरुआत यही है ,
हम खुद को बचाने की अभियान में रहें ।

किसी और के एहसान के दावे में न पड़े ,
अच्छा है ये हम खुद की ही एहसान में रहें ।

रोज - रोज ज्ञान की कुछ बूंद को पियें ,
दिन न कोई चुके ये भी ध्यान में रहे ।

आँखों के पिटारे में हो कुछ खाब भी कल के ,
पर सतर्कता से आज के कल्याण में रहें ।

मेरे प्यार को तो तमाशा न कहिये

मुहब्बत भले खेल हो आपका पर ,
वफाओं को मेरी दिलासा न कहिये ।

अपने  लिए  आप  जो  सोंचते  हो ,
मेरे प्यार को तो तमाशा न कहिये ।

रुलाया  बहुत  आपने  दर्द  देकर ,
मेरे हाल को अब हताशा न कहिये ।

मुझे है यकीन रंग लाएगी कोशिश ,
मेरी चाह  को  झूठी आशा न कहिये ।

हमारी तरह  फिर मरेगा  न कोई ,
समन्दर सा दिल है ,जरा सा न कहिये ।

शायरी

न नींद है ,  न चैन है ,  न होश है बांकी ,

सौ बात की इक बात है की प्यार हुआ है ।

शायरी

यही बात उनकी सारे जमाने से जुदा है ,

वो हार के भी हार कभी मानते नही ।


शायरी

नासमझ वफायें भी समझें न , क्या करें ,

पूछो तो कहतें है , अलग अंदाज है अपना ।

Thursday, December 20, 2012

शायरी

टूटे हुए दिल को हम ,  जोड़ तो लेंगे ,

पर उम्र भर रह जायेगा निशान दर्द का ।

मैं होश में रहूँ न रहूँ तुमको इससे क्या ।

मतलब की बात करलो  , है काम का मसला  ,
कुछ  बात  तो  होगी ही  ,  आये  न  बेवजह ।
अब बंद करो रोज का  ,  अपना ये फलसफा
मैं  होश में रहूँ न रहूँ  ,  तुमको  इससे  क्या ।

इस कदर  भी  गैरों  का  ,  ख्याल  न  करो ,
दुनियां यूंही चलती है  , तूम मलाल न करो ।
होगा करम जो छोड़  दो   ,  मेरे हाल पे मुझे ,
क्यूँ  इस कदर  जीते  हैं   ,  ये सवाल ना करो ।

कोई  भी जतन करलो  ,  मुझे कुछ नही कहना ,
मैं दर्दे - गम कैसे भी सहूँ  ,  तुमको इससे क्या ।
 मैं  होश में रहूँ न रहूँ   ,  तुमको  इससे  क्या ।

दुनियां क्या सोंचती है   ,  बताते हो किसलिए ,
सुनना नही जब कुछ भी  ,  सुनते हो किसलिए ।
कुछ  भी  हो  हाल   ,  हमने  बुलाया  नही  तुम्हें ,
कुछ  तो  भरम  रखते ,  तुम आते हो किसलिए ।

जब  तुमने  मुझे   , अपना  समझा  ही  नही  है ,
तो मैं गैर कहूँ  , अपना कहूँ , तुमको इससे क्या ।
मैं  होश  में  रहूँ न  रहूँ   ,  तुमको  इससे  क्या ।


 

शायरी

प्यार करके मुकरने की सज़ा इतनी हो खुदा ,

वो  तडपे  तब  भी  कोई  उसे  प्यार  ना  करे । 

शायरी

नाजुक से मेरे दिल पे सितम उसने वो किये ,

अब नाम से भी इश्क के दिल खौफजदा है ।

शायरी

ताज्जुब है ,दुनियां में गम और है लेकिन ,

हर बार मुझे ,प्यार का गम ही मिला है ।

शायरी

कितनी  अजीब बात  है  ,  हम  चाहें  न  चाहें ,

वो  जिद  पे  अड़े  हैं  ,  हमारे  दिल  में  रहेंगे ।

Wednesday, December 19, 2012

शायरी

लगा था छोडके उन्हें आ गये हम दूर कहीं ,

दिल में देखा जो उन्हें , हाय रे भरम टूट गया ।

प्यार जितना भी है सब दिल में छुपा लेते हैं

प्यार जितना भी है , सब दिल में छुपा लेते हैं ।
कह भी दे तो क्या , शिकवों के सिलसिले होंगे ।

मुझे  फिर  दर्द की राहों से  ,  गुजरना होगा ,
तुम्हें भी फिर से ,  उन्हीं बातों  के  गिले होंगे ।

मुझे बड़ा  दर्द  हुआ  ,  साथ  तेरा  खोने  से ,
तुम्हे  थोड़े  से  सही  ,  दर्द  तो  मिले  होंगे ।

सब कुछ जान के भी  , तुम जो आजमाते रहे ,
कभी सोचा न  ,  कितनी बार दिल जले होंगे ।

घाव दिल के  ,  जतन कर के भी न भरे होंगे ,
तभी  तो  छोड़ तुम्हे  ,  दूर  हम  चले  होंगे ।

शायरी

चलती  है  हवा सर्द , खिड़की खोल मत देना ।
                     अपने जज्बात फजाओं से जाके, बोल मत देना ।

पहले  से  ही  बेदर्द  सी  ,  बहती  हैं  हवाएं ,
                         इनमें कहीं तुम अपना भी गम घोल मत देना ।

शायरी

इश्क जब हद से गुजर जाता है ।
                     जहाँ  भी  देखिये  इश्क  नजर  आता  है ।

इश्क फिर होठों से बयाँ नही किया जाता ,
                     दिल ही कहता है और दिल से ही सुना जाता है ।

शायरी

मेरे लिखे हुए शब्दों को , जरा पढ़ के बताएं  ,

जज्बात बयानगी में हम , कितने खड़े उतरे ।

शायरी

फरमाने - मुहब्बत अब कुछ इस तरह से हो ,

वो जो बे - मरौअत हैं , तो उन्हें प्यार ही न दो ।

Tuesday, December 18, 2012

शायरी

मातम न मनाना  , मेरी बर्बादी का कोई ,

आदत सी हो गई है अब ,ऐसे ही जीने की ।

किसका सगा है दिल

ढूंढा बहुत तो जाना  ,  कबसे गुमशुदा है दिल ।
मेरी सुनता नहीं है आजकल , मुझसे जुदा है दिल ।

इक वो हैं  ,   बड़े आराम से  , जीते हमारे बिन ,
इसी इक बात से  ,  बेवजह हमसे खफा है दिल ।

अकड़ते हैं बहुत ज्यादा  ,  वो अपनी होशियारी पे ,
उन्हें मालूम शायद  ना हो  ,  कितना बेवफा है दिल ।

धडकता है , किसी के नाम पे  , और है  ,किसी का दिल ,
जिसका है , नही उसका , तो फिर किसका सगा है दिल ।

शायरी

सनम दिल में ,  मेरी जगह रहने देना ।
                     मेरे जीने की ये   ,  वजह रहने देना ।

अगर  रस्में -उल्फत निभा न सके जो ,
                         मुझे  , दोस्तों की तरह रहने देना ।

शायरी

माना की यहाँ  दिल के , खरीदार  बहुत हैं ,
                     पर क्या करें ये सौदा तो , पहले ही कर चुके ।

फितूर अगर होता   , तो उतार भी देते ,
                         कैसे उसे उतारे  ,  जो दिल में उतर चुके ।




शायरी

उसी इक बात का यारों शिकायत हम करें कितना ,
 उसी के दर्द से बोलो ये आँखें नम करें कितना ।

करो एहसान अब इतना मुझे  अपना ही गम दे दो ,
एक ही गम का अब सारी उमर मातम करे कितना ।


Monday, December 17, 2012

शायरी

दोस्तों  ने दिया दिल को ,  इस कदर धोखा ,

सब को छोड़ हमने  ,  खुद से दोस्ती करली ।

गुमसुम रहूँ तो

गुमसुम  रहूँ  तो ,  हंसाते  हैं  पहले ,
हंसू जो तो कहते हैं , हंसती हो ज्यादा ।

गुस्सा दिलाते हैं  ,  नादानी करके ,
फिर ये गिला की , बरसती हो ज्यादा ।

नाराजगी में  ,  मनाते तो है पर ,
शिकायत ये भी की , अकड़ती हो ज्यादा ।

नही छोड़ते हैं  ,  सताने की आदत ,
लडूं जो तो , कहते हैं लडती हो ज्यादा ।

मैं कह दूँ अगर की  , मुहब्बत नही है ,
कहेंगे हसीं पे ,  बिगडती  हो  ज्यादा ।

वफाओं में उनकी  ,  बनावट नही है ,
इसी बात से , उनपे मरती हूँ ज्यादा ।

हर हाल में मैं खुश हूँ

हर हाल में मैं खुश हूँ  ,  ये  मेरी  वफा  है ।
पर अबतलक तू गम में है , ये तेरी सज़ा है ।

आसान है तू कर  के खता  , मांग ले मांफी ,
मैं माफ़ करूं या न करूं  ,  मेरी रज़ा है ।

मैंने कहा जब प्यार , तो समझे नही थे तुम ,
अब चुप रहूँ ,  तो भी तुम्हे मुझसे गिला है ।

कितना खराब हाल  था  , तेरे प्यार में मेरा ,
तुमको तो हर बार मुझसे  , प्यार मिला है ।

मै तडपी बहुत फिर भी  ,  तुम्हे दर्द न हुआ ,
फिर किस तरह कहते हो  , दिल मुझसे जुड़ा है ।

कितने हसीन पल थे  , जब साथ थे हम - तुम ,
अब तन्हा -  तन्हा रहना ,कहो  कितना बुरा है ।

मैंने  तो  झूठा  प्यार  ही  ,  खोया है मुझे क्या ,
फुरसत में कभी सोंचना    ,  तेरा क्या गया है ।

शायरी

इक दिल और इक जान' पि ' , दी जो तुमपे वार ।

होते जो सौ जान  तो  ,  वारती  सौ - सौ बार ।

शायरी

जरूरत क्या तुम्हे  , तीर और तलवार की कातिल  ,

नजर भर  देखलो  जिसको , वो जीना छोड़ दे खुद ही।

Saturday, December 15, 2012

शायरी

कहता था कभी जो मेरे रहते गम नही होगा ,

वही गम दे गया इतना ,जो अब कम नही होता ।

शायरी

जमाने भर की  रुसवाई , हंसके सह गये लेकिन ,


जरा सी बेरुखी तूने की , लो मेरी जान पर आई ।

शायरी

उस सैयाद ने , फरियाद दिल की , अनसुनी करके ,
                    अच्छा  - भला  दिल का जहाँ , बरबाद कर डाला ।

दिल कहता था ,  बंदी रख , उसने एक न सुनी ,
                   तरस खाया नही और  , कैद से आजाद कर डाला  ।

शायरी

दिल के दर्द से अभी ,  फुर्सत नही मुझे  ,

 होश में आने दो ,फिर कोई बात करेंगे ।

शायरी

वो हंस पड़े , जब मैंने कहा , प्यार है तुमसे ,

वो क्यूँ हँसे ,हम आजतक उलझे हैं इसी में ।

शायरी

नादान थी मै ये क्या ,मांग बैठी ,
                            वफाओं के बदले वफा मांग बैठी ।

जिसे  प्यार की कुछ समझ ही नही थी ,
                           उसी को मैं अपना खुदा मान बैठी ।

Friday, December 14, 2012

शायरी

उसीने  चोट  देकर  दिल  मेरा  पत्थर  बना  डाला ,

अब शिकवा भी करता है , पत्थर दिल सनम कहके ।

टूटे हुए रिश्तों को बचाने की कवायत

टूटे  हुए  रिश्तों  को  बचाने  की  कवायत ,
दिल रोज करता है , मगर हम नही करतें ।

उसकी दूरी के गम से दिल तडपता तो बहुत है  ,
दिल मरता है उसकी याद में  , हम नही मरते ।

जिद सी उठती तो है, शिकायत करने की लेकिन ,
हंसी होठो पे रखते हैं   ,  उनसे हम नही लड़ते ।

वो भी डाल के बैठे हैं   ,  अपने हाल पे चुप्पी ,
हम भी पास रहते हैं    ,  मगर आगे नही बढ़ते ।

मुहब्बत कल भी थी ,  आज है , कल भी रहेगी ,
मगर दिल के झमेले में , फिर से हम नही पड़ते ।

किसे मालूम था   ,  एक दिन ऐसा भी आएगा ,
टूटने ख़ाब  हैं   ,  गर जानते दिल में नही भरते ।

रफ्ता रफ्ता यूंही जिन्दगी  , बित जाएगी ऐ दिल ,
जरा सी बात पे , रो- रो के शिकवा हम नही करते । 

Thursday, December 13, 2012

न आयेंगे हम राह क्यूँ देखते हो

आना मेरा गर  , गंवारा न था तो ,
महफिल से जाने से क्यूँ  रोकते  हो  ।

तुम्हे गर मुहब्बत , नही हमसे यारा ,
तो हम तुमको चाहें ये क्यूँ सोचते हो ।

गुजरते हो राहों से  , कतराके ऐसे ,
जैसे  की  नाता  नही  कोई  हमसे,

नजर सामने से ,  मिलाते नही जब ,
किसी और से हाल  क्यूँ पूछते हो ।

बहुत गम हुआ , मेरी बातों से तुमको ,
खता बस हुई की हकीकत सुनाया  ,

मुझे जब नही हक , शिकायत करूं मै ,
तो तुम ताने - बाने ही क्यूँ फेकते हो ।

तुम्हारे लिए   ,   कितने आंसू बहाए ,
मगर दिल तुम्हारा न फिर भी पसीजा ,

बहुत हो गया  ,  गिडगिडाना तडपना ,
न आयेंगे हम  ,  राह क्यूँ देखते हो ।

शायरी

बेकदरों की इतनी कदर कर गये हैं ,
                         न पूछो वफा किस कदर कर गये हैं ।

लुटा आये अपनी ख़ुशी उनके उपर ,
                         अब उनके गमों से सफर कर रहे है ।

शायरी

कितना मुश्किल है समझना , की जो था ,

झूठ था सबकुछ ,

जिसे सच मान के , दुनियां से हम तकरार करते थे ।

शायरी

दिल के साथ की उसने ये कैसी बेरुखी यारों ,

जिसे हम प्यार कहते थे, वो थी बस दिल्लगी उसकी।

शायरी

इस तरह से तोड के तुम जाओ मेरा दिल ,

तडपे भी अगर दिल तेरी पनाह न मांगे ।

शायरी

इश्क मुझको हुआ है  , उसे इल्जाम क्या मै  दूँ ,

उसने दिल नही दिया  , वो समझदार बहुत  हैं । ।

शायरी

जो बोल प्यार के भी गम में दे नही सके ,

फिर खुद को इन्सान समझते हो किसलिए ।

शायरी

ये सोंचकर रख दी है पर्दे में हकीकत ,

नंगा सरे - बाज़ार तू अच्छा न लगेगा ।

शायरी

मै  नाराज  हूँ  तुमसे , मगर मै क्या करूं ऐ दिल ,

तुझे नाराज मै कर दूँ , ये भी अच्छा नही लगता ।

शायरी

कहते तो थे ,  तुमसे मेरा दिल का नाता है ,

तो जब तोडा मेरा दिल तो तुम्हे दर्द न हुआ । 

शायरी

कुछ भी न अदा कर सका मेरे प्यार के बदले ,
.
.जाने प्यार की दौलत में वो कितना गरीब है ।

Saturday, December 8, 2012

मुहब्बत न कर बहुत गिला होगा

वो कहते हैं , मुहब्बत न कर ,बहुत गिला होगा ।
शायद मुहब्बत में उन्हें , गम बहुत मिला होगा ।

उन्हें  भी  रातों  को  ,   नींद   न  आई  होगी ,
दिन  बेचैनीयों   के  साये में  ,   ढला  होगा ।

उनकी आँखों में   ,  उदासी का सख्त पहरा है ,
इन पलको में कभी   , खाब कोई  जला होगा ।

उन्हें  यकीन  न  रहा   ,  वफा  की  बातों  पे ,
बेवफाई  ने   ,  इस  बुरी  तरह  छला  होगा ।

रौशनी ने दिया होगा   ,  उन्हें  तोहफा गम का  ,
ख़ुशी  की  आस  में  ,  अँधेरों  में  चला  होगा ।

कोई तो जख्म है  , जो सबसे  छुपा  रखा  हैं ,
भला  ऐसे  ही  कोई  कैसे   ,  बावला  होगा ।

कितनी बेकरारी से तुम्हारी राह तकती थी

कितनी  बेकरारी  से   ,  तुम्हारी राह  तकती थी ,
इक इक पल कटें ऐसे, की इक सदियाँ लगती थी ।

तूने फिर भी न समझा, मुहब्बत किसको कहते हैं ,
तुम्हे  दीवानगी  मेरी  ,  बस इक खेल लगती थी ।

मेरी नाराजगी पे तुमको ,  आई  हंसी  कितनी ,
तुम बेदर्द थे  ,  तुमको न मै ऐसा समझती थी ।

दिल  में  तीर के जैसे  ,  लगा कांटा चुभा कोई ,
उसी के दर्द में  , रात - दिन , हर रोज जलती थी ।

अगर जो तुम बुरा होते , हम तब भी न गम करते ,
गम ये था , की नियत तेरी , कितनी बदलती थी ।

तेरी बेरुखी ने  ,  तोड़ कर रख दिया मुझको ,
मै  हर सुबह उगती थी , और हर शाम ढलती थी ।

अच्छा हुआ ,  झूठे सहारे  ,  छोड़ आये हम ,
मेरी ही आरजू थी जो  , मेरे अरमान छलती थी ।

इतना प्यार कर बैठी

मुझे कोई हक न था ,
                   फिर भी तुमसे रार कर बैठी ।
दीवाना हो गया था दिल ,
                       जो मै तकरार कर  बैठी ।
मेरी नादानी को ये दिल ,
                           नजरंदाज  कर   देना ।
खता ये हो गई मुझसे  ,
                         जो इतना प्यार कर बैठी ।

Friday, December 7, 2012

शायरी

आग लगता है अभी और दिन जलाएगी ,
                      चैन लगता है कुछ और दिन न  आएगी ।

हम सोंचते हैं  न जाने कब वो आयेंगे ,
                       वो  सोचते  हैं  न  जाने  कब  बुलाएगी ।

शायरी

सताके मुझे अब मज़ा ले रहे हो ,
                         नाराजगी  और  बढ़ा  दे  रहे  हो ।

पहले ही दिल जो जलाया क्या कम था ,
                       जो चिंगारी को फिर हवा दे रहे हो ।

हम रूठे तो तुमको मनाना न आया

हम रूठे तो तुमको मनाना न आया ,
दिल रखने का कोई बहाना न आया ।

ये किस बेकदर से लगा बैठे दिल हम ,
जिसे नाजे -उल्फत उठाना न आया ।

माना  तुम्हे  प्यार  हमसे  बहुत  है ,
क्यूँ हाले दिल फिर बताना न आया ।

खता  हो  गई  हमसे  नाराजगी  में ,
ये सच है हमे गम जताना न आया ।

मगर रुठ  के हम चले जब वहाँ से ,
तुम्हे आवाज देके बुलाना न आया ।

तुम्हे क्या यकीन प्यार पे न रहा था ,
दो आंसू वफा के बहाना न आया ।

बहुत चोट तुमने लगाई जो दिल पर ,
जरा सा भी मरहम लगाना न आया ।

खता तुमने की पर सज़ा मैंने पाई ,
तुम्हे आके हमको बचाना  न आया ।

समझ पाते  तुम जो मेरी वफा को ,
शायद अभी वो जमाना न आया ।

Thursday, December 6, 2012

तेरे साथ मेरी मुहब्बत तो होगी

रहेंगे अगर दूर तुमसे तो तुमको ,
हमारे लिए कुछ शिकायत तो होगी ।

रुठोगे हमसे गिला दिल में लेकर ,
हमारे लिए थोड़ी नफरत तो होगी ।

मगर जिन्दगी से अकेले लड़ोगे ,
तो तुमको किसी की आदत न होगी ।

बहुत दर्द दिल में बसाये हुए थे ,
तुम्हे अब उनकी भी चाहत न होगी ।

जागेंगे जब दिल में सपने - सुहाने ,
बिना पाए उनको भी राहत न होगी ।

नई  जिन्दगी  के  नये  खाब  होंगे ,
बेकार  झूठी  बनावट  न  होगी ।

बहुत दूर जाना है लम्बा सफर है ,
तुम्हे दोस्तों की जरूरत तो होगी ।

ये माना  की हम न तेरे साथ होंगे ,
मगर साथ मेरी मुहब्बत तो होगी ।
 

शायरी

लगा तीर दिल में है , कैसे निकाले ,
                             बहुत दर्द होता है कैसे सम्भाले ।

वही दर्द दे जिसको देनी दवा थी ,
                      फिर किससे कहे आके हमको बचाले ।

शायरी

यही सोंचते हैं की ऐसे तो न थे ,
                   तुम वो नही हो कोई और होगा ।

कभी भूल से हमने सोंचा भी न था ,
                   तू खेल में मेरा दिल तोड़ देगा ।

जितना ज्यादा चाहा उसको

 जितना ज्यादा चाहा उसको ,
                      उतना ज्यादा गम कर बैठे ।

बातें उसकी सोंच सोंच के ,
                       आँखें अपनी नम कर बैठे ।

जिसको प्यार का पता नही था ,
                    उल्फत की कोई समझ नही थी ,

ऐसे सौदाई से क्यूँ कर  , 
                    दिल का सौदा हम कर  बैठे ।

Wednesday, December 5, 2012

कभी प्यार कहदो

जो चाहो तो दिल को , खतावार कह दो ,
मेरी  बेबसी  को  ,  मेरी  हार  कह  दो  ।

खालो मगर तुम  ,  तरस मेरे दिल पर ,
सनम तुम मेरे हो , बस इक बार कहदो ।

जो तुम भी न समझो , तो किससे कहेंगे ,
मेरे दिल पे होगा ये  , उपकार कह दो ।

चुरा लोगे हर गम  , मेरे दिल में छुपके ,
तुम्हे साथ मेरा   ,  है स्वीकार कह दो ।

पता है जलन कितनी ,  होती है दिल में ,
ये दिल  ,  तुम्हारा है बीमार कह दो ।

मुहब्बत में जाने क्यूँ  ,है इतनी उलझन ,
तुम भी बने हो क्यूँ  ,  दिवार कह  दो ।

कह - कह के हम थक गये प्यार तुमको ,
तुम भी तो हंसके  ,  कभी प्यार कहदो ।

Tuesday, December 4, 2012

कुछ प्यार की बातें भी करलो

कुछ प्यार की बातें भी करलो ,
जब बोलोगे , गम बोलोगे ।

दुनियां में खुशियाँ  है लेकिन ,
जब देखोगे , गम देखोगे ।

क्या क्या जाने ,क्या क्या समझे ,
कितनी बातें हैं जानने को ।

पर तुमको इन बातों  से क्या ,
जब समझोगे ,गम समझोगे ।

देखो किलकारी बच्चों की ,
लगता है खुशियाँ बरस रहीं ।

तुमको खुशियों से क्या मतलब ,
जब सोचोगे , गम सोचोगे ।

देखो ये बदली अम्बर में ,
कितना मन को हर्षाता है ।

पर तुमको तो गम करना है ,
जब करते हो ,गम करते हो ।

अब छोड़ भी दो गम का दामन ,
इससे जकड़े क्यूँ रहते हो ।

प्यार भी दो कभी प्यार भी लो  ,
गम  देते - लेते  रहते हो ।


मुहब्बत यही है

बड़ी बेबसी है , न पूछो  ये क्या है ,
सभी कह रहे हैं , मुहब्बत यही है ।

कहाँ जाएँ ,कैसे मिले चैन दिल को ,
सुनो ,एकपल को भी राहत नही है ।

न जाना न देखा , न सोंचा  ये होगा ,
ये धोखा है दिल का, शिकायत यही है।

जरा देर रुकते , समझते सम्भलते ,
ये नादानियाँ है , शराफत नही है ।

लगता है  ,  अरमां ये जीने न देगी ,
और मरने न देगी ,की आफत यही है ।

 कहते हैं सब ,  ये है मौसम का जादू ,
हवाओं में देखो  ,  नजाकत यही है ।

देखो जी अब  ,  इम्तहां न लो मेरी ,
मुझे बेकरारी की  ,  आदत नही है ।

मिटाने से भी जो , मिटा न सके हम ,
लगता है अब की  , मुहब्बत वही  है ।



हम प्यार का कलम पढ़ आये

सब नफरत के गुण गाते थे ,
हम प्यार का कलमा पढ़ आये ।

सब मतलब-मतलब करते थे ,
हम बेमतलब की कर आये ।

वो  देने  को  तो  बैठे  थे ,
हमको  लेना  मंजूर  न  था ।

हम लेन- देन में फंसे नही  ,
और वापस अपने घर आये ।

इक बाजी खेली

इक बाजी खेली अच्छा था ,
ईमान लगाया अच्छा नही ।

दौलत हारे कोई बात न थी ,
ईमान गंवाया अच्छा नही ।

इक दिल को जीता अच्छा था ,
फिर दिल को दुखाया अच्छा नही ।

कुछ घर जलते  तो बन जाते  ,
पर दिल को जलाया अच्छा नही ।

कसमें खाना तो अच्छा था ,
पर कसम भुलाया अच्छा नही ।

कुछ मिला नही कोई बात न थी ,
पर आह कमाया अच्छा नही ।

Monday, December 3, 2012

अँधेरा है बहुत , चल के दीया ढूंढते हैं

अँधेरा है बहुत , चल के दीया ढूंढते  हैं ।
                        चांदनी के तले  , चाँद  नया  ढूंढते हैं ।

अब न चाहिए  बेदर्द  ,  दर्द देने वाले ,
                        कोई  मसीहा जो ,जोड़े जिया ढूंढते है ।

देख के जख्म , मुंह फेर के गये कितने ,
                   जिसको आये हमारे गम पे, दया ढूंढते हैं ।

मै हूँ तलाश में तू भी साथ चल मेरे ,
                    मिलके हम साथ में , हसीन जहाँ  ढूंढते हैं ।

गुनहगार कहाँ है

नफरत बोते है , और कहते हैं ,
ऐतवार कहाँ है ।

दिल को तोड़ के , पूछते हैं ,
बता प्यार कहाँ है ।

किससे पूछे की चमन में,
उदासी क्यूँ है ।

चलो दिल में ही तलाशे ,
वो गुनहगार कहाँ है ।

Sunday, December 2, 2012

तुम कहाँ थे

कितनी तन्हा हो गई थी , तुम कहाँ थे ।
आँखें  मेरी  रो  रही  थी  ,  तुम कहाँ थे ।

दिन गुजारा ,बस तुम्हे ही याद कर के ,
राह तक के सो गई थी  , तुम कहाँ थे ।

सारी  दुनियां साथ थी , बस दूर थे तुम ,
मेरी खुशियाँ खो गई थी , तुम कहाँ थे ।

पूछो मत की  ,  काटे कैसे वक्त मैंने ,
चैन जैसे खो गई थी  , तुम कहाँ थे ।

मेरे जिम्मे छोड़ के सब चल दिए तुम ,
प्यार तन्हा ढो रही थी  , तुम कहाँ थे ।

तुम बरसते थे न , बनके मन पे बादल ,
फिर भी अरमां बो रही थी ,तुम कहाँ थे ।

दुनियां को कैसे दिखाती  ,  दाग दिल के ,
छुप के उनको धो रही थी , तुम कहाँ थे ।

 कितनी तन्हा हो गई थी , तुम कहाँ थे ।
आँखें  मेरी  रो  रही  थी  ,  तुम कहाँ थे ।



Friday, November 30, 2012

जिन्दगी ने क्या सिखाया

जिन्दगी ने क्या सिखाया ,
बस ख़ुशी की बात कर ।

और ख़ुशी ने क्या सिखाया ,
प्यार से हर बात कर ।

प्यार ने फिर क्या सिखाया ,
दोस्ती के साथ चल ।

दोस्ती ने क्या सिखाया ,
चल खताएं माफ़ कर ।

फिर खता ने क्या सिखाया ,
देख कर हर राह चल ।

राह ने फिर क्या सिखाया ,
रुकना मत' दिन रात चल ।

सच बोलने का सर मेरे इल्जाम कर दिया

सच बोलने का सर मेरे , इल्जाम कर दिया ,
बेअदब कहके  ,  मुझे बदनाम कर  दिया ।

जब झूठी शान गाई , तो सर पे बिठा लिया ,
फरमाया हकीकत तो , सरेआम कर दिया ।

हर एक को यकीन ,  दिलाये तो किस तरह ,
न जाने किसने ,सच्चा मेरा नाम कर दिया ।

वो कहते हैं  ,  दिल तोड़ते नही है किसी का ,
बस इसलिए पीया की आगे जाम कर दिया ।

उसने  कहा  बुरा तो  ,  हंसके  टाल गये हम ,
हमने कहा तो  ,  जीना ही हराम कर  दिया ।

बेईमान दिल न जाने , किसका हो गया जाके ,
उसकी तलाश में  , सुबह से शाम कर  दिया ।

थक गया लिख-लिख के कलम, कुछ नही बदला ,
अच्छा हुआ , हाथो को कुछ आराम कर  दिया ।

Thursday, November 29, 2012

इक दीया

राहों में मिला मुझको , इक जलता हुआ दीया  ,
चोट  में  हवाओं  की  ,  पलता   हुआ  दीया  ।

हालात  पे  उसकी  जरा ,  आई  मुझे  दया ,
बचाव  में उसकी  , मैंने  दामन  बढ़ा दिया ।

आदत से जलाने की , पर वो बाज  न आया ,
दामन  मेरा  जलाने  , मेरी  ओर  भी  बढ़ा ।

मैंने  बड़ा  सम्भाला  उसे , जब नही सम्भला ,
इक  फूंक  मारी  मैंने ,  और दीया बुझा दिया ।

मै

मै वो बला हूँ , जिससे पार पा न सकेगा ।
मै वो अदा हूँ , जिसके पार जा न सकेगा ।

तू कह तो तेरी सोंच के , परतों को खोल दूँ ,
उलझाऊंगी  ऐसे  की ,  पार आ न सकेगा ।

वो  आग  हूँ  , जो  दूर  से  भी देती है जलन ,
वो पानी हूँ ,  जिससे जलन बुझा न सकेगा ।

तुझको  बड़ा  गुरुर  है  ,  अपने  वजूद  पर ,
मेरी शख्सियत के पास भी ,तू आ न सकेगा।

हर खेल से वाकिफ हूँ मै , माहिर हूँ खिलाडी ,
खेलूं  अगर  जो तुझसे  ,  तू  हरा  न सकेगा ।

किस्मत की दौड़ में भी ,  आगे हूँ मै तुझसे ,
तू दौड़ेगा कितना भी ,  पास आ न सकेगा ।

मै  वो दवा रखती हूँ , जो भरते हैं जख्म को ,
मै  वो जख्म भी देती हूँ , जो मिटा न सकेगा ।

मै  साथ  दूँ  तो  तू  ही  ,  बन  जायेगा  खुदा ,
मै  तोड़ दूँ तो खुद को भी , तू  पा न सकेगा ।

कभी सोंच तुझपे मैंने , किये कितने करम हैं ,
इस जिन्दगी भी कर्ज़ तू  ,  चूका न सकेगा ।

तुझको  नही  पता ,  मेरे  हुनर  की  हकीकत ,
मेरे कूंचे से भी निकल के , कहीं जा न सकेगा ।

कुछ  और  देर  रुक  ,  देख  होगा  तमाशा ,
वादा  है  तू  तमाशा  ये  ,  भुला  न  सकेगा ।

Wednesday, November 28, 2012

मेरी जान भला ले रहा है क्यूँ

सौदा -ए- मुहब्बत का उसे इल्म नही क्या  ,
सौदाई दिल के बदले दर्द  दे रहा है क्यूँ ।

उससे कहो इक बार में , मुझको फ़ना कर दे ,
 किस्तों में मेरी जान भला ले रहा है क्यूँ ।|

Tuesday, November 27, 2012

कमबख्त मुहब्बत

जालिम जहाँ वाले हैं की जीने नही देते ,
कमबख्त मुहब्बत है की मरने नही देता ।

नाकारा समझती है , दुनियां हम क्या करें ,
ये दिल है की कोई काम  ही करने नही देता ।

इस दिल के लेन - देन  में , धोखे बहुत  हुए ,
अच्छा यही होता की ये दिल ही नही होता ।

कटपुतली बना रखा है इस दिल ने बेवजह ,
जाने क्यूँ दिल पे किसी का बस नही होता  ।


सच बोलने से शायद तू नफरत करे मुझसे

सच बोलने से शायद तू ,नफरत करे मुझसे ,
पर झूठ बोलने से भला किसका कब हुआ ।

दिल तोड़ने की यूं  तो  , आदत नही मेरी ,
तुमको ही गिला होता सच क्यूँ छुपा लिया ।

मेरी खता बस ये थी , की मै  खेल में रहा ,
और तुमने मेरे खेल को दिल से लगा लिया ।

माना  की  तू  सदमे  में  है ,   मेरे गुनाह से ,
तुमको क्या लगा मुझको कोई गम नही हुआ ।

आदत नही मेरी  ,  की सबसे हाले दिल कहूँ ,
तूने कहा  गम  सबसे और  मैंने छुपा लिया ।

तेरे आंसुओं ने मुझको , कुछ इस कदर  तोडा ,
तू  बद्दुआ  देता  है   ,  मै  देता  हूँ  दुआ ।

जो हो गया वो  , बिता हुआ ला न सकूंगा ,
पर तू बता मेरे लिए कोई सोंची है सज़ा ।

इन्सान हूँ  ,  इंसानियत रखी है बचा के ,
बतला कहाँ से लाऊ मै  तेरे लिए खुशियाँ ।

मुजरिम तेरी खुशियों का  ,  कूचे में है तेरे ,
माफ़ी तू  दे गुनाह की , चाहे  सज़ा सुना ।

Monday, November 26, 2012

चमन फिर से खिल उठे

बरबादियों के गीत अब  , अच्छे नही लगते ,
कोई प्रेम गीत गा , की सुमन फिर से खिल उठे ।

अँधेरा  करके  तूफां  ने ,  अच्छा  नही  किया ,
अब तू ही कर , अच्छा की चमन फिर से खिल उठे ।

बेचारगी  ने  ,  पानी  बना  डाला  खून  को ,
जला तू आग , दिल में अगन फिर से खिल उठे ।

नजरे  जमाये  बैठा  है  ,  इतिहास आज पे ,
बदलाव ला  ,  उदास नयन फिर से खिल उठे ।

सो  गई  दिलों  में  ,  देश - प्रेम  दोस्तों  ,
लगायें वो लगी , की लगन फिर से खिल उठे ।

कोई  तो  स्वार्थ  भूल  के  , आगे  को  आएगा ,
लानी है  वो ख़ुशी , की चमन फिर से खिल उठे ।

इश्क के वो चार दिन

सारा जीवन इक तरफ, और इश्क के वो चार दिन ,
याद  रखा  बस  यही  ,  भूलें  सब  बेकार  दिन ।

उस तरफ दुस्वारियां , मक्कारियां  ,चालाकियां ,
इस  तरफ  नादानी में  , डूबे  हुए  खुद्दार  दिन ।

जिन्दगी  परवान  पर ,  रात  भर  जगती  नजर ,
प्यार  में  डूबे  हुए  ,  मदहोश  से  बीमार  दिन ।

शोखियाँ  वो  हुस्न की  , इतराके  चलना  राह में ,
डालता  वो  इश्क  पे ,  प्यार  का  खुमार  दिन  ।

वो हंसी सपनों की दुनियां ,दिल की वो दीवानगी ,
दिल लगाके  कर लिए  , खुद के ही दुस्वार दिन।

महफिलों  से  भागना  ,  तन्हाइयों  में  जागना ,
यादों  में  गुम  हुए  वो  ,  बेसबब  लाचार  दिन ।

इतनी सी दौलत कमाई ,  जिन्दगी  में  दोस्तों ,
छोड़ दी सारी दुनियां , रख लिए बस चार दिन ।

Sunday, November 25, 2012

रूठी रही कई रोज तक मुझसे मेरी कलम

रूठी रही कई रोज तक , मुझसे मेरी कलम ,
कहने लगी कुछ भी हो वो नफरत न लिखेगी ।  

अरमान ,  मुस्कान ,  दो  जहान  लिखेगी ,
दुनियां की झूठी शानों - सौकत न लिखेगी ।

काँटों की तरह चुभके जो दामन खरोच दे ,
बिगड़ी हुई वो बाप की दौलत न लिखेगी ।

सुकून जो देते हैं  , फसाने  ही  दिलों  को ,
तो बेचैन करने वाली हकीकत न लिखेगी ।

वो बीमार है  , उसको  दवाई  तो  दे  कोई ,
मुकरती हुई दुनियां की ये आदत न लिखेगी ।

हँसते हैं वो दुनिया पे , बस घरों में बैठके ,
मतलबपरस्त , ऐसी शराफत न लिखेगी ।

हालात  से  हारे  हुए  ,  खंडहर  के  वास्ते  ,
मलबों में सिसकती सी , इमारत न लिखेगी ।

वो जितना गिरा , एकदिन उतना ही उठेगा ,
उसके लिए जिल्लत भड़ी किस्मत न लिखेगी ।

तूनें ख़ुदा  ,  हाथों को जो बख्सी है ये नेमत ,
वादा है , कलम मेरी ,  बनावट न लिखेगी ।

आवारा

जीते जी ही वक्त के हाथों  ,  मैंने उसको हारा देखा ।
धूल के निचे दबा हुआ इक , टूटा हुआ सितारा देखा ।

सब ने कहा ,वो पत्थर दिल है ,दर्द नही उसको होता है ,
मैंने जब उसका दिल देखा ,  बच्चों जैसा प्यारा देखा ।

नफरत के उस सौदागर के , नफरत के कितने किस्से हैं ,
दिल ने लेकिन उसके दिल को , प्यार के हाथों हारा देखा ।

जाने किस झोंके ने आके  ,  उसके सपने तोड़े ऐसे ,
फिर उसकी आँखों ने वैसा , सपना नही दुबारा देखा ।

आँखों में सूरज के जैसी, चमक छुपी है उसकी लेकिन ,
उसने जब भी दुनियां देखी , गहराता अँधियारा देखा ।

कहाँ किसी ने देखा ,उसके कंचन जैसे पावन मन को ,
बाहर से दुनियां ने उसको , बस पागल आवारा देखा ।

खेल मुहब्बत का

इक दांव मै चलूंगी इक दांव तुम चलो ,
है खेल मुहब्बत का कोई जंग नही है ।

तुम हो बड़े माहिर इस खेल में हमदम ,
मै  इस तरफ तन्हा कोई संग नही है ।

ये क्या की अपनी जीत पे मगरूर हो गये ,
जाओ जी  तुम्हे खेलने का ढंग नही है ।

इस खेल ने यारा तुझे कितना बदल दिया ,
अब प्यार का चेहरे पे कोई रंग नही है ।

मत सोंचना आँखों में हैं ये हार  के आंसू ,
तुम जीते हो इस बात से हम दंग नही है ।

तुम क्यूँ हँसे अब जाओ मुझे खेलना नही ,
तुम भूल गये  प्यार है  ये जंग नही है ।

Friday, November 23, 2012

मै हार गई वो जीत गया

मै हार गई वो जीत गया ,बस इतना ही अब याद रहा ।
मै हार के भी खुशहाल हुई ,वो जीत के भी बरबाद रहा ।

डूब गया मझधार में वो  , अपना  दुखड़ा  रोते - रोते ,
कभी नही समझा वो नादाँ , किस्मत उसके हाथ रहा ।

सोंच-सोंच के जला किया, कोई रहबर नही हुआ उसका ,
पूछा नही कभी दिल से , क्या वो अपने भी साथ रहा ।

जाल प्यार का रचा गया  ,  और सपनों के दानें डाले ,
फंस के चिड़िया बेचैन हुई ,तब चैन से वो सैयाद रहा ।

उसने नफरत के किस्सों में , किस्सा अपना लिख डाला ,
फिर से कोई दिल टूटा  , और फिर से गम आबाद रहा ।

हम ढूंढा किये उसकी खुशियाँ , इस दुनियां के वीराने में ,
वही  चैन  चुराकर  लोगों  का , बेचैनी  में  हर  रात रहा ।

अब जाके हमको पता चला  , क्यूँ उसकी रब ने नही सुनी ,
वो प्रेम का धागा कच्चा था , तब ही खाली फरियाद रहा ।

ले जश्न मना तू जीत गया , मै चली तुम्हारी महफिल से ,
अब क्या गम तू अच्छा या बुरा , मेरे जाने के बाद रहा ।

Thursday, November 22, 2012

फिर सुबह होगी

जगाओ मत अँधेरा है , मुझे कुछ और सोने दो ।
मेरे टूटे हुए सपने  ,  मुझे  फिर  से  पिरोने  दो ।

अब जागेंगे हम तब ही , यारों जब सहर होगी ।
हमे मालूम है  ऐ  जिन्दगी  , फिर सुबह होगी ।।

टूटी  हुई  है  नाव  ,  और  मंजिल  अधूरी   है ।
मगर जाना है हमको पार ,तो चलना जरूरी है ।
जो तू साथ दे मेरा , तो फिर आसां  डगर होगी ।
हमे मालूम है  ऐ  जिन्दगी  , फिर सुबह होगी ।।

मै  अपना  नाम गर , राम से रहमान धर लूँ तो ।
मन्दिर दूर है , मस्जिद में अपनी पूजा कर लूँ तो ।
क्या  मेरे  लिए  बदली  हुई  ,  तेरी  नजर  होगी ।
हमे मालूम है  ऐ  जिन्दगी  , फिर सुबह होगी ।।

हमे न इल्म था  , वो  दुश्मनी  ऐसे  निकालेगा ।
भड़े   बाजार  ,  मेरे  प्यार  को  ऐसे  उछालेगा ।
सुनो लगता है यूँ , अपनी कहानी  भी अमर होगी ।
हमे मालूम है  ऐ  जिन्दगी  , फिर सुबह होगी ।।

मुकद्दर में दीवानों के , लिखी तकदीर ने मुश्किल ,
ले -  ले  इम्तहां तू भी  ,  अगर चाहे ऐ मेरे दिल ,
मेरे प्यार पे नफरत तुम्हारी  ,  बेअसर होगी ।
हमे मालूम है  ऐ  जिन्दगी  , फिर सुबह होगी ।।

प्यार के साथ हम ,  थोड़ा सा तकरार रख लेंगे ।
छाँव  तन्हा  न रखेंगे , धूप  दो  चार  रख  लेंगे ।
रहेंगे साथ दोनो , जिन्दगी अच्छी  बसर  होगी ।
 हमे मालूम है ऐ  जिन्दगी  , फिर सुबह होगी ।।

Tuesday, November 20, 2012

मुहब्बत हो नही पाती

न जाने कौन सी बात है उस शख्स में यारों ,
नफरत आ तो जाती है नफरत हो नही पाती ।

दिल कई बार कहता है उससे निभ न पायेगी ,
बगावत आ तो जाती है बगावत हो नही पाती ।

कभी नाराज होकर जब वो मेरा दिल दुखाता है ।
शिकायत आ तो जाती है शिकायत हो नही पाती ।

जी करता है उसके साथ मै जी लूँ फिर बचपन ,
ये चाहत आ तो जाती है  ये चाहत हो नही पाती ।

दिल कहता है उससे मांग लूँ  मै उसके सारे गम ,
ये हसरत आ तो जाती है ये हसरत हो नही पाती ।

बड़ी मासूमियत से जब वो मेरे पास आता है ,
मुहब्बत आ तो जाती है मुहब्बत हो नही पाती ।

उसी में सूरज भी इक छिपा है

रोज शाम को जलता है वो ,
ऐसे  जैसे  कोई  दिया  है ।
उसको ऐसा क्यूँ लगता है ,
यही जिन्दगी यही मज़ा है ।

उसने मन के हर कोने में ,
इतना दर्द दबा रखा है ।
सोचा करता है वो दिल में ,
यही मुहब्बत यही वफा है ।

बहुत से शिकवे लिए हुए वो ,
न जाने क्यूँ ऐसे जी रहा है ।
पूछे कोई तो कहता है सबसे ,
उसे किसी से कहाँ गिला है ।

उसे तो बस इतनी सी खबर है,
जुदा है किस्मत जहाँ से उसकी ।
 नही समझ पाया अबतलक की ,
वो  खूबियों में भी तो जुदा है ।

तलाश में है वो रौशनी की ,
अँधेरे में गुमसुम जी रहा है ।
उसे यकीं कोई दिलाये कैसे ,
उसी में सूरज भी इक छिपा है ।

तू भी उड़े उन्मुक्त

तू भी उड़े उन्मुक्त तुझे मै ,
                अरमानों का ऐसा पर दूँ ।

अपने स्नेहिल एहसासों से ,
                मै तेरा मन पावन कर दूँ ।

अगर यकीं है तुमको मुझपे ,
             और जरा सा संयम रखलो ।

बीन तो लूँ मै पहले खुशियाँ ,
               फिर तेरे दामन में भर दूँ ।

शायरी

कभी  इकबार  जीवन  में ,  मुहब्बत सबको होती है ,
                            हार  के  जीत जाये  ,  ऐसी  चाहत  सबको  होती  है ।

इक तू ही नही हमदम , यहाँ तक़दीर का मारा ,
                           यहाँ तो अपनी किस्मत से शिकायत सबको होती है ।

Saturday, November 17, 2012

मै आइना हूँ

हमारी  जिन्दगी  है  एक  कहानी  की  तरह ,
हवा  हूँ  जिसमें  मैं  और  तू  पानी  की तरह ,

मेरी रुखों से तू  दामन तो यूं  छुड़ा के न जा ।
मै आइना  हूँ ,  मुझसे  नजर  चुडा के न जा ।

मैं वो खुशबू हूँ जो,जरूरी है जिन्दगी के लिए ,
मै बनाई गई  हूँ ,  दुनिया की ख़ुशी के लिए ,

महकता फूल हूँ  , कांटा मुझे बना के  न जा ।
मै आइना  हूँ ,  मुझसे  नजर  चुडा के न जा ।

बहुत कोशिश है तेरी , खुद को छुपाने की मगर ,
कहाँ जायेगा भला  ,  खुद से चुरा के तू नजर ,

मै  तो तस्वीर हूँ तेरी ,  मुझे मिटा के न जा ।
मै आइना  हूँ ,  मुझसे  नजर  चुडा के न जा ।

तू  जर्रा  नही  ,  तू  खुद  में  एक  दरिया  है ,
गमें - निजात  का  , तू  भी  एक  जरिया है ,

अपनी पहचान को नादान यूं मिटा के न जा ।
मै आइना  हूँ ,  मुझसे  नजर  चुडा के न जा ।

तुझे  मालूम  है  , तेरी  जिन्दगी  का  सबब ,
मुझमे देख अपना अक्स, और जाग जा अब ,

मै  तेरी जीत  हूँ ,  मुझको यूं  हरा  के न जा ।
मै आइना  हूँ ,  मुझसे  नजर  चुडा के न जा ।

Friday, November 16, 2012

कोरा खत

कोरा खत वो भेज के बोलें ,
दिल की जुबां कहाँ से लाऊ ।

धडकन की इस बेचैनी का ,
सार तुम्हे कैसे समझाऊ ।

कहीं तू मुझसे रूठ न जाये ,
यही सोंच के चुप रहता हूँ ।

पास मैं तेरे आ नही पाता ,
दूर मै तुझसे कैसे जाऊ ।

मौसम कितना बदल गया है

तुमने क्या बोला सूरज से ,
अब वो भी गुमसुम रहता है ।

जाने तुम कहाँ गुम रहते हो ,
जाने वो कहाँ गुम  रहता है ।

मुझे  पता  है  खेल ये सारा ,
तेरी  उदासी  से  फैला  है ।

दुनिया  वाले  समझ  रहे  हैं ,
मौसम कितना बदल गया है ।

Thursday, November 15, 2012

शायरी

पीने और पिलाने का , हंसी ये दौर रहने दो।
                            कहाँ जायेंगे दीवाने , दिल में ठौर रहने दो ।

चस्का लग गया दिल को, तेरे इश्क का यारा ,
                         वही इक जाम फिर लाओ ,बांकी और रहने दो ।


मै कैसे बेवफा कह दूँ

मै कैसे बेवफा कह दूँ ,
तू रुसवा सजन होगा ।

 छुपा तो लूँ जख्म सारे ,
मगर दिल में जलन होगा ।

तमाशबीन ये दुनियां ,
मज़ा लेगी तमाशे का,

जहाँ के सामने रुसवा ,
मुहब्बत का चलन होगा ।

सबब पूछेंगे सब तुमसे ,
तुम्हारी  बेवफाई  की ,

उठेंगी उँगलियाँ तुमपे ,
झुका मेरा नयन होगा ।

 रहेंगी राज बनके अब ,
हकीकत ये मेरे दिल में ,

मरूंगी मैं तो मेरे  साथ ,
ये किस्सा दफन होगा । 

राह का पत्थर

कभी राह का पत्थर था मै ,
ठोकर रोज लगाते थे सब ।

वही आज जब मूरत बनके ,
बैठा हूँ मन्दिर के अंदर ।

रोज न जाने मेरे आगे ,
झुकने आते हैं कितने सर ।

Wednesday, November 14, 2012

शायरी

मचलता है तुम्हारे जाने की बात पे ये दिल  ,
                क्या पता तुम उधर जाओ इधर ये दिल मचल जाये ।

तुम्हारा क्या चला जायेगा थोड़ी देर में बोलो ,
                     जरा सी देर ठहरो क्या पता तबियत बहल जाये ।

प्यार कभी भी कम मत करना

दूर  भले  ही  हैं  हम  तुमसे ,
                 पर इसका तुम गम मत करना ।

याद  मेरी  जब  आये  तुमको ,
                आँखें  अपनी  नम  मत  करना ।

इतनी सी चाहत है दिल की  ,
                 मुझको  अपने  दिल  में  रखना ।

मेरी  खातिर  साजन  मेरे ,
                 प्यार कभी भी कम मत करना ।

Tuesday, November 13, 2012

शायरी

सनम आपको हम जो दिल ही न देते ,
                      तो  जीना  हमारा  न  दुस्वार होता ।

मगर क्या करे ,हम जो दिल न लगाते ,
                     हमारा  ही  दिल  ये  हमे  मार  देता । 

मेरा दिल जलालो

नफरत  बहुत  है  जमाने के दिल में ,
मुहब्बत भरे अपने दिल में छुपालो ।

बहुत ही बड़ा है सनम दिल तुम्हारा ,
 मुझे भी कहीं अपने दिल में समालो ।

रोये  बहुत याद  में  हम  तुम्हारी ,
आँखों  से  अब  आंसुओं  को चुरालो । 

लड़ते  हुए  इस  जमाने  से  तन्हा ,
बहुत थक गई आओ तुम्ही सम्भालो ।

बहुत  बार  तुमने  है  आके  उबारा ,
हूँ मझधार में फिर से आके बचालो ।

नाराज  हम  तुमसे  होंगे  न  यारा ,
चाहे  हमे  आके  जितना  सतालो  ।

इस  बार  भी  बीती  सूनी  दिवाली ,
लो इस बार भी तुम मेरा दिल जलालो ।


Monday, November 12, 2012

शायरी

मन्दिर खाली  है , मैखाने में  भीड़ लगती है ,
                      भूखें सोते हैं बच्चें , शराबें रोज बिकती हैं ।
कई दिन से ,कई चूल्हों में आग जल नही पाई ,
                    दिलों में आग है इतनी, मकानें रोज जलती हैं । 
 

बड़े शौक से प्यार करते हैं वो

बड़े शौक से प्यार करते हैं वो ।
मुहब्बत में मेरी संवरते है वो ।

रहे दूर हम , राह तकते तो हैं ,
मगर पास जाते, अकड़ते हैं वो।

कहने को कुछ पास आते तो हैं ,
मगर पूछते ही ,मुकड़ते हैं वो ।

इक पल में ही प्यार आता है उनको ,
इक पल में ही फिर बिगड़ते है वो ।

समझते नहीं मेरी मजबूरियों को ,
हर  बात  पे अपनी  अड़ते  हैं वो ।

सारा जहाँ नफरत करता है जिससे ,
मेरी उस अदा पे ही , मरते हैं वो ।

आते  जो  हैं  प्यार  हमसे  जताने ,
पूछे  कोई  फिर  वो  लड़ते  हैं  क्यों ।

शायरी

अगर टूट के तू जो बिखडेगा यारा,
                     सर पे मुहब्बत के तोहमत लगेगी ।

लायेंगे हम ढूंढ़  के तेरी खुशियाँ ,
                      ठहर जा ,जरा और मोहलत लगेगी ।

Saturday, November 10, 2012

दिल की रियासत

दुनियां की तख्तो-ताज , मुबारक रहे तुम्हे ,
अपने लिए तो दिल की, रियासत ही बहुत है ।

हीरे - मोतियों  की  ख्वाहिश  नही  हमें ,
जीने के लिए प्यार की, आदत ही बहुत है ।

रंगीनियों  में  भी  वो  प्यार  भूलते  नहीं ,
प्यार पे उनकी ये  ,  इनायत ही बहुत है ।

दुश्मन बनाने  की  ,  जरूरत  नही  पड़ी ,
दुश्मनी के लिए दिल की ,बगावत ही बहुत है ।

 हमें  इम्तहान  प्यार  में  देना  नही  पड़ा ,
कहते हैं ,तेरे आंसुओं में ,ताकत ही बहुत है ।

गुस्सा  बहुत  आता  है  शैतानी  पे  उसकी ,
पर  क्या  करे  उसमें ,  शराफत भी बहुत है ।

कैसे करे यकीन दिल , दुनिया की बात पे ,
बातों  में  जहाँ  की ,  बनावट ही  बहुत है ।

Friday, November 9, 2012

शायरी

थक जाओ जब अपनी रंगीन मिजाजी से ,
                        तब सोचना तुमने क्या खोया है क्या पाया ।

ताकत बहुत थी तुममे दुनियां को जीतने की ,
                       अफ़सोस है इतना की तू खुद से न जीत पाया ।

Wednesday, November 7, 2012

शायरी

गुस्सा भी है उसी से , ख़ुशी भी उसी से ,
                 नफरत भी है उसी से , दोस्ती भी उसी से ।

इस प्यार भड़ी मीठी सी तकरार के बदले ,
                    वो जान भी मांगे तो ,  दे देंगे ख़ुशी से ।

अजनबी शहर के लोग

कई दिनों के बाद,
उसने खिड़कियाँ खोली ,
अनमनी आँखों से ,
देखते हुए बोली ,
तुम कौन हो ?
क्या तुम्हे जानती हूँ मैं ?
उस दिन से हमको ये मालूम हुआ है ,
इस अजनबी शहर के लोग बोलते भी हैं ।

तुम आओ

प्यार अगर ना दे पाओ , नफरत ही जताने तुम आओ ,
मज़ा खेल का तब आये जब , दांव लगाने तुम आओ ।

जान  की बाजी खेल तो जाये  ,  एक  इशारे पे तेरे ,
इतना सा एहसास रहे गर , मुझे बचाने तुम आओ ।

तुम कहते हो बात तुम्हारी , अनसुनी करते हैं हम ,
कौन सी बात नही मानी , ये ही समझाने तुम आओ ।

तरस  बहुत  आता है तुमको , गर मेरे हालातों पर ,
कसर सभी पूरी कर दो और ,जी बहलाने तुम आओ ।

मेरे इस दीवाने दिल को , चैन तभी मिल पायेगा  ,
होकर के बेचैन कभी जो , प्यार जताने तुम आओ ।

दिल ने हर जर्रे - जर्रे पर ,  नाम तेरा लिख रखा है ,
तुमको गर इनकार हो यारा , नाम मिटाने तुम आओ ।

इसी आस में जीते हैं कभी ,  आओगे हमसे मिलने ,
मैयत में ही यार मेरी पर , किसी बहाने तुम आओ ।


Tuesday, November 6, 2012

शायरी

तेरे दिल से गम हम मिटायें तो कैसे ,
                    ख़ुशी से तेरा वास्ता ही नही है ।

सजा रखी है तुमने काँटों की महफिल ,
                   बहारें तो हैं , रास्ता ही नही है ।

प्यार मुझे कितना आता है

जाने क्यूँ तुमपर यारा ,
                प्यार मुझे इतना आता है ।

कैसे मैं समझाऊं  तुमको  ,
               प्यार मुझे कितना आता है ।

अम्बर में जीतनें तारे हैं ,
                    सागर में जितना पानी ।

फूलों में जितनी खुशबु हैं ,
               समझो तो उतना आता है ।            


शायरी

हम उनके मुहब्बत का नया ढंग देखते हैं ,
                     बदलेंगे अभी कितने उनके रंग देखते हैं ।

पाएंगे किस तरह से वो सुकून सोंचते हैं ,
                  नादान वो तो प्यार में भी वो जंग देखते है ।

Monday, November 5, 2012

शायरी

                             1

ठहरे जहाँ रात भर तू मुसाफिर ,
             ये दिल है , तेरा बसेरा नही है ।

तुझे भी खबर है, मुझे भी पता है ,
              मैं तेरी नहीं हूँ, तू मेरा नही है ।



                             2


रिवाजे - इश्क से अंजान , वो  अभी जानते नहीं ,

की जिसपे प्यार आये वो कली मसला नही करते ।

शायरी

                           1

 किमत भी लगाते  हो  ,  सरेआम  प्यार  का ,


और हमसे  जताते  हो , दिल बिकाऊ नही है ।

                          2

हम जिनके सम्भलने की दुआ करते है दोस्तों ,


वो ही मेरे फिसलने की राह  देखता है रोज  ।



Thursday, November 1, 2012

शायरी

कहता था मुझे, वो है मेरी तकदीर का हिस्सा ,
                जिसे दिल में सजाते हैं , उस तस्वीर का हिस्सा ।

जब परदा उठा , तब ये हकीकत सामने आई ,
                 वो भी है बहुत मजबूर , किसी भीड़ का हिस्सा ।

शायरी

ये बेकरारी कहाँ ले के जाएँ ,
                   सनम ये खुमारी कहाँ ले के जाएँ ।

जहाँ में वही इक जहाँ तुम बतादो ,
                       यादें तुम्हारी जहाँ लेके जाएँ ।

Wednesday, October 31, 2012

शायरी

तेरी उम्मीद में ये  दिल , कहाँ -कहाँ न छला ,
                    मैं चली साथ मेरे , मेरा साया न चला ।

तेरी यादों का जोर लेके हवा ऐसी चली ,
              दिल के विरानें में  फिर , कोई दिया न जला ।

शायरी

इश्क की राहों में  ,  अजीब दास्ताँ देखा ,
                    दिल के पहलू में , जन्नत भरा जहाँ देखा ।

गये जब देखने खुदा को तो ,महबूब दिखा ,
                     गये महबूब को जब देखने ,  खुदा देखा ।


Sunday, October 28, 2012

शायरी

हंस  रहा  है  आसमां  ,  मुस्कुराती  है  जमीं  ,
                         दर्द  में  है  दिल  मगर  , चुभ  रही  तेरी कमी ।

क्या पता तुझको की , क्या है तू मेरा, मेरे लिए ,
                        तू ही दिल का चैन भी है ,तू ही आँखों की नमी ।

मुहब्बत में झूठ बोलना अच्छा नही होता

मुहब्बत में झूठ बोलना , अच्छा नही होता ,
सबसे राजे-दिल खोलना , अच्छा नही होता ।

नादान  हैं  वो ,  अबतलक समझे ही नही है ,
दिलबर के दिल से खेलना,अच्छा नही होता ।

उनको नही पता अभी ,  होता है दिल अनमोल ,
भड़े बाजार दिल को मोलना ,अच्छा नही होता ।

माना की उनके संग अब ,चलना नही मुमकिन ,
पर गैरों  के  संग  डोलना , अच्छा नही होता ।

हर  रोज  प्यार  द्वार  पे  ,  दस्तक नही देता ,
जब  आये  तो  मुंह फेरना ,  अच्छा नही होता ।

माँगा खुदा से दिल ने , अब  राहत  नसीब  हो ,
इतना  भी  तो  गम झेलना , अच्छा नही होता ।


Saturday, October 27, 2012

शायरी

इरादों में इतनी ताकत भरी है ,
                      मुसीबत है कितनी कहाँ देखते हैं ।

निगाहें भले ही जमीं पर लगी हैं ,
                        मगर हौसले आसमां देखते है ।

शायरी


ऐसी ख़ुशी उम्र भर चाहिए ,
                    यही जिन्दगी उम्र भर चाहिए ।

खुदा से यही मांग बैठे है हम ,
                 की तेरी दोस्ती उम्र भर चाहिए ।

शायरी

वो डोर कच्ची थी जो टूट गई  है ,
                                वो साथ अधूरी थी जो छुट गई है ।
कोई रूठा हो तो मना लेते मगर  ,
                       कैसे मनाएं जो जिन्दगी ही रूठ गई  है ।

Friday, October 26, 2012

शायरी

वही उलझनें हैं , वही  रंजिसे  हैं ,
                    जहाँ पे खड़े थे , वहीं पे खड़े हैं ।

हमने नही  हार मानी है  अपनी,
           और वो भी अपनी ही जिद पे अड़े हैं । 

Thursday, October 25, 2012

माँ

रात की  चांदनी ,सुबह की रौशनी हैं माँ ,
                   गम की मूर्छा में तो , जैसे संजीवनी हैं माँ ।

हम दें दर्द भी , तो भी , तू  प्यार देती है  ,
                   न जाने कौन सी मिटटी से, तू बनी है माँ ।


शायरी

झूठी वफा रास आती न दिल को ,
                  अच्छा हुआ जो कसम तोड़ डाला ।

खुदा मान लेते उसे इससे पहले ,
               मुहब्बत का उसने भरम तोड़ डाला ।


उनके लिए क्या मुहब्बत यही है

जब भी मिलें हैं , शिकायत ही की है ,
उनके लिए क्या , मुहब्बत यही है ।

कोशिश बहुत  की ,की हमदर्द बनते ,
उन्हें  साथ  से  मेरी , राहत नही है ।

कैसे पता हो  ,  है  क्या दर्द उनको ,
बेखबरी की उनकी , आदत रही है ।

मुहब्बत उसी से , गिला भी उसी से ,
ऐसी  ही  उनकी , इबादत रही है ।

है मंजूर उनको , अगर फ़ासला ही ,
रजा है दिल कोई , बगावत नही है ।

नाराजगी में भी ,  इतना करम है ,
वो भूले न हमको , इनायत रही है ।

Tuesday, October 23, 2012

शायरी

मैं  बसती इस देश में , पिया बसे उस देश ,
                       मैं जलती इस देश में , पिया जले उस देश ।

आवन - आवन कह  गये , आये ना  रे देश ,
                         तन मेरा इस देश में ,  मन मेरा उस देश ।

शायरी

मैं कौन हूँ , तू कौन है , इतना सा भरम था ,
                            मैं 'मैं' हूँ और तू 'तू' है , इतना सा ही गम था ।

जिस दिन से हम मुरीद हुए ,  हैं तेरे  मौला ,
                            मेरा 'मैं' ही  न रहा मेरा , तेरा ये करम  था ।

Sunday, October 21, 2012

इल्में मुहब्बत

आई  बहुत  ही बाद में , ये  इल्में मुहब्बत ,
करने से भी वफा कभी वफा नही मिलता ।

जलजला सिखा गया ,  जीने की ये अदा ,
खैरात में जीने का तजुर्बा नही मिलता ।

आजमां  के  तू  भी  मुहब्बत  को देख ले  ,
कहीं भी जा दिल को,आसरा नही मिलता ।

वो आके मस्जिद से भी ,खाली  चला गया ,
समझा नही झुके बिना, खुदा नही मिलता ।

शायरी

उस  में तो बस दर्द की , आदत बची रही ,
                       दुनिया के लिए दिल में बगावत बची रही ।

तूफान ने बर्बाद मुहब्बत को यूं किया  ,
                        खंडहर था महल , टूटी इमारत बची रही ।



Monday, October 15, 2012

पूछ कभी की हम कैसे हैं

पूछ कभी की हम ,कैसे हैं ।
                      दिल के अंदर गम कैसे हैं ।
प्यार में तेरे खुश हैं फिर भी ,
                      आँख हमारे नम कैसे हैं ।
पूछ कभी की हम ,कैसे हैं ।

कितनें सपनों के घर टूटें ,
                     कितनें अपनें राह में छूटें ,
टूटे  फूटें इन  किस्सों में ,
                   दिल ने सहें, सितम कैसे हैं ।
पूछ  कभी  की हम ,कैसे  हैं ।

कितनी बार मरा ये  दिल है ,
                बात ये बतलाना मुश्किल है ,
मरते-मरते भी इस दिल में   ,
               फिर मरने का दम  कैसे है ।
पूछ  कभी  की हम ,कैसे  हैं ।

पास मेरे जो दो दिल होतें ,
               दोनों  दिल तुमको ही  देते ,
तुम्ही अब बतलाओ तुमसे ,
             प्यार मुझे फिर कम कैसे है ।
 पूछ  कभी  की हम ,कैसे  हैं ।

मेरे गम मुझको सहने दे ,
                      तेरे  गम  तेरे  रहने  दे ,
तेरा- मेरा  बाकि  है जब ,
                 फिर हम कहो सनम कैसे हैं ।
पूछ  कभी  की हम , कैसे  हैं ।

शायरी

हो सकता है कल साथ तेरे  हम नही रहें ,
              पर चाहता है दिल तुझे कोई गम नही रहे ।

दो जहाँ की नेमतें तुझको नसीब हो ,
              खुशियाँ तुम्हारे वास्ते कभी कम नही रहे ।

शायरी

सलीका मुहब्बत का आया न उनको ,
                       वफाओं  के  बदले  गिला  देखते  हैं ।

उल्फत में चलती हैं देने की रस्में ,
                      वो नादान क्या-क्या मिला देखते हैं ।

Friday, October 12, 2012

रब को क्या मंजूर हो जाये

छुपाना जख्म यूं की ,   जख्म से नासूर हो जाये ।
दबा  न  दर्द  इतना  ,  दर्द  से  तू  चूर  हो  जाये ।

इम्तहां प्यार में अच्छा है पर इतना भी मत लेना ,
तू  जिसके  पास जाता हो , उसी  से  दूर हो जाये ।

मुहब्बत  ऐसे  कर  जैसे , इबादत  कर  रहा  कोई ,
तेरा इश्क दिल की दुनियां में  ,  मशहूर हो जाये ।

कभी न दांव पर अपनी ,कोई खुशियां लगा देना  ,
किसे मालूम है की ,  वक्त कब मगरूर हो जाये ।

कई जन्मों से इसी ताक  में , बैठे हैं  उस दर  पे ,
कभी हम उनके दिल में जा बसे और नूर हो जाये ।

घुमे वक्त का पहिया और किस्मत बदल डाले ,
किसे मालूम है कल,रब को क्या मंजूर हो जाये ।

तेरा गम नही जाता

मुहब्बत में कभी खाली कोई ,
                                      कसम नही जाता ।
रुत कोई हो लेकिन यादों का ,
                                    मौसम नही जाता ।
तेरे बीमार हैं बतला तुही ,
                                      हम कहाँ  जाते,
चले जाये कहीं पर दिल से ,
                               तेरा गम नही जाता ।

शायरी

कहो  कैसे बताएं हाले दिल , पागल जमाने को ।
                    लगा है ताक में हर शै , मेरे दिल को जलाने को ।

तरस  आता नही तुझको ऐ दुनिया मेरे दिल पे  ,
                    अभी मासूम दिल मेरा , चला तू आजमाने को ।

शायरी

बदले में जो दिल के वो  , दिल कहीं देते ,
                      मांग लेते जान  भी तो ,  हम वही देते ।

प्यार में निकले मगर शातिर खिलाडी वो ,
                  ले लिया जो दिल ,वापस  दिल नही देते ।

Wednesday, October 10, 2012

वो रात ऐसी थी

रात  भर  जलते  रहे ,  वो  रात  ऐसी  थी ,
खाब  में  चलते  रहे  कुछ  बात  ऐसी  थी ।

सो रही थी चांदनी जब चाँद के आगोश में ,
थम गया था वक्त , वो मुलाकात ऐसी थी।

शर्म से सिमटी  धरा  मुस्कुराई रात भर ,
चाँद  तारों  से  सजी  बारात  ऐसी  थी ।

कहने को एहसास लब थरथराते रह गये ,
हो  नही  पाए  बयाँ  जज्बात  ऐसी  थी ।

जिस तरफ नजरें उठी प्यार का दीदार था ,
हो  रही  वो  प्यार  की  बरसात  ऐसी  थी ।

लड़ने को तूफान से भी भर रहा था हौशला ,
थामी  थी  जो  हाथ  में  वो  हाथ ऐसी थी ।

घोर  सन्नाटे  में छुपके  ,थे नजारे सो गये ,
दो  नजर  जागी  रहीं   हालात  ऐसी  थी ।

मन्नतें मांगी थी कई जन्म तक इश्क ने ,
तब  कहीं  पाई  हो  , वो सौगात ऐसी थी ।
 

Tuesday, October 9, 2012

वो कहते हैं

तुझको अपने पास बिठाकर ,
तुझपर एक कहानी लिखते ।
मौसम कहते ,खुशबू  कहते ,
और फूलों की रानी लिखते ।

जीवन  के  कडवे   रूपों   में ,
तपती   हुई   कड़ी   धूपों  में ,
तुझको शाम सुहानी लिखते ।
तुझपर एक कहानी लिखते ।

उर्जा  भरी  तेरी  आँखों   से ,
स्फूर्ति   लेकर   सांसों   से ,
हर हिस्सा तूफानी लिखते ।
तुझपर एक कहानी लिखते ।

हरियाली  से  भरता  जीवन ,
खोल  पंखुरी  हँसता   यौवन ,
जोश से भरी जवानी लिखते ।
 तुझपर एक कहानी लिखते ।

आँखों   से  झरते  ये   मोती ,
इनकी चर्चा जब - जब होती ,
प्यार का मीठा पानी लिखते ।
तुझपर एक कहानी लिखते ।

इश्क  में  हम  ऐसे  गुम  होते ,
हर  किस्से  में  हम  तुम होते ,
तुम बिन जग बेमानी लिखते ।
तुझपर एक कहानी लिखते ।|


Sunday, October 7, 2012

शायरी

जुल्मों सितम सनम के, हम भी नही सहते ,
                                दिल  नही  लगाते  तो , बेदिल  नही  रहते ।

मिल जाता कही खोया हुआ दिल जो हमारा ,
                           खुदा की कसम फिर किसी को दिल नही देते ।

Saturday, October 6, 2012

शायरी

मेरी दोस्ती का दोस्तों इतना शिला देना,
                    मेरी नादानियों में प्यार तुम अपना मिला देना ।

याद बस  रखना ख़ुशी जो साथ में पाई ,
                    गम मिले हो जो ,  सभी दिल से भुला देना ।

Friday, October 5, 2012

ये तेरी मुहब्बत है या दीवानगी मेरी

ये  तेरी   मुहब्बत   है   या  दीवानगी   मेरी ,
जन्नत तेरे आगे सनम बेनूर लगता है ।

मुझसे दूर होके भी मेरी धडकन  में बसते हो,
जहाँ ये पास रहता है  फिर भी दूर लगता है ।

तेरे एहसास की खुशियाँ कभी भी कम नही होती ,
मेरी चाहत के आगे गम बहुत  मजबूर लगता है ।

समझती है मुझे दुनियां मैं तेरे प्यार में पागल ,
मुझे तो ये  तुम्हारे  प्यार  का सुरूर लगता है ।

माना  दर्द तुझको भी  है माना  दर्द मुझको भी ,
मगर सहलो  इसी से तो वफा में नूर लगता है ।

सितम इतने किये फिर भी उनको चैन न आया ,
इम्तहां  और  शायद  वक्त  को  मंजूर  लगता  है ।

शायरी

उस शख्स ने प्यार को बदनाम कर दिया ,
                               सर पे मुहब्बत के इल्जाम कर  दिया ।

जिस नाम से छुपके मुझे पुकारता था वो ,
                      उस नाम को जालिम ने सरेआम कर दिया ।

Thursday, October 4, 2012

शायरी

कसम खाते नही क्यूंकि कसम टूट जाते हैं ,
                          हाथ थामते है तो राहों में  छुट जाते हैं ।

क्या समझे इसे नफरत या बेरुखी उनकी ,
                         जरा सी बात पे जो ऐसे हमसे रूठ जाते हैं ।

Tuesday, October 2, 2012

कितना अच्छा होता

कब  से  रूठे  हैं , मना लेते तो अच्छा होता ,
गम को हाथों से सहला देते तो अच्छा होता ।

इससे पहले की मार डाले ये कसक मुझको ,
अपने सीने  में छुपा लेते तो अच्छा होता ।

कबसे प्यासे  हैं  , दो बूंद मुहब्बत के लिए ,
प्यार आँखों से पिला देते तो अच्छा होता ।

लोग  कहतें  हैं  सीने  में  मेरे  शोलें  है ,
तुम जो ये आग बुझा देते तो अच्छा होता ।

जिन्दगी  गीत  तराना  मैकशी  लगती ,
तुम भी साथ में गा लेते तो अच्छा होता ।

बैठ  कर  पहरों  तन्हाई  में  बातें करते ,
तुझमे हर दर्द भुला  देते तो अच्छा होता ।

कई रातों से तेरी यादों ने सोने न दिया ,
अपनी बाँहों में सुला देते तो अच्छा होता ।

बिन  तेरे  भी ये जिन्दगी बुरी  तो नही ,
पर जिन्दगी में आ जाते तो अच्छा होता ।

शायरी

ख़ुशी मिले तो गीत गाओ ,
                  गम हो तो आंसू बहाओ ।

प्यार है तो पास में रहना ,
               वरना हमसे दूर ही जाओ ।

शायरी

खता की नही फिर भी वो खतावार कहते हैं ,
                            बिना ही जुर्म के मुझको गुनहगार कहते हैं ।

मेरी मजबूरी पे गुस्सा बहुत करते हैं आजकल ,
                    और आफत है ये गुस्से को अपने प्यार कहते हैं ।

शायरी

प्यार का रंग है ये ,  रंग नही जायेगा ,
                           कोई तदबीर करलो काम नही आएगा ।

जितना ही मिटाएगा घिस घिस के तू इसे ,
                         प्यार और भी गहरा  ही हुआ जायेगा  ।

Monday, October 1, 2012

शायरी

कहते हैं सब है यही जिन्दगी ,
                              कभी हैं बहारें तो पतझर कभी ।

जीले  जो पल हैं मिलें साथ में ,
                       कल हम कहीं होंगे और तुम कहीं ।

वो प्यार ही क्या जो रुलाया नही

वो प्यार ही क्या जो रुलाया नही ,
वो दर्द ही क्या जो तडपाया नही ।

वो धडकन ही क्या जिसको कभी ,
सांसों  ने  धुन  पे  नचाया  नहीं ।

वो आँख ही क्या जिसमें कभी ,
खाब  किसी का ,  आया नही ।

वो इन्सान ही क्या जिसने  कभी  ,
है दिल किसी से लगाया  नही ।

वो तुम ही क्या जिसने हंसके ,
वफाओं को ठोकर लगाया नही ।

वो हम ही क्या जिसने तेरे लिए  ,
हर  गम ख़ुशी से उठाया  नही ।

Thursday, September 27, 2012

शायरी

जहाँ से चले थे वहीं पे खड़े हैं ,
                  रस्ता न जाने कहाँ खो गया है ।

कैसे मिले हमको मंजिल हमारी ,
               माझी ही जब बेवफा हो गया है ।

मुझे दुनियां वाले दीवानी कहेंगे

मुझे दुनियां वाले दीवानी कहेंगे ,
मेरे प्यार को कल कहानी कहेंगे ।
चलेंगी जब भी मुहब्बत की बातें ,
मुझको वफाओं की रानी कहेंगे ।

रिवाजों  के  झूठे   झमेले  रहेंगे ,
अपने  परायों   के  मेले  रहेंगे ।
नही दिल से तेरी कमी पर मिटेगी ,
अकेले  थे और हम  अकेले  रहेंगे ।

हर  बार  मंजर  बदलते  रहेंगे ,
सुबह शाम उगते और ढलते रहेंगे ।
नही घर नही आशियाना हमारा ,
मुसाफिर हैं हम यूँही चलते रहेंगे ।

कोने में अपने दिल के , मेरे भी दिल को रख दे

कोने में अपने दिल के ,  मेरे भी दिल को रख दे,
चाहत  पे अपने यारा ,  मेरा  भी  नाम लिख दे ।

माना नही कर  सकते ,  हम प्यार की गुजारिश ,
शिकवा गिला ही करलें, इतना तो मुझको हक दे ।

तुझे  सामने  बिठाकर ,  गर प्यार कर न पाए ,
तो  दूर  से  गुजर  जा ,  तेरा  दीदार कर लें  ।

तेरे  प्यार  में  दीवानी  ,  धडकन  हुई  जियादा ,
आ धडकनों में बस जा , सांसों में तुझको भर लें ।

Tuesday, September 25, 2012

वही रोज की बात

वही रस्ते वही मंजिल , वहीं हर रोज चला करते हैं ,
वही कसक वही तड़पन ,यूँहीं हर रोज जला करते हैं ।

टूट  जाते  हैं  ,  हकीकत   के  सामने  सपने ,
फिर  भी  आँखों  में  वही , खाब पला करते हैं ।

दिल्लगी  आदत  में  उनके  सुमार  जब से  हुई ,
छुडियाँ  रोज  ही  ,  दिलों  पे  चला  करते   हैं ।

पूछते  ही   नही , कभी  हाल  भी  बीमारों  का ,
दर्द  भी   दें   तो ,  कहतें  हैं  भला  करते  हैं ।

Sunday, September 23, 2012

शायरी

तुम्हारे बिना हम कहाँ दिल लगायें ,
             कहो तुम जहाँ हम वहाँ दिल लगायें |

महब्बत में जब टूटना ही है दिल को ,
              बताओ की क्यूँ बेवजा दिल लगायें |

शायरी

जहाँ में लोग कहतें हैं मुहब्बत एक धोखा है,
                   किया जिसने, कहाँ उसने कभी अंजाम सोंचा है ।

सदियों बाद भी , दुनियां ये समझ नही पाई ,
                     प्यार किया नही जाता , अपने आप होता है ।

Thursday, September 20, 2012

शायरी

इस तरह हम जिन्दगी का लुत्फ़ उठाते रहे ,
                                     प्यार ही दिया किये प्यार ही पाते रहें ।

जब हुए नाराज वो हमने मनाया उन्हें  ,
                                  हम कभी रूठा किये और वो मनाते रहें ।